विकास की रफ्तार देने की बड़ी तैयारी, भारत ने World Bank और Asian Development Bank से $2.5 अरब की मांग

भारत ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को तेज और बेहतर करने के लिए World Bank और ADB से करीब $2.5 अरब की फंडिंग मांगी है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक हालात और अनिश्चितता बनी हुई है। लेकिन क्या यह फंडिंग भारत के विकास को नई रफ्तार दे पाएगी? पढ़ें पूरी खबर।

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Indian Infrastructure
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In Short

  • विकास की रफ्तार देने की बड़ी तैयारी
  • इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग पर भारत की रणनीति
  • विकास परियोजनाओं के लिए भारत का बड़ा दांव, $2.5 अरब की फंडिंग मांग
  • ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के मुताबिक भारत का बड़ा कदम: World Bank और ADB से $2.5 अरब की फंडिंग मांग

By Franklin Nigam:

भारत ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर के मजबूत और तेज करने के लिए एक बड़ा वित्तीय कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के अनुसार  सरकार ने World Bank और Asian Development Bank से करीब $2.5 अरब की फंडिंग मांगी है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितता, तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव से जूझ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत इस फंडिंग का इस्तेमाल अपने बुनियादी ढांचे के बड़े प्रोजेक्ट्स को मजबूत और गति देने के लिए करना चाहता है। इसमें सड़क, परिवहन नेटवर्क, शहरी विकास और लॉजिस्टिक्स से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शामिल हैं। भारत सरकार का उद्देश्य है कि विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाए और आर्थिक गतिविधियों को और मजबूत बनाया जाए।

इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग पर भारत की रणनीति
ब्लूमबर्ग रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत मल्टी-लेटरल संस्थानों से रियायती दरों पर फंड जुटाने पर जोर दे रहा है। World Bank और ADB जैसी संस्थाओं से मिलने वाली फंडिंग लंबे समय की होती है और इसका बोझ तत्काल घरेलू वित्तीय व्यवस्था पर नहीं पड़ता। इसी वजह से भारत इस मॉडल को प्राथमिकता दे रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि यह कदम सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक ग्रोथ का मुख्य इंजन बनाया जा रहा है। बड़े पैमाने पर सड़क, रेलवे और शहरी ढांचे में निवेश को बढ़ाकर सप्लाई चेन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की कोशिश है।

वैश्विक परिस्थितियों का असर

ब्लूमबर्ग के अनुसार यह फंडिंग अनुरोध ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय तनावों ने कई देशों की आर्थिक योजना पर दबाव डाला है। भारत भी इन परिस्थितियों के बीच अपने विकास मॉडल को स्थिर और तेज बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

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