भारत में बदलने वाला है विदेशी निवेश समझौते का नियम, नए BIT मॉडल को जल्द मिल सकती है कैबिनेट मंजूरी
भारत नए Bilateral Investment Treaty मॉडल को लागू करने की तैयारी में है। ड्राफ्ट कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है। नए ढांचे में निवेश विवाद, टैक्स अधिकार और घरेलू कानूनी प्रक्रिया को लेकर सरकार का रुख साफ है। जानिए क्या बदलेगा और किन देशों से बातचीत जारी है।

In Short
- नए Bilateral Investment Treaty (BIT) मॉडल का ड्राफ्ट कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजा गया है।
- भारत टैक्स नीति और संप्रभु अधिकारों को नए निवेश समझौते में सुरक्षित रखना चाहता है।
- निवेश विवादों में अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन से पहले घरेलू कानूनी प्रक्रिया जरूरी होगी।
भारत सरकार नए मॉडल Bilateral Investment Treaty (BIT) फ्रेमवर्क को जल्द लागू करने की तैयारी में है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, नए BIT फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेज दिया गया है। उम्मीद है कि इसे जल्द मंजूरी मिल सकती है।
नए ढांचे में भारत अपने संप्रभु अधिकारों को बनाए रखने पर जोर दे रहा है। इसमें टैक्स नीति और घरेलू कानूनी प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों को अहम माना जा रहा है।
टैक्स नीति पर भारत का रुख साफ
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए BIT में टैक्स को शामिल नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि टैक्स से जुड़े फैसले लेने का अधिकार संसद का है और यह भारत की संप्रभु शक्ति का हिस्सा है।
सूत्रों ने कहा कि टैक्स नीति को लेकर कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और कुछ मुद्दों पर भारत की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है।
अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन से पहले घरेलू उपाय जरूरी
नए BIT फ्रेमवर्क में विवाद समाधान को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। इसके तहत किसी भी निवेशक को सीधे अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन का रास्ता नहीं मिलेगा।
पहले निवेशकों को भारत की घरेलू कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल करना होगा। यानी विवाद होने की स्थिति में पहले स्थानीय कानूनी उपायों को अपनाना जरूरी होगा, उसके बाद ही अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन का विकल्प उपलब्ध होगा।
कई देशों के साथ BIT बातचीत जारी
नए मॉडल BIT को मंजूरी मिलने से पहले ही भारत ने कुछ देशों के साथ नए ढांचे के आधार पर बातचीत शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, चार से पांच देशों के साथ बातचीत चल रही है और चार BIT को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।
सरकार ने संबंधित टीमों को इन समझौतों पर बातचीत तेज करने के निर्देश दिए हैं। इन वार्ताओं में कनाडा, रूस और ब्रिटेन के साथ बातचीत शामिल है। इसके अलावा यह फ्रेमवर्क यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाने में भी मदद कर सकता है।
2015 में आया था पिछला मॉडल BIT
भारत ने आखिरी बार साल 2015 में मॉडल BIT को अंतिम रूप दिया था। उस मॉडल में भी निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन से पहले घरेलू कानूनी उपायों को पूरा करना जरूरी था।
हालांकि, कई निवेशकों ने इसे सख्त नियमों वाला बताया था। अब सरकार नए BIT फ्रेमवर्क के जरिए देश में निवेश बढ़ाने और अलग-अलग देशों के साथ व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
नए मॉडल BIT का उद्देश्य विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके साथ भारत अपने टैक्स अधिकारों और घरेलू कानूनी व्यवस्था की सुरक्षा को भी बनाए रखना चाहता है।