वायु सेना की बढ़ेगी ताकत, भारत ने खरीदे 160 SAT-SAAW हथियार, BDL से 810 करोड़ की डील

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाने के लिए BDL के साथ 810.79 करोड़ रुपये की डील की है। इसके तहत 160 SAT-SAAW हथियार खरीदे जाएंगे। DRDO द्वारा विकसित यह सटीक गाइडेड ग्लाइड बम लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज के साथ दुश्मन के एयरफील्ड को निशाना बनाने में सक्षम है।

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In Short

  • रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 160 SAT-SAAW और संबंधित उपकरणों की खरीद को लेकर BDL के साथ 810.79 करोड़ रुपये की डील की।
  • SAT-SAAW एक एयर-टू-ग्राउंड प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम है, जिसे जगुआर, हॉक और सु-30 एमकेआई जैसे विमानों से लॉन्च किया जा सकता है।
  • DRDO द्वारा विकसित इस हथियार में 60% स्वदेशी सामग्री है, जिसकी डिलीवरी 2027-28 और 2028-29 के बीच तय की गई है।

By Sonam:

रक्षा मंत्रालय ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत डायनामिक्स लिमिटेड यानी BDL के साथ एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस डील के तहत भारतीय वायु सेना के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन्स यानी SAT-SAAW और इससे जुड़े उपकरण खरीदे जाएंगे।

इस अनुबंध की कुल लागत 810.79 करोड़ रुपये है। यह खरीद बाय इंडियन-इंडिजिनसली डिजाइंड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड श्रेणी के तहत की गई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में यह करार पूरा हुआ।

SAT-SAAW क्या है और क्यों है खास?

SAT-SAAW एक एयर-टू-ग्राउंड प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम है। इसे भारतीय वायु सेना के जगुआर, हॉक और सु-30 एमकेआई जैसे विमानों से लॉन्च किया जा सकता है।

इस हथियार की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज है। इसकी मदद से विमान को दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली के ज्यादा करीब जाने की जरूरत नहीं पड़ती और दूर से ही एयरफील्ड को निशाना बनाया जा सकता है।

DRDO ने किया डिजाइन और विकसित

SAT-SAAW प्रणाली को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO ने डिजाइन और विकसित किया है। इस हथियार में 60 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

इसके कई महत्वपूर्ण उप-प्रणालियां भी देश में ही विकसित की गई हैं। इनमें इनिशियल मेजरमेंट यूनिट, लॉन्ग इंपैक्ट डिले फ्यूज और ट्विन स्टोर कैरियर शामिल हैं।

दुश्मन के एयरफील्ड को नुकसान पहुंचाने में सक्षम

ग्लाइड बम होने के कारण SAT-SAAW हवा में तैरते हुए लक्ष्य तक पहुंचता है। इसमें सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम लगाया गया है, जिससे लक्ष्य पर सटीक वार करने में मदद मिलती है।

यह हथियार दुश्मन के रनवे, टैक्सीवे और अन्य एयरफील्ड सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने में प्रभावी होगा।

2027-28 और 2028-29 के बीच होगी डिलीवरी

SAT-SAAW और संबंधित उपकरणों की डिलीवरी 2027-28 और 2028-29 के बीच निर्धारित की गई है। इसके भारतीय वायु सेना में शामिल होने के बाद उसकी कार्रवाई क्षमता को मजबूती मिलेगी।

यह समझौता भारतीय रक्षा उद्योग की क्षमता को भी दिखाता है। BDL जैसे सार्वजनिक उपक्रम DRDO की तकनीक को उत्पादन में बदलने का काम कर रहे हैं।

वायु सेना की स्ट्राइक क्षमता होगी मजबूत

इस आधुनिक सटीक हथियार के मिलने से भारतीय वायु सेना की स्ट्राइक क्षमता बढ़ेगी। लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज के कारण पायलट और विमान दोनों की सुरक्षा बेहतर होगी।

यह डील देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने और विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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