चीन के मेगा डैम के जवाब में भारत बना रहा 11,200 MW का प्रोजेक्ट! अरुणाचल में क्यों भड़का लोगों का गुस्सा?
चीन के विशाल डैम प्रोजेक्ट के बीच भारत की एक महत्वाकांक्षी योजना अरुणाचल प्रदेश में विवादों में घिर गई है। 11,200 मेगावाट के इस प्रोजेक्ट को देश की जल सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है। लेकिन स्थानीय लोग इसका विरोध क्यों कर रहे हैं और मामला हिंसा तक कैसे पहुंच गया? जानिए पूरा विवाद।

In Short
- चीन के मेगा डैम के बीच भारत की तैयारी, अरुणाचल में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट का सियांग प्रोजेक्ट।
- जमीन डूबने और गांव उजड़ने का डर, स्थानीय आदिवासी समुदाय कर रहे प्रोजेक्ट का विरोध।
- पासीघाट में विरोध प्रदर्शन के बाद हिंसा, करीब 40 सुरक्षाकर्मी घायल, मुख्यमंत्री ने की अहम बैठकें।
अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर विरोध तेज हो गया है। चीन के विशाल डैम प्रोजेक्ट के बीच भारत के लिए इसे रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। हालांकि, स्थानीय आदिवासी समुदाय अपनी जमीन, घर और आजीविका को लेकर चिंतित हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान पासीघाट में हिंसा भी हुई है।
क्या है सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट?
सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी पर प्रस्तावित एक विशाल जलविद्युत और जल भंडारण परियोजना है। इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 11,200 मेगावाट होगी। यह भारत की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल है।
इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ बिजली बनाना नहीं, बल्कि नदी के पानी को स्टोर करना और उसके बहाव को नियंत्रित करना भी है। इससे बाढ़ के खतरे को कम करने और देश की जल सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
सरकारी कंपनी NHPC को इसकी प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है। कंपनी ने उगेंग, डाइट डाइम और पारोंग जैसी तीन संभावित जगहों का अध्ययन किया है। हालांकि, प्रोजेक्ट को अभी निर्माण की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
चीन के मेगा डैम से क्या है कनेक्शन?
सियांग नदी तिब्बत से निकलती है, जहां इसे यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है। अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करने के बाद यह सियांग कहलाती है और आगे ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली का हिस्सा बनती है।
चीन इसी नदी पर एक विशाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बना रहा है। भारत को चिंता है कि इससे नदी के पानी के बहाव और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति पर असर पड़ सकता है।
सियांग प्रोजेक्ट के समर्थकों का मानना है कि भारत में बड़ा जल भंडार बनने से अचानक पानी छोड़े जाने जैसी परिस्थितियों से निपटने में मदद मिल सकती है। हालांकि, चीन का दावा है कि उसके प्रोजेक्ट से निचले इलाकों को नुकसान नहीं होगा।
स्थानीय लोग क्यों कर रहे विरोध?
सियांग नदी के किनारे रहने वाले आदि आदिवासी समुदाय के कुछ वर्गों को डर है कि बांध बनने से उनके गांव, खेती की जमीन और जंगल पानी में डूब सकते हैं।
लोगों को अपनी पुश्तैनी जमीन, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान खोने की चिंता है। भूकंप के लिहाज से संवेदनशील हिमालयी इलाके में इतने बड़े बांध की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
पासीघाट में कैसे भड़की हिंसा?
23 अक्टूबर को विरोध कर रहे संगठनों ने तीन जिलों में 12 घंटे का बंद बुलाया था। बंद खत्म होने के बाद पासीघाट में हिंसा भड़क गई।
भीड़ पर NHPC कार्यालय, पुलिस स्टेशन और पुलिस वाहनों में आग लगाने के आरोप लगे। इस दौरान करीब 40 सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने रविवार को विधायकों और आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के साथ स्थानीय लोगों के अधिकारों और उनकी चिंताओं का सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने के फैसले में जनता की सहमति को अहम बताया।