देश में बढ़े करोड़पति! 5 साल में 100 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई
लोकसभा में सरकार ने देश में बढ़ते हाई इनकम वालों का आंकड़ा पेश किया है। जवाब के मुताबिक 100 करोड़ रुपये से ज्यादा ग्रॉस टोटल इनकम दिखाने वाले लोगों की संख्या पांच साल में कई गुना बढ़ी है। लेकिन सरकार अरबपतियों की कुल संपत्ति का आधिकारिक डेटा नहीं रखती।

In Short
- लोकसभा में सरकार ने बताया 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय वालों की संख्या 2021-22 के 142 से बढ़कर 2025-26 में 576 हुई
- सरकार के पास अरबपतियों की कुल संपत्ति का कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है
- सरकार ने आय असमानता कम करने के लिए टैक्स सुधार और सामाजिक योजनाओं की जानकारी दी
देश में ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लोकसभा में 27 जुलाई 2026 को वित्त मंत्रालय ने बताया कि इनकम टैक्स रिटर्न में 100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा ग्रॉस टोटल इनकम दिखाने वाले लोगों की संख्या पिछले पांच साल में करीब चार गुना बढ़ गई है। हालांकि सरकार ने साफ किया कि अरबपति की कोई आधिकारिक परिभाषा तय नहीं है।
इन आंकड़ों के मुताबिक देश में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय वाले लोगों की संख्या में बड़ा बदलाव आया है।
पांच साल में 142 से बढ़कर 576 हुई संख्या
वित्त मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि आकलन वर्ष 2021-22 में 100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा ग्रॉस टोटल इनकम रिपोर्ट करने वाले लोगों की संख्या 142 थी।
इसके बाद 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 301 हो गई। 2023-24 में यह आंकड़ा थोड़ा घटकर 284 रहा, लेकिन 2024-25 में फिर बढ़कर 415 पहुंच गया। वहीं 2025-26 में ऐसे लोगों की संख्या सबसे ज्यादा 576 दर्ज की गई।
यानी पांच साल के अंदर इस आय वर्ग में शामिल लोगों की संख्या में करीब चार गुना बढ़ोतरी हुई है।
सरकार नहीं रखती कुल संपत्ति का रिकॉर्ड
लोकसभा में सरकार से पूछा गया था कि क्या वह देश के अरबपतियों की कुल संपत्ति और उसमें हुई बढ़ोतरी का कोई आधिकारिक डेटा रखती है।इस पर वित्त मंत्रालय ने बताया कि वेल्थ टैक्स एक्ट 1957 को 1 अप्रैल 2016 से खत्म कर दिया गया था। इसके बाद सरकार टैक्सपेयर्स की कुल संपत्ति का कोई एग्रीगेट डेटा नहीं रखती है।
इसका मतलब है कि सरकार के पास लोगों की घोषित आय का आंकड़ा है, लेकिन कुल संपत्ति की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आय असमानता पर सरकार ने रखी अपनी बात
लोकसभा में बढ़ती संपत्ति और आय के अंतर को लेकर भी सवाल पूछा गया था। सरकार ने बताया कि हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे 2023-24 के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गिनी कोएफिशिएंट कम हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्र में यह आंकड़ा 2022-23 के 0.266 से घटकर 2023-24 में 0.237 हो गया। वहीं शहरी क्षेत्र में यह 0.314 से घटकर 0.284 रहा। सरकार के अनुसार इससे ग्रामीण और शहरी अंतर कम होने का संकेत मिलता है।
रोजगार और गरीबी में सुधार का सरकार ने दिया आंकड़ा
सरकार ने बताया कि देश में रोजगार की स्थिति में भी सुधार हुआ है। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार 15 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों में बेरोजगारी दर 2022 में 3.6 प्रतिशत थी, जो 2025 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई।
वहीं नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 से 2019-21 के बीच मल्टीडायमेंशनल गरीबी 24.85 प्रतिशत से घटकर 14.96 प्रतिशत हो गई। इस दौरान करीब 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए।
इसके अलावा नीति आयोग के एक अन्य अध्ययन के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच मल्टीडायमेंशनल गरीबी 29.17 प्रतिशत से घटकर 11.28 प्रतिशत रह गई और करीब 24.82 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए।
सरकार ने गिनाए असमानता कम करने के कदम
वित्त मंत्रालय ने बताया कि आय और संपत्ति में अंतर कम करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इसमें प्रोग्रेसिव इनकम टैक्स सिस्टम शामिल है, जिसमें ज्यादा आय वालों पर ज्यादा टैक्स और सरचार्ज लगाया जाता है।
इसके अलावा रोजगार बढ़ाने के लिए योग्य कंपनियों को नए कर्मचारियों की भर्ती पर टैक्स डिडक्शन की सुविधा दी गई है। स्टार्टअप, कोऑपरेटिव सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी टैक्स इंसेंटिव दिए जा रहे हैं।
आम लोगों के लिए योजनाओं पर सरकार का जोर
सरकार ने बताया कि आर्थिक विकास को सभी तक पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, मुद्रा योजना, जनधन योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का मकसद रोजगार बढ़ाना, जरूरी सुविधाएं पहुंचाना और समावेशी विकास को आगे बढ़ाना है।