Rupee vs Dollar: 94-95 से मजबूत होकर 92-93 तक आ सकता है रुपया! RBI के कदम से मिलेगी राहत
Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। हालांकि, अब एक्सपर्ट ने रुपये में बड़ी रिकवरी की उम्मीद जताई है। RBI के एक अहम कदम से करेंसी मार्केट को राहत मिल सकती है। जानिए रुपया कितना मजबूत होगा और इसमें कच्चे तेल की क्या भूमिका रहेगी।

In Short
- डॉलर के मुकाबले 94-95 से मजबूत होकर 92-93 के स्तर तक पहुंच सकता है भारतीय रुपया।
- RBI के नए कदम से ऑयल कंपनियों की डॉलर डिमांड का दबाव कम होने की उम्मीद।
- कच्चे तेल की कीमतें तय करेंगी रुपये की आगे की चाल, महंगा क्रूड बढ़ा सकता है मुश्किलें।
Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय करेंसी पर पड़ रहा है।
बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर शैल भटनागर के सवालों का जवाब देते हुए मनीष सोंथालिया ने बताया अब रुपये में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में समझिए कि रुपया कितना मजबूत हो सकता है, RBI के किस कदम से राहत मिल रही है और आगे इसकी चाल किन बातों पर निर्भर करेगी।
94-95 से 92-93 तक आ सकता है रुपया
Enkay Investment Managers के डायरेक्टर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) मनीष सोंथालिया का मानना है कि भारतीय रुपया इस समय अपनी सही वैल्यू से नीचे कारोबार कर रहा है। उनके मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतों में बहुत ज्यादा उछाल नहीं आता है, तो डॉलर के मुकाबले रुपया मौजूदा 94-95 के स्तर से मजबूत होकर 92-93 तक पहुंच सकता है।
सोंथालिया ने कहा कि भारत के मौजूदा एक्सपोर्ट को देखते हुए रुपये के लिए 92-93 का स्तर ज्यादा सही है। उनका मानना है कि रुपये में कमजोरी की बड़ी वजह देश की आर्थिक स्थिति खराब होना नहीं, बल्कि बाहरी दबाव और करेंसी मार्केट के हालात हैं।
RBI के इस कदम से रुपये को मिल रही राहत
सोंथालिया के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये पर दबाव कम करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। RBI ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से कहा है कि वे डॉलर खरीदने के लिए खुले बाजार में जाने के बजाय सीधे केंद्रीय बैंक से संपर्क करें।
दरअसल, तेल कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है। जब ये कंपनियां बाजार से डॉलर खरीदती हैं, तो डॉलर की डिमांड बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है। RBI के इस कदम से बाजार में डॉलर की मांग कम करने और रुपये को सहारा देने में मदद मिल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतें तय करेंगी रुपये की चाल
सोंथालिया ने साफ किया कि रुपये में मजबूती आने के लिए कच्चे तेल की कीमतों का स्थिर रहना जरूरी है। अगर क्रूड ऑयल और महंगा होता है, तो भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है।
इससे देश के करेंट अकाउंट, महंगाई और निवेशकों के भरोसे पर असर पड़ सकता है। वहीं, तेल की कीमतों में थोड़ी राहत मिलने से भी रुपया 92-93 के स्तर के आसपास पहुंच सकता है।
रुपये की मजबूती से किसे होगा फायदा?
डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने से भारत में विदेशों से आने वाले सामान की लागत कम हो सकती है। इससे इंपोर्टेड महंगाई पर दबाव घटेगा और कंपनियों के खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा मजबूत रुपया विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में भी मदद कर सकता है। खासकर ऐसे समय में जब ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर रही है।
फिलहाल रुपये में सुधार की उम्मीद जरूर है, लेकिन यह पूरी तरह कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। तेल की कीमतों में बड़ी तेजी आने पर रुपये की मजबूती का अनुमान प्रभावित हो सकता है।