गांवों की कमाई क्यों पड़ रही धीमी? नाबार्ड सर्वे ने बढ़ाई देशभर की चिंता

गांवों में कमाई और खर्च को लेकर चिंता बढ़ती दिख रही है। नाबार्ड के ताजा सर्वे में आय, मानसून और खेती से जुड़े कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जो आने वाले महीनों में ग्रामीण परिवारों की जेब और खरीदारी पर असर डाल सकते हैं।

Advertisement
AI Generated Image

In Short

  • जुलाई 2026 में केवल 27.7% ग्रामीण परिवारों ने बताया कि बीते एक साल में उनकी आय बढ़ी है, जो सर्वे का सबसे निचला स्तर है।
  • जुलाई के पहले हफ्ते तक खरीफ फसलों की बुआई करीब 351 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल से लगभग 21% कम है।
  • कमजोर बारिश और जलाशयों में 36.48% कम पानी के कारण खेती, किसानों की कमाई और गांवों की खरीदारी पर दबाव बढ़ने का खतरा है।

By Gaurav Kumar:

देश के गांवों में रोजमर्रा की जिंदगी खेती, मौसम और लोगों की कमाई पर काफी हद तक टिकी होती है। बारिश कमजोर हो, फसल की बुआई कम हो या खेती का खर्च बढ़ जाए, तो इसका असर सीधे परिवारों की जेब और बाजार में होने वाली खरीदारी पर दिखने लगता है।

नाबार्ड के ताजा सर्वे में भी गांवों की कमाई और खर्च को लेकर कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जो चिंता बढ़ाते हैं। लेकिन पिछले एक साल में आखिर कितने ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी?

सिर्फ 27.7% परिवारों की आय बढ़ी

नाबार्ड के रूरल इकोनॉमिक कंडीशंस एंड सेंटिमेंट्स सर्वे यानी RECSS के 12वें राउंड के मुताबिक, जुलाई 2026 में केवल 27.7% ग्रामीण परिवारों ने बताया कि बीते एक साल में उनकी कमाई बढ़ी है।

सर्वे शुरू होने के बाद यह अब तक का सबसे कम आंकड़ा है। नवंबर 2025 के बाद से कमाई बढ़ने की बात कहने वाले परिवार लगातार घटे हैं। नवंबर 2025 में यह आंकड़ा 39.6% था, जो जनवरी 2026 में 37.5%, मार्च में 32% और मई में 29.6% रह गया। लेकिन कमाई में आई इस कमी का असर गांवों के रोजमर्रा के खर्च पर कितना पड़ा?

गांवों में खर्च की रफ्तार भी हुई धीमी

कमाई कमजोर होने का असर गांवों में रहने वाले परिवारों के खर्च पर भी दिखाई दिया। सर्वे में 74.1% परिवारों ने बताया कि उनका रोजमर्रा का खर्च बढ़ा है।

सर्वे शुरू होने के बाद यह केवल दूसरी बार है, जब खर्च बढ़ने की बात कहने वाले परिवारों का आंकड़ा 75% से नीचे रहा है। इसके बावजूद ग्रामीण परिवार अपनी महीने की कमाई का करीब दो-तिहाई हिस्सा खाने-पीने और दूसरी जरूरी चीजों पर खर्च कर रहे हैं।

लेकिन जून में कम बारिश ने गांवों और खेती की परेशानी को कितना बढ़ाया?

जून में बारिश की कमी से बढ़ी परेशानी

जून में देशभर में सामान्य से 33% कम बारिश हुई थी। हालांकि जुलाई में साउथवेस्ट मानसून ने फिर से रफ्तार पकड़ी। 12 जुलाई तक कुल बारिश 219.4 मिलीमीटर पहुंच गई, जिससे पूरे देश में बारिश की कमी घटकर 17.8% रह गई।

इसके बाद भी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी इलाकों में सामान्य से 37% कम बारिश हुई। इससे इन इलाकों में खरीफ फसलों की बुआई और खेती से मिलने वाली पैदावार पर असर पड़ सकता है। लेकिन कम बारिश के बीच देश के जलाशयों में पिछले साल के मुकाबले कितना पानी बचा है?

जलाशयों में भी पिछले साल से कम पानी

देश के रिजर्वॉयर यानी जलाशयों में पानी पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 36.48% कम रहा। इसकी बड़ी वजह दक्षिण भारत के जलाशयों में पानी का स्तर काफी नीचे रहना है।

जलाशयों में कम पानी होने से उन किसानों की परेशानी बढ़ सकती है, जो खेतों की सिंचाई के लिए इन पर निर्भर हैं। बारिश ठीक नहीं हुई, तो खेती और किसानों की कमाई पर असर पड़ सकता है। लेकिन पानी की इस कमी के बीच खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल से कितनी पीछे रह गई?

खरीफ फसलों की बुआई 21% पीछे

जुलाई के पहले हफ्ते तक करीब 351 लाख हेक्टेयर जमीन पर खरीफ फसलों की बुआई हुई थी। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 21% कम है।मानसून में सुधार होने से आने वाले हफ्तों में बुआई की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।

हालांकि कुछ इलाकों में कम बारिश और मजबूत अल नीनो की आशंका से खेती की पैदावार, किसानों की कमाई और गांवों में होने वाली खरीदारी पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में क्या कम बुआई का असर आने वाले महीनों में गांवों की कमाई और बाजार की खरीदारी पर और ज्यादा दिखाई देगा?

Read more!
Advertisement