बिजली मांग का नया रिकॉर्ड! 270 GW पर पहुंची खपत; क्या AC और हीटवेव बिगाड़ देंगे देश का पूरा पावर सिस्टम?
एक नई रिपोर्ट Heatwave to Gridwave: India’s 270-GW Moment and the Urban Heat Crisis Behind It में चेतावनी दी गई है कि आने वाले सालों में शहरों में बढ़ती गर्मी और कूलिंग की बढ़ती जरूरत देश की सबसे बड़ी एनर्जी चुनौतियों में शामिल हो सकती है।

भारत में बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम की परेशानी नहीं रही, बल्कि यह देश की बिजली सिस्टम के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। हीटवेव, शहरीकरण और AC-कूलर पर बढ़ती निर्भरता अब भारत की बिजली मांग का पूरा पैटर्न बदल रहे हैं।
एक नई रिपोर्ट Heatwave to Gridwave: India’s 270-GW Moment and the Urban Heat Crisis Behind It में चेतावनी दी गई है कि आने वाले सालों में शहरों में बढ़ती गर्मी और कूलिंग की बढ़ती जरूरत देश की सबसे बड़ी एनर्जी चुनौतियों में शामिल हो सकती है।
इस समय भारत में मौजूदा बिजली खपत रिकाॅर्ड 270 GW तक पहुंच चुकी है। यह पहली बार है जब देश की बिजली खपत इतनी ऊंचाई पर पहुंची और इसकी सबसे बड़ी वजह लगातार पड़ रही भीषण गर्मी मानी जा रही है।
शहर बन रहे हैं ‘हीट ट्रैप’
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक तेजी से बढ़ता शहरीकरण इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। पहले जहां जमीन पर पेड़-पौधे और खुली जगहें होती थीं, वहां अब कंक्रीट की इमारतें, सड़कें और घनी आबादी वाले इलाके बन चुके हैं।
इसी वजह से Urban Heat Island Effect पैदा हो रहा है। आसान भाषा में समझें तो शहर आसपास के इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म हो रहे हैं और लंबे समय तक गर्म बने रहते हैं। रिपोर्ट कहती है कि भारत के कई शहरों में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट की वजह से तापमान आसपास के इलाकों से 2°C से लेकर 10°C तक ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है।
अब रात में भी नहीं मिल रही राहत
पहले गर्मी दिन में ज्यादा परेशान करती थी और रात में तापमान थोड़ा कम हो जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। शहरों में रात के समय भी गर्मी कम नहीं हो रही। इमारतें दिनभर की गर्मी को अपने अंदर जमा कर लेती हैं और धीरे-धीरे छोड़ती हैं।
यही वजह है कि लोग देर रात तक पंखे, कूलर और AC चलाने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर बिजली की मांग पर पड़ रहा है, क्योंकि अब रात में भी बिजली की खपत कम नहीं हो रही।
AC बना बिजली खपत का सबसे बड़ा कारण
रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि कई राज्यों में घरों की कूलिंग डिमांड इंडस्ट्री की बिजली मांग से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। यानी पहले जहां फैक्ट्रियां बिजली खपत की सबसे बड़ी वजह होती थीं, अब घरों में चलने वाले AC और कूलिंग इक्विपमेंट बिजली की मांग को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य, जिन्हें पारंपरिक रूप से बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं माना जाता, अब बिजली मांग के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। इसकी बड़ी वजह लगातार बढ़ती कूलिंग जरूरतें हैं।
रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक भारत के करीब 40% घरों में एयर कंडीशनर इस्तेमाल होने लगेंगे। इसका मतलब आने वाले समय में बिजली की मांग और तेज़ी से बढ़ सकती है।
AC खुद भी बढ़ा रहे हैं गर्मी
रिपोर्ट में एक दिलचस्प लेकिन चिंताजनक बात भी कही गई है। रिसर्चर्स के मुताबिक, एयर कंडीशनर सिर्फ कमरे को ठंडा करते हैं, लेकिन बाहर गर्म हवा छोड़ते हैं। इससे शहरों का तापमान और बढ़ता है। यानी जितना ज्यादा AC इस्तेमाल होगा, बाहर की गर्मी उतनी बढ़ेगी और फिर लोगों को और ज्यादा AC चलाने पड़ेंगे। यह एक तरह का Heat Loop बनता जा रहा है।
ह्यूमिडिटी ने बढ़ाई परेशानी
सिर्फ तापमान ही नहीं, बढ़ती ह्यूमिडिटी भी लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015-2019 के दौरान जहां 14,086 गर्म और ह्यूमिड दिन दर्ज किए गए थे, वहीं 2020-2024 में यह संख्या बढ़कर 16,970 हो गई। ऐसे में अब लोगों को सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि उमस वाली गर्मी का भी सामना करना पड़ रहा है, जो शरीर पर ज्यादा असर डालती है।
क्या है समाधान?
रिपोर्ट का कहना है कि अब सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं होगा। भारत को अपने शहरों की प्लानिंग भी बदलनी होगी। इसके लिए Cool Roofs, Rooftop Solar, Green Infrastructure, Energy Storage और Smart Grids जैसे उपाय अपनाने होंगे।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत को अब Heat Management और Energy Management को साथ में लेकर काम करने की जरूरत है।