India-US Trade Deal पर अटकी बात? निर्मला सीतारमण बोलीं- समझौते की गुंजाइश अब काफी सीमित
भारत और अमेरिका के बीच बड़े ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अब दोनों पक्षों के लिए आगे समझौता करना मुश्किल होता दिख रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि बातचीत एक ऐसे स्तर पर पहुंच गई है जहां ज्यादा गुंजाइश नहीं बची है। बेहतर टैरिफ से लेकर रूसी तेल तक कई मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं।

In Short
- भारत-अमेरिका ट्रेड बातचीत एक मुश्किल स्तर पर पहुंची।
- भारत अमेरिका से बेहतर टैरिफ रेट का भरोसा चाहता है।
- - रूसी तेल की खरीद भी ट्रेड बातचीत में बड़ी चुनौती बनी।
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत एक ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जहां दोनों देशों के लिए आगे समझौता करना मुश्किल हो सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत एक तरह के “प्लैटो” पर पहुंच गई है, जहां से आगे कुछ देना या लेना काफी मुश्किल हो सकता है।
निर्मला सीतारमण ने क्या कहा?
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष ऐसे स्तर पर पहुंच चुके हैं, जहां आगे समझौते के लिए गुंजाइश काफी सीमित है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि बातचीत अभी जारी है और अगर दोनों पक्षों के पास आगे बढ़ने की गुंजाइश होगी तो वे ऐसा कर सकते हैं।
इससे पहले अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमीसन ग्रीर ने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत जारी है, लेकिन समझौता तुरंत होने की स्थिति में नहीं है। दोनों देशों ने उन मुद्दों की पहचान कर ली है, जिन पर अभी सहमति बननी बाकी है।
किन मुद्दों पर फंसी है बात?
भारत और अमेरिका लंबे समय से एक बड़े ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहे हैं। भारत बेहतर शर्तों पर समझौता चाहता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय अधिकारियों ने अमेरिका से यह भरोसा भी मांगा है कि भारत को दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ रेट मिले और डील होने के बाद उस पर अतिरिक्त पेनल्टी न लगाई जाए।
रूसी तेल बना नई चुनौती
ट्रेड डील की बातचीत के बीच रूसी तेल का मुद्दा भी एक चुनौती बनकर सामने आया है। अमेरिका का नया कानून राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
भारत रूसी तेल का बड़ा खरीदार है। ऐसे में संभावित अमेरिकी टैरिफ भारत के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। भारत पहले ही अमेरिका को बता चुका है कि रूसी तेल की खरीद से जुड़े नए टैरिफ कदम दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है, लेकिन वित्त मंत्री के बयान से साफ है कि दोनों पक्षों के लिए आगे समझौते की गुंजाइश अब काफी सीमित रह गई है।