डॉलर के सामने रुपये की जोरदार वापसी! एक हफ्ते में 1.9% की तेजी, क्या RBI की रणनीति ने किया कमाल?
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने जोरदार वापसी करते हुए सात महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी दर्ज की है। RBI के कदमों से रुपया 38 दिन बाद 95 के नीचे पहुंच गया है। लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट ने चिंता बढ़ा दी है। क्या रुपये की यह मजबूती आगे भी बनी रहेगी?

In Short
- डॉलर के मुकाबले रुपये में 7 महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी।
- 38 दिन बाद रुपया 95 के नीचे, 94.71 पर हुआ बंद।
- विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 726.02 अरब डॉलर पर पहुंचा।
भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जोरदार वापसी की है। पिछले सात महीनों में रुपये ने सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की है। करीब 38 दिनों बाद रुपया 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे बंद हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उठाए गए कदमों का असर दिखने लगा है। हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट चिंता बढ़ा रही है।
एक हफ्ते में कितना मजबूत हुआ रुपया?
17 अक्टूबर को सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, रुपया डॉलर के मुकाबले 94.71 के स्तर पर बंद हुआ। एक हफ्ते पहले यह 96.73 पर था।
DBS बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव के मुताबिक, RBI के हालिया कदमों के बाद पांच दिनों में रुपया 1.8 फीसदी मजबूत हुआ है। इससे इस साल अब तक रुपये की गिरावट घटकर 5.5 फीसदी रह गई है।
खास बात यह है कि कच्चे तेल की कीमत करीब 105 डॉलर प्रति बैरल होने के बावजूद रुपये में सुधार आया है।
रुपये को संभालने के लिए RBI ने क्या किया?
रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI ने कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचने के साथ सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए नियम सख्त किए हैं।
इसके अलावा नकदी प्रबंधन और आयात से जुड़ी डॉलर की मांग कम करने पर भी ध्यान दिया गया है।
राधिका राव के मुताबिक, साल 2013 के मुकाबले इस बार RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार और नियमों से जुड़े खास उपायों को प्राथमिकता दी है।
विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट
रुपये की मजबूती के बीच भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घटा है। 4 सितंबर को यह रिकॉर्ड 785.7 अरब डॉलर पर था, जो 9 अक्टूबर तक घटकर 726.02 अरब डॉलर रह गया।
सिर्फ एक हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार में 8.58 अरब डॉलर की कमी आई है।
हालांकि, इस पूरी गिरावट के लिए RBI की डॉलर बिक्री को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। विदेशी मुद्रा भंडार की वैल्यू में बदलाव भी इसकी वजह हो सकता है।
क्या आगे भी मजबूत रहेगा रुपया?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रुपये की मजबूती आगे भी बनी रहेगी या नहीं, यह कई बातों पर निर्भर करेगा। इनमें कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेश शामिल हैं।
राधिका राव के मुताबिक, बाजार को शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में राहत और एक्सपोर्टर्स को डॉलर भारत लाने के लिए प्रोत्साहित करने जैसे कदमों की उम्मीद है।
फिलहाल RBI के उपायों से रुपये पर दबाव कम होता दिख रहा है। लेकिन केंद्रीय बैंक के सामने चुनौती यह है कि विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार दबाव डाले बिना रुपये में स्थिरता कैसे बनाए रखी जाए।