G20 में भारत का दबदबा! 2014-2026 के बीच सबसे तेज बढ़ी इकॉनमी, चीन-अमेरिका भी पीछे
2014 से 2026 के बीच भारत ने G20 की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ते हुए नॉमिनल डॉलर टर्म्स में सबसे तेज ग्रोथ दर्ज की है। कोविड, महंगाई और ग्लोबल तनाव जैसे झटकों के बावजूद भारत की इकॉनमी दोगुने से ज्यादा बढ़ी। जानिए किन वजहों से भारत इस रैंकिंग में नंबर-1 बना।

In Short
- भारत 6.1% सीएजीआर के साथ G20 की बड़ी इकॉनमी में पहले नंबर पर रहा।
- चाइना 5.9% और यूनाइटेड स्टेट्स 5.3% सीएजीआर के साथ भारत से पीछे रहे।
- 2014 से 2026 के बीच भारत की इकॉनमी का साइज दोगुने से ज्यादा होकर करीब $4.15 ट्रिलियन पहुंचा।
भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ सालों में दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपनी जगह और मजबूत की है। IMF, वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक और वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों पर आधारित तुलना में 2014 से 2026 के बीच भारत की ग्रोथ तेज रही है। कई ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती रही और इसका असर G20 देशों की रैंकिंग में भी दिखा।
2014-2026 में भारत बना G20 का सबसे तेज बढ़ने वाला देश
2014 से 2026 के बीच भारत ने डॉलर के हिसाब से 6.1% की सालाना औसत ग्रोथ दर्ज की और G20 की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में पहले नंबर पर रहा। चीन 5.9% के साथ दूसरे और अमेरिका 5.3% के साथ तीसरे नंबर पर रहा। इसके बाद सऊदी अरब, तुर्कीये, इंडोनेशिया, मेक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और कनाडा का नंबर रहा।
भारत की अर्थव्यवस्था का आकार दोगुने से ज्यादा हुआ
इन आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2026 के बीच भारत की अर्थव्यवस्था का आकार दोगुने से ज्यादा हो गया। अब यह करीब 4.15 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच रही है। यानी दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी और अहमियत पहले से काफी बढ़ी है।
कोविड और ग्लोबल संकटों के बीच भी ग्रोथ जारी रही
भारत की यह ग्रोथ ऐसे समय में हुई, जब दुनिया को कई बड़े संकटों का सामना करना पड़ा। इस दौरान कोरोना महामारी, बढ़ती महंगाई, सप्लाई चेन में दिक्कत, देशों के बीच तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने ग्लोबल ट्रेड और निवेश को प्रभावित किया। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने अपनी रफ्तार बनाए रखी।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ा फोकस
भारत की ग्रोथ के पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से बढ़ना भी एक अहम वजह माना जा रहा है। देश में बिजली उत्पादन की क्षमता करीब 248 GW से बढ़कर 532.74 GW हो गई है। नेशनल हाईवे नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है, जिससे कनेक्टिविटी बेहतर हुई और सामान की आवाजाही आसान हुई।
ये खबर पढ़ना ना भूलें: अमेरिका के नए बिल से भारत की बढ़ी चिंता, रूस से सस्ता तेल खरीदना पड़ सकता है भारी
इसके अलावा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इससे अर्थव्यवस्था के अलग-अलग सेक्टरों को सपोर्ट मिला।
2004-2014 में तस्वीर थी बिल्कुल अलग
अगर 2004 से 2014 के बीच की बात करें तो उस समय भारत की डॉलर के हिसाब से सालाना औसत ग्रोथ 10.9% थी। इसके बावजूद G20 देशों की तुलना में भारत सातवें नंबर पर था। उस समय चीन 18.3% के साथ पहले नंबर पर था। ब्राजील, रूस, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना और सऊदी अरब भी भारत से आगे थे।
डॉलर में तेज ग्रोथ लेकिन इसके मायने समझना भी जरूरी
हालांकि इन आंकड़ों को समझते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। डॉलर में दिखने वाली ग्रोथ पर महंगाई, रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव और पिछले साल के कम या ज्यादा बेस का असर पड़ सकता है।
इसलिए सिर्फ डॉलर ग्रोथ से यह तय नहीं किया जा सकता कि लोगों की कमाई या जीवन स्तर कितना बेहतर हुआ है। फिर भी 2014 से 2026 के बीच इस रैंकिंग में भारत का पहले नंबर पर रहना अहम है। इससे यह संकेत मिलता है कि ग्लोबल इकॉनमी में भारत की हिस्सेदारी और अहमियत लगातार बढ़ रही है।