देश के एयरपोर्ट सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, नई नीलामी में बिडर्स पर लग सकती है कैप
सरकार आगामी एयरपोर्ट नीलामी में एक ही ऑपरेटर को मिलने वाले एयरपोर्ट बंडल की संख्या सीमित कर सकती है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक इसका मकसद बाजार में ज्यादा एकाग्रता और जरूरत से ज्यादा कर्ज के जोखिम को कम करना है।

In Short
- 11 एयरपोर्ट की नीलामी दो या तीन एयरपोर्ट के बंडल में करने की तैयारी
- एक बिडर को मिलने वाले बंडल की संख्या पर लग सकती है सीमा
- Adani और GMR मिलकर देश के आधे से ज्यादा हवाई यात्रियों को संभालते हैं
भारत के सिविल एविएशन सेक्टर में कुछ बड़े ऑपरेटर्स की मजबूत मौजूदगी को देखते हुए सरकार एयरपोर्ट संचालन पर सीमा लगाने की तैयारी कर रही है। बिजनेस टुडे ने बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय चाहता है कि आगामी 11 एयरपोर्ट की नीलामी में एक ही ऑपरेटर को मिलने वाले एयरपोर्ट या बंडल की संख्या सीमित की जाए।
इसका मकसद बाजार में ज्यादा एकाग्रता और ऑपरेटर्स पर जरूरत से ज्यादा कर्ज का जोखिम कम करना है।
11 एयरपोर्ट की नीलामी बंडल में
आगामी नीलामी में 11 एयरपोर्ट को दो या तीन एयरपोर्ट के बंडल के रूप में पेश किया जाएगा। नई व्यवस्था में ज्यादा कमाई वाले बड़े एयरपोर्ट को छोटे और घाटे वाले एयरपोर्ट के साथ जोड़ा जाएगा।
इस मॉडल के तहत निजी ऑपरेटर बड़े और ज्यादा ट्रैफिक वाले एयरपोर्ट से होने वाली कमाई का इस्तेमाल छोटे एयरपोर्ट के संचालन और पूंजीगत खर्च को संभालने में कर सकेंगे।
पांच बंडल को मिली शुरुआती मंजूरी
4 अगस्त को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी की 149वीं बैठक में पांच एयरपोर्ट बंडल के निजीकरण को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
इन बंडल में अमृतसर-कांगड़ा, वाराणसी-गया-कुशीनगर, भुवनेश्वर-हुबली, रायपुर-औरंगाबाद और तिरुचिरापल्ली-तिरुपति शामिल हैं। हर बंडल एक ही कंसेशनेयर को दिया जाएगा।
बिडिंग में एक स्टेज की शॉर्टलिस्टिंग होगी और घरेलू यात्री ट्रैफिक के लिए प्रति यात्री फीस को बिडिंग पैरामीटर बनाया जाएगा।
एक बिडर को कितने बंडल मिलेंगे अभी तय नहीं
बैठक में वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एविएशन सेक्टर में बाजार के सीमित खिलाड़ियों के हाथों में केंद्रित होने को लेकर सवाल उठाया। इसके जवाब में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि एक बिडर को मिलने वाले एयरपोर्ट बंडल की संख्या पर सीमा लगाई जाएगी।
हालांकि यह सीमा कितनी होगी, इसकी प्रक्रिया अभी तय की जा रही है।
Adani और GMR की बड़ी हिस्सेदारी
2019 में केंद्र ने लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, मंगलुरु, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी एयरपोर्ट का निजीकरण किया था। Adani Group ने सभी छह एयरपोर्ट के संचालन अधिकार 50 साल के लिए जीते थे।
फिलहाल Airports Authority of India 129 एयरपोर्ट चलाता है। Adani Airport Holdings आठ एयरपोर्ट ऑपरेट करता है, जिनकी यात्री ट्रैफिक में करीब 24 से 25 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं GMR Airports की हिस्सेदारी करीब 27.5 फीसदी है। दोनों मिलकर देश के आधे से ज्यादा हवाई यात्रियों को संभालते हैं।