भारत में बिजली की कमी ने बढ़ाई चिंता! सितंबर में करीब 10 साल का सबसे बड़ा संकट
सितंबर में देश में बिजली की कमी काफी बढ़ गई। कम बारिश, ज्यादा गर्मी और हाइड्रोपावर से कम बिजली बनने के कारण हालात बिगड़े। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कई पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक भी कम हो गया। जानिए सितंबर में बिजली की कमी कितनी रही और इसके पीछे क्या बड़ी वजहें रहीं।

In Short
- सितंबर में भारत का बिजली घाटा 2017 के बाद इस महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा।
- कमजोर मानसून के बीच हाइड्रोपावर उत्पादन सालाना आधार पर करीब 16% घटा।
- ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में अधिकतम दैनिक बिजली की कमी 7.7 गीगावॉट तक पहुंची।
भारत में सितंबर के दौरान बिजली की मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। कमजोर मानसूनी बारिश, गर्म मौसम और हाइड्रोपावर उत्पादन में गिरावट ने देश के पावर ग्रिड पर दबाव बढ़ाया। हालात ऐसे रहे कि सितंबर में बिजली की कमी करीब एक दशक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, Grid Controller of India के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि महीने के आधे से ज्यादा दिनों में शाम के समय पीक बिजली की कमी 2 गीगावॉट से अधिक रही। कुछ मौकों पर यह 6 गीगावॉट को भी पार कर गई। सितंबर में कुल बिजली की कमी 2017 के बाद इस महीने के लिए सबसे ज्यादा रही।
कमजोर मानसून से बढ़ी परेशानी
इस बार सामान्य से कम बारिश के कारण देश के कई हिस्सों में गर्मी बनी रही। इससे एयर कंडीशनिंग के लिए बिजली की मांग बढ़ी। दूसरी तरफ हाइड्रोपावर उत्पादन कमजोर पड़ा और कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को भी सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
आमतौर पर जून से सितंबर के मानसून सीजन में औद्योगिक गतिविधियां और बिजली की खपत कम होती है। इससे बिजली उत्पादकों को राहत मिलती है और कंपनियों को कोयले का स्टॉक बढ़ाने का मौका मिलता है।
लेकिन इस साल मजबूत El Niño के कारण इस अवधि में बारिश करीब 13% कम रही। यह 2015 के बाद सबसे कमजोर मानसून रहा। मार्च से ही बिजली की मांग ऊंची बनी हुई है।
हाइड्रोपावर उत्पादन में 16% की गिरावट
सितंबर में हाइड्रोपावर उत्पादन एक साल पहले के मुकाबले करीब 16% घट गया। यह लगातार पांचवां महीना रहा जब मासिक हाइड्रोपावर उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई।
देश में बारिश का वितरण भी एक जैसा नहीं रहा। पूर्वी भारत के कुछ कोयला खनन क्षेत्रों में बाढ़ के कारण कोयले के उत्पादन और उसकी ढुलाई पर असर पड़ा। इससे बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक घटकर करीब तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया।
कई पावर प्लांट के पास कम कोयला
पावर मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना कोयला भंडार एक साल पहले के मुकाबले आधे से भी कम रह गया है और 12 जुलाई से इसमें लगातार गिरावट आई है। सर्वे में शामिल 191 बिजली संयंत्रों में करीब 40% के पास जरूरत के मुकाबले एक चौथाई से भी कम स्टॉक था। औसतन संयंत्रों के पास करीब एक सप्ताह का कोयला बचा था।
Tata Power के CEO प्रवीर सिन्हा ने कहा कि सिस्टम पर दबाव है। उनके मुताबिक अक्टूबर की शुरुआत तक स्थिति सुधर सकती है, लेकिन फिलहाल हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं।
सितंबर में 7.7 GW तक पहुंची बिजली की कमी
भारत ने पिछले एक दशक में करीब 250 गीगावॉट की ज्यादातर सोलर बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी है। इससे दिन के समय बिजली सप्लाई में मदद मिली है, लेकिन सूरज ढलने के बाद मांग बढ़ने पर हाइड्रो और फॉसिल फ्यूल आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
सितंबर में एक दिन की अधिकतम बिजली कमी 7.7 गीगावॉट तक पहुंच गई, जो इस साल गर्मी के मौसम में दर्ज बिजली घाटे से भी ज्यादा रही।