सिर्फ असेंबली नहीं भारत को पूरी मैन्युफैक्चरिंग पर करना होगा फोकस: N Chandrasekaran
Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran ने भारत की मजबूत आर्थिक ग्रोथ के बीच मैन्युफैक्चरिंग को लेकर अहम बात कही है। उनका मानना है कि देश को अब सिर्फ असेंबली आधारित मॉडल तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारत को प्रोडक्ट से लेकर टेक्नोलॉजी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी तक अपनी पूरी क्षमता विकसित करनी होगी।

In Short
- भारत को असेंबली से आगे बढ़कर पूरी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बनानी होगी।
- एनर्जी सिक्योरिटी और मैन्युफैक्चरिंग जॉब्स पर फोकस जरूरी।
- - 2047 के लक्ष्य के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल्स अहम।
भारत को लंबे समय तक तेज आर्थिक ग्रोथ बनाए रखने के लिए सिर्फ असेंबली पर आधारित मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़ना होगा। Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran ने कहा कि देश को प्रोडक्ट, इक्विपमेंट, टेक्नोलॉजी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी यानी IP तक पूरी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भारत में ही तैयार करनी होगी।
Indian Foundation for Quality Management के एक कार्यक्रम में Chandrasekaran ने कहा कि मुश्किल और अनिश्चित वैश्विक माहौल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और ग्रोथ लगातार उम्मीद से बेहतर रही है।
उनके मुताबिक मजबूत घरेलू मांग, सर्विस एक्सपोर्ट और अनुकूल घरेलू नीतियां ग्रोथ को आगे बढ़ा रहे हैं।
अर्थव्यवस्था को लेकर क्या बोले Chandrasekaran?
Chandrasekaran ने कहा कि ऑटो बिक्री, क्रेडिट ग्रोथ, बिजली की मांग और सीमेंट की मांग में डबल-डिजिट ग्रोथ देखने को मिल रही है।
उन्होंने बताया कि भारत का करेंट अकाउंट डेफिसिट लगातार GDP के 1% से नीचे बना हुआ है। सर्विस एक्सपोर्ट करीब 418 अरब डॉलर है, जो GDP के लगभग 11% के बराबर है। वहीं विदेशी मुद्रा भंडार करीब 785 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर है और बैंकों का NPA भी कम है।
हालांकि लंबे समय तक ग्रोथ बनाए रखने के लिए उन्होंने एनर्जी सिक्योरिटी, मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार और ह्यूमन कैपिटल को अहम बताया।
मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार बढ़ाने की जरूरत
Chandrasekaran ने कहा कि ग्रोथ के लिए एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा। इसके साथ ही देश में एडवांस और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े रोजगार तैयार करने होंगे।
उन्होंने कम उत्पादकता वाली खेती से लोगों को ज्यादा उत्पादक मैन्युफैक्चरिंग और आधुनिक सर्विस सेक्टर की तरफ लाने पर भी जोर दिया। इसके लिए शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और टेक्निकल स्किल्स में निवेश जरूरी होगा।
असेंबली से आगे कैसे बढ़ेगा भारत?
Chandrasekaran के मुताबिक असेंबली आधारित ग्रोथ जरूरी है और इससे मजबूत SME सेक्टर तैयार करने में मदद मिलेगी। लेकिन इसके बाद भारत को पूरी तरह घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करनी होगी।
इसके लिए R&D में निवेश और अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी तैयार करनी होगी। भारत को केवल प्रोडक्ट ही नहीं बल्कि उन्हें बनाने के लिए जरूरी मशीनों और इक्विपमेंट को भी विकसित करना होगा। साथ ही वोकेशनल और टेक्निकल ट्रेनिंग के जरिए सही स्किल तैयार करने की जरूरत है।
क्वालिटी से बढ़ेगी भारत की ताकत
Chandrasekaran ने Toyota का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी ने क्वालिटी को सिर्फ बेहतर प्रोडक्ट बनाने तक सीमित नहीं रखा बल्कि इसे इनोवेशन, प्रोडक्टिविटी और कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने का जरिया बनाया।
उन्होंने Germany का भी उदाहरण दिया, जहां क्वालिटी, इंजीनियरिंग, स्टैंडर्ड और प्रिसिजन पर फोकस ने मजबूत सप्लायर और SME इकोसिस्टम तैयार करने में मदद की।
उनके मुताबिक भारत को भी क्वालिटी के जरिए इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी बढ़ाकर ग्लोबल स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रोडक्ट बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा ग्रोथ का बड़ा आधार
Chandrasekaran ने भारत के 2047 के लक्ष्य के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को अहम बताया। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर, इंस्टीट्यूशंस और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को देश के लंबे समय के विकास के तीन महत्वपूर्ण आधार बताया।
उन्होंने PM Gati Shakti, रेलवे मॉडर्नाइजेशन, डेडिकेटेड कॉरिडोर, अर्बन मोबिलिटी और मेट्रो विस्तार जैसी पहलों का जिक्र किया।
Chandrasekaran ने ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे सेक्टरों में घरेलू क्षमता बढ़ाने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि Tata Group इनमें से कई क्षेत्रों में निवेश कर रहा है।
उनके मुताबिक भारत के 2047 के विजन को हासिल करने के लिए ग्रोथ को समावेशी और टिकाऊ बनाना होगा। इसके साथ विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत औद्योगिक क्षमता और ह्यूमन कैपिटल में निवेश जरूरी होगा।