भारतीय बैंकों की डॉलर बॉन्ड बिक्री ने बनाया रिकॉर्ड, 9 अरब डॉलर के करीब पहुंचा आंकड़ा
भारतीय बैंकों ने डॉलर बॉन्ड बाजार में नया रिकॉर्ड बना दिया है। इस साल अब तक करीब 9 अरब डॉलर के बॉन्ड जारी हो चुके हैं। RBI की कम लागत वाली विदेशी मुद्रा सुविधा के चलते बैंक तेजी से विदेशी बाजार से फंड जुटा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा भी बढ़ रहा है।

In Short
- भारतीय वित्तीय संस्थानों की डॉलर बॉन्ड बिक्री 2026 में 8.85 अरब डॉलर तक पहुंची
- RBI की विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा से बैंकों को कम लागत पर विदेशी फंड जुटाने में मदद मिली
- ICICI Bank समेत कई बैंक डॉलर बॉन्ड बाजार में तेजी से बढ़ा रहे हैं अपनी मौजूदगी
भारतीय वित्तीय संस्थानों ने इस साल डॉलर बॉन्ड के जरिए करीब 9 अरब डॉलर जुटाकर नया रिकॉर्ड बना दिया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक इस मौके का फायदा उठा रहे हैं क्योंकि रिजर्व बैंक की एक खास सुविधा से विदेशों से पैसा जुटाने की लागत कम हुई है। ICICI बैंक की नई बॉन्ड बिक्री के बाद यह आंकड़ा 8.85 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और आगे भी बढ़ने की उम्मीद है। इस बढ़ती रफ्तार के पीछे RBI की वह पहल है जिसने बैंकों को विदेशी बाजार से फंड जुटाने का बेहतर मौका दिया है।
ICICI बैंक की 750 मिलियन डॉलर की डील से बढ़ा आंकड़ा
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ICICI बैंक ने सोमवार को अमेरिकी डॉलर में 750 मिलियन डॉलर का कर्ज जुटाया। इसके साथ ही 2026 में भारतीय संस्थानों की कुल डॉलर बॉन्ड बिक्री 8.85 अरब डॉलर हो गई। यह आंकड़ा 2019 के पूरे साल के 7.92 अरब डॉलर के पिछले रिकॉर्ड से भी ज्यादा है। कोटक महिंद्रा बैंक ने 5 साल की डॉलर बॉन्ड बिक्री के लिए शुरुआती कीमत तय की है, जबकि यस बैंक ने भी ऐसी बॉन्ड बिक्री की तैयारी शुरू कर दी है।
RBI की सुविधा से बैंकों को मिला बड़ा फायदा
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉलर बॉन्ड बिक्री में तेजी जून की शुरुआत में RBI की ओर से शुरू की गई विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा के बाद आई। इस सुविधा का मकसद कमजोर होती रुपये की स्थिति को संभालना, देश में लिक्विडिटी बढ़ाना और कर्ज ग्रोथ को सपोर्ट करना था। यह खास उधारी विंडो 31 दिसंबर तक खुली है, इसलिए कई बैंक अपनी बॉन्ड बिक्री को तेजी से पूरा कर रहे हैं।
विदेशी जमा वाली सुविधा बंद होने से बढ़ी जल्दबाजी
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए भी एक खास सुविधा शुरू की थी, लेकिन शुक्रवार को इसे तय समय से एक महीने पहले बंद कर दिया गया। इस सुविधा के जरिए देश को विदेशों में रहने वाले भारतीयों से 50 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम मिली थी। इसके बंद होने से छोटी अवधि वाले भारतीय बॉन्ड पर दबाव आया क्योंकि बाजार में रुपये की लिक्विडिटी को लेकर चिंता बढ़ी।
बैंकों ने विदेशी बाजार का रुख क्यों किया
रिपोर्ट के मुताबिक, नोमुरा के एशिया क्रेडिट डेस्क एनालिस्ट निकोलस यैप के मुताबिक भारतीय बैंकों की डॉलर बॉन्ड बिक्री का मुख्य कारण विदेशों में रहने वाले भारतीयों से जमा राशि जुटाने की क्षमता बढ़ाना है। उनका मानना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में बैंक तेजी से डॉलर बॉन्ड जारी कर सकते हैं, लेकिन इसके बाद रफ्तार कम हो सकती है क्योंकि हेजिंग लागत अभी भी ज्यादा बनी हुई है।
वित्तीय संस्थानों का रहा सबसे बड़ा हिस्सा
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल भारतीय कंपनियों की कुल डॉलर उधारी में करीब दो तिहाई हिस्सा वित्तीय संस्थानों का रहा है। बैंक RBI की कोशिशों का फायदा उठाकर विदेशी पूंजी जुटाने में आगे रहे हैं। इस सुविधा के तहत कम से कम तीन साल की औसत अवधि वाले कर्ज पर सालाना 1.5 प्रतिशत की तय दर मिल रही है, जो मौजूदा बाजार लागत से कम है।
विदेशी निवेशकों का भारतीय बैंकों पर भरोसा बढ़ा
निजी और सरकारी दोनों तरह के बैंकों ने डॉलर बॉन्ड बाजार में सक्रियता दिखाई है। सिटीग्रुप के मुताबिक मजबूत ग्लोबल ऑर्डर बुक के कारण हाल की कई डील शुरुआती अनुमान से बेहतर कीमत पर पूरी हुई हैं। इससे पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की भारतीय बैंकिंग सेक्टर के क्रेडिट में दिलचस्पी बनी हुई है।