BRICS अब सिर्फ बातचीत का मंच नहीं...ट्रेड, निवेश और टेक्नोलॉजी में भारत के लिए बड़ा मौका: अनंत गोयनका

BRICS अब सिर्फ जियोपॉलिटिकल बातचीत का मंच नहीं रहा, बल्कि ट्रेड, निवेश और टेक्नोलॉजी में नए अवसरों का केंद्र बन रहा है। FICCI अध्यक्ष अनंत गोयनका ने भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, मैन्युफैक्चरिंग की संभावनाओं और ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलते समीकरणों पर अपनी राय साझा की।

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By Gaurav Kumar:

BRICS अब सिर्फ जियो पॉलिटिकल बातचीत तक सीमित नहीं रह गया है। यह आर्थिक और जियो-इकोनॉमिक मुद्दों के लिए भी अहम मंच बन चुका है।

India Today Global BRICS Roundtable में बिजनेस टुडे के ग्रुप एडिटर सिद्धार्थ जराबी के सवालों का जवाब देते हुए फिक्की अध्यक्ष, और आरपीजी ग्रुप के उपाध्यक्ष, अनंत गोयनका ने कहा कि इस साल के BRICS सम्मेलन की थीम Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability यानी मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता है। मौजूदा समय में ये चारों मुद्दे बेहद प्रासंगिक हैं।

अनंत गोयनका के मुताबिक, दुनिया में चल रहे युद्ध, कच्चे माल की कीमतों में अनिश्चितता और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों के बीच देशों को मिलकर समस्याओं का समाधान करना होगा। आज किसी एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स के कई स्रोत होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज का असर दुनिया के दक्षिणी और मध्य हिस्सों के कई देशों पर ज्यादा पड़ रहा है। ऐसे में रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर, ऊर्जा और डीकार्बोनाइजेशन जैसे क्षेत्रों में एक-दूसरे से बेस्ट प्रैक्टिस साझा की जा सकती हैं।

अनंत गोयनका के मुताबिक, BRICS के तहत इनोवेशन, स्टैंडर्ड्स और ट्रेड जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावना है, लेकिन सबसे बड़े दो क्षेत्र ट्रेड और क्रॉस-इन्वेस्टमेंट तथा टेक्नोलॉजी हैं। आखिर में इसका फायदा नए बिजनेस अवसर, निवेश और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के रूप में मिल सकता है।

WTO के पुराने ट्रेड सिस्टम में आ रहा बदलाव

उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है। खासकर अंतरराष्ट्रीय कारोबार जिस ट्रेड फ्रेमवर्क के तहत लंबे समय से होता आया है, उसमें बदलाव दिखाई दे रहा है। यह बदलाव अच्छा है या खराब, यह अलग बहस है, लेकिन इतना साफ है कि सिस्टम बदल रहा है।

COVID के बाद देश की बड़ी से लेकर छोटी कंपनियों तक ने सप्लाई चेन की समस्याओं का सामना किया। वेस्ट एशिया संकट ने भी दिखाया कि दुनिया की घटनाओं का असर छोटे कारोबार तक पर पड़ता है।

अनंत गोयनका ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समस्या आती है तो इसका असर एक छोटे सड़क किनारे पराठा बनाने वाले तक पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अब आम लोगों की बातचीत में भी होर्मुज और उसके असर की चर्चा होने लगी है। इससे पता चलता है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था कितनी आपस में जुड़ी हुई है।

भारत के सामने अगली इंडस्ट्रियल क्रांति का मौका

अनंत गोयनका ने भारत में अगली इंडस्ट्रियल क्रांति की संभावना को लेकर कहा कि पिछले दो दशकों में देश ने सर्विसेज रिवोल्यूशन देखा है। अब भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के आगे बढ़ने का समय है।

उनके मुताबिक, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी क्षमताओं में काफी सुधार किया है। साथ ही दुनिया आज सप्लाई चेन को अलग-अलग देशों में बांटना चाहती है। ऐसे में भारत के पास एक बड़ा मौका है। उन्होंने कहा कि यह अवसर भारत से निकल नहीं गया है, बल्कि अभी इसे हासिल करना बाकी है।

भारत के मैक्रो हालात मजबूत

अनंत गोयनका ने भारत की मौजूदा आर्थिक स्थिति को मजबूत बताते हुए कहा कि देश के मैक्रो हालात संभवतः दुनिया में सबसे अच्छे हैं। उनके मुताबिक, आमतौर पर भारत की GDP ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि जोखिमों पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता।

उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया में काफी उथल-पुथल चल रही है, तब भारत एक तरह से ओएसिस की तरह नजर आ रहा है। देश का कर्ज स्तर नीचे आया है, कॉरपोरेट बैलेंस शीट मजबूत स्थिति में हैं और बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स ऑल-टाइम लो पर हैं।

इसके अलावा राजनीतिक स्थिरता मजबूत रही है और लगातार रिफॉर्म्स पर काम हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने और रिन्यूएबल पावर पर भी फोकस बढ़ा है।

तेजी से बदलते माहौल में कंपनियों को भी बदलना होगा

फिक्की अध्यक्ष, गोयनका ने कहा कि मौजूदा समय में अनिश्चितता इतनी बढ़ गई है कि कंपनियों को तेजी से फैसले लेने की क्षमता विकसित करनी होगी।

उन्होंने अपनी कंपनी का उदाहरण देते हुए बताया कि फरवरी में बनाए गए बजट में क्रूड की कीमत करीब 65 डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन थोड़े समय में यह 95 डॉलर तक पहुंच गया। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय बास्केट आज 109 डॉलर है।

ऐसे माहौल में RPG Group ने Rapid Response Teams बनाई हैं। इन छोटी और ज्यादा अधिकार वाली टीमों में सबसे वरिष्ठ स्तर पर CHRO, CEO और CFO शामिल हो सकते हैं। ये टीमें हर तीन दिन में बैठक करती हैं और तेजी से जरूरी फैसले लेती हैं।

गोयनका के मुताबिक, पहले कंपनियां महीने में एक बार एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक करके प्रदर्शन की समीक्षा करती थीं। लेकिन अब कंपनियों को यह देखना पड़ता है कि कच्चे माल की स्थिति क्या है, कहीं कमी तो नहीं हो रही, फैक्ट्री चलेगी या नहीं और कर्मचारियों की सुरक्षा व सेहत के लिए क्या करना है।

उनके मुताबिक, अनिश्चितता के दौर में कंपनियों को तेजी से प्रतिक्रिया देने की आदत डालनी होगी। जब हालात सामान्य होंगे तो पारंपरिक तरीके से काम किया जा सकता है।

7.8% GDP ग्रोथ पर क्या बोले गोयनका?

GDP ग्रोथ के 7.8% आंकड़े को लेकर उठने वाले सवालों पर गोयनका ने अपने कारोबार का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि करीब एक साल पहले उनके कारोबार की ग्रोथ सामान्य तौर पर 8 से 11% के आसपास थी।

लेकिन GST 2.0 के बाद डिमांड में बड़ा उछाल देखने को मिला और यह ग्रोथ करीब 15 से 16% तक पहुंच गई। इसके चलते कंपनी को अपने पहले से तय CapEx को भी आगे लाना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस महीने तक भी यह ग्रोथ बनी हुई है।

गोयनका के मुताबिक, यह सिर्फ उनके एक बिजनेस की बात नहीं है। पूरे उद्योग में ग्रोथ का स्तर ऊंचा नजर आ रहा है। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री, ऑटो पार्ट्स चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में अच्छी ग्रोथ दिखाई दे रही है। हालांकि कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मार्जिन पर कुछ दबाव है।

भारतीय कंपनियों को ग्लोबल बनने की जरूरत

गोयनका ने यह भी माना कि भारतीय कंपनियां अपनी ग्लोबल महत्वाकांक्षा को और बड़ा कर सकती हैं। उन्होंने टायर कारोबार का उदाहरण देते हुए बताया कि करीब 10-15 साल पहले कंपनी मुख्य रूप से भारतीय बाजार के लिए उत्पादन करती थी। अतिरिक्त क्षमता को अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और दूसरे देशों में बेच दिया जाता था।

बाद में कंपनी ने चुनिंदा देशों को फोकस मार्केट बनाया और वहां अपनी टीम भेजकर स्थानीय ग्राहकों की जरूरतों को समझना शुरू किया। इसके बाद पता चला कि अलग-अलग देशों में टायर की जरूरत काफी अलग होती है।

यूरोप में ड्राइविंग का तरीका अलग है और वहां तापमान माइनस 20 से लेकर प्लस 30-40 डिग्री तक हो सकता है। अमेरिका में सड़कें और ड्राइविंग पैटर्न काफी अलग हैं। वहीं मिडिल ईस्ट में तापमान कभी-कभी 50 डिग्री तक पहुंच जाता है।

इसलिए अलग-अलग बाजारों में अलग तरह के टायर, जैसे अल्ट्रा-हाई परफॉर्मेंस टायर, विंटर टायर और दूसरे प्रकार के टायर की जरूरत होती है। गोयनका के मुताबिक, भारतीय कंपनियों को दूसरे देशों में जाने के लिए ज्यादा समय, पैसा और ऊर्जा लगानी चाहिए, वहां के ग्राहकों की जरूरत समझनी चाहिए और उनके लिए इनोवेशन करके दुनिया में बेचना चाहिए।

क्या भारत में रोजगार का संकट है?

रोजगार के सवाल पर गोयनका ने कहा कि भारत में रोजगार संकट का कुछ जोखिम जरूर है, लेकिन उनके मुताबिक सबसे बड़ा अवसर भारत को मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनाने में है।

उन्होंने कहा कि अगर मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी मौजूदा करीब 15% GDP से लंबी अवधि में 25% तक पहुंचती है तो इससे बड़ी संख्या में रोजगार पैदा हो सकते हैं। अगर 20 साल के चक्र को भी देखें तो मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ काफी तेज होनी चाहिए, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

उन्होंने माना कि रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के कारण कुछ जगहों पर उत्पादकता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अगर मैन्युफैक्चरिंग में 15-17% की ग्रोथ आती है तो रोजगार के अवसरों को काफी हद तक संभाला जा सकता है।

सर्विसेज, स्टार्टअप और भविष्य के सेक्टरों पर भी फोकस

गोयनका ने कहा कि रोजगार के नए अवसर सर्विसेज और स्टार्टअप सेक्टर में भी बन रहे हैं। इसके साथ ही स्पेस, रोबोटिक्स और दूसरे नए क्षेत्रों को भारत में ही विकसित करने की जरूरत है।

उन्होंने घर में सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले रोबोट का उदाहरण दिया। उनका सवाल था कि अगर ऐसे रोबोट चीन से आयात किए जाएंगे तो रोजगार का अवसर भी बाहर चला जाएगा। इसलिए भारत को ऐसे भविष्य के उत्पादों को देश में ही बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

उनके मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन, स्पेस सेक्टर और ड्रोन जैसे क्षेत्रों में भारत आगे बढ़ रहा है और भविष्य के इन सेक्टरों पर फोकस करना रोजगार के लिए भी महत्वपूर्ण है।

चीन, रूस और ईरान के साथ कारोबार में क्या रणनीति हो?

BRICS के संदर्भ में चीन, रूस और ईरान जैसे देशों के साथ आर्थिक रिश्तों को लेकर गोयनका ने कहा कि सरकार ने भारतीय कारोबार के लिए नए चैनल खोले हैं।

भारत ने नौ नए Free Trade Agreements यानी FTAs किए हैं, जिनसे नए अवसर सामने आए हैं। उन्होंने EFTA, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, जॉर्डन, UK और EU जैसे बाजारों का जिक्र किया।

उनके मुताबिक, भारतीय कंपनियों को यह देखना चाहिए कि इन नए समझौतों का उनके कारोबार पर क्या असर पड़ेगा और इनसे जुड़े किन नए क्षेत्रों में वे प्रवेश कर सकती हैं। ऐसा करने से ग्रोथ के नए रास्ते खुल सकते हैं।

हालांकि उन्होंने माना कि ईरान और चीन जैसे बाजारों से जुड़े राजनीतिक मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार के नियमों और नीतियों के हिसाब से कंपनियों को आगे बढ़ना होगा। उन्होंने चीन के संदर्भ में Press Note 3 का भी जिक्र किया।

नए FTAs से भारत को पुराने अनुभवों से सीखना होगा

ASEAN जैसे पुराने ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर उठे सवालों पर गोयनका ने कहा कि भारत ने पुराने FTAs से सीख ली है। कोरिया और जापान जैसे पुराने समझौतों के बाद ट्रेड डेफिसिट बढ़ने की बात सामने आई थी।

उनके मुताबिक, मौजूदा FTAs पहले की तुलना में काफी व्यापक हैं। इनमें सिर्फ सामान के व्यापार की बात नहीं होती, बल्कि IP Protection, लोगों की आवाजाही, निवेश से जुड़े वादों की लगातार समीक्षा और जरूरत पड़ने पर कुछ प्रावधानों में बदलाव की गुंजाइश भी होती है।

गोयनका ने कहा कि भारत के लिए बाजार खोलना भी जरूरी और समय के हिसाब से सही है। हालांकि डेयरी और एग्रीकल्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किसानों की सुरक्षा का ध्यान रखा गया है। उनके मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था काफी संतुलित है और पुराने अनुभवों से सीख इसमें शामिल की गई है।

विदेशी निवेशकों के लिए भारत में बड़ा मौका

Invest in India के सवाल पर गोयनका ने कहा कि भारत में भरोसे और विश्वसनीयता का स्तर काफी ऊंचा है। उनके मुताबिक, देश में राजनीतिक स्थिरता रही है और लगातार रिफॉर्म्स, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और कारोबार की लागत कम करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

भारत के पास मजबूत डेमोग्राफी, प्राकृतिक संसाधन, जमीन और कम लागत वाली श्रम शक्ति जैसे फायदे हैं। इसलिए उनका मानना है कि भारत का भविष्य काफी मजबूत दिखाई देता है।

उन्होंने विदेशी निवेशकों से कहा कि भारत में आने का यह सही समय है। अगर कोई निवेशक अभी भारत में नहीं आता तो 10 या 15 साल बाद वह इस अवसर से चूक सकता है और शायद बाजार में आने में देर हो जाए।

खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर उन्होंने भारत की संभावनाओं को बहुत मजबूत बताया।

Deep Tech और स्टार्टअप क्रांति क्यों आई?

Deep Tech को लेकर गोयनका ने इसे पिछले दशक की भारत की बड़ी सफलता की कहानियों में से एक बताया। उनके मुताबिक, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सही समय पर पूरे इकोसिस्टम का तैयार होना है।

उन्होंने कहा कि 15 साल पहले या 2010 से पहले भारत में वेंचर कैपिटल सिस्टम काफी कमजोर था। वेंचर कैपिटल लगभग मौजूद नहीं था और युवाओं के लिए यह सोचना मुश्किल था कि वे अपना बिजनेस शुरू करने के बाद आगे बढ़ने के लिए बड़ी पूंजी कहां से लाएंगे।

करीब 2010 के आसपास बेंगलुरु में यह सिस्टम मजबूत होना शुरू हुआ। इसके बाद एक सफल स्टार्टअप की कहानी दूसरे लोगों के लिए प्रेरणा बनी और यह सिलसिला तेजी से बढ़ता गया।

कॉरपोरेट सेक्टर में भी कई युवाओं में अपना स्टार्टअप शुरू करने को लेकर FOMO देखने को मिला। वे अपनी नौकरी छोड़कर खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते थे और अपनी कंपनी में इक्विटी चाहते थे।

RPG Group ने भी ऐसे युवाओं को सपोर्ट करने की कोशिश की और स्टार्टअप में निवेश किया। हालांकि गोयनका ने माना कि इस क्षेत्र में कंपनी की सफलता मिली-जुली रही, क्योंकि RPG Group मूल रूप से एक ऑपरेटिंग कंपनी है।

उनका कहना है कि अगर कोई युवा कुछ अपना करना चाहता है या उसे किसी ज्यादा इनोवेटिव क्षेत्र में बेहतर अवसर मिलता है तो कंपनियों को उसे आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए।

Gen Z के लिए अनंत गोयनका का मैसेज

युवा भारत और Gen Z के लिए गोयनका का संदेश साफ था। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद Gen Z से बहुत कुछ सीखना है। उन्हें लगता है कि Gen Z ज्यादा उद्देश्य के साथ काम करने वाली पीढ़ी है।

इस पीढ़ी में दुनिया को बदलने और सकारात्मक असर डालने की इच्छा है। साथ ही यह पीढ़ी Sustainability जैसे मुद्दों को भी ज्यादा महत्व देती है।

उन्होंने Gen Z को सलाह दी कि सिर्फ समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय कुछ बनाने पर फोकस करें। उनका संदेश है कि बड़ा सोचें, कुछ नया बनाएं और ऐसा काम करें जो देश के विकास से जुड़ा हो।

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