जीडीपी ग्रोथ मजबूत, बेरोजगारी कम लेकिन नौकरी की क्वालिटी पर सवाल, समझिए पूरा मामला
भारत में बेरोजगारी दर कम और लगभग स्थिर है, लेकिन क्या लोगों को अच्छी नौकरियां भी मिल रही हैं? MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने रोजगार की इस बहस पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि बदलती तकनीक, दुनिया के हालात और दूसरे कारण नौकरियों पर असर डाल सकते हैं।

In Short
- MoSPI सचिव सौरभ गर्ग के मुताबिक भारत में बेरोजगारी दर करीब 3 से 5 फीसदी के बीच है और पिछले एक साल से ज्यादा समय से लगभग स्थिर है।
- गर्ग ने कहा, सिर्फ कम बेरोजगारी दर से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती, अच्छी और बेहतर Jobs की Quality भी बड़ा सवाल है।
- दुनिया में बढ़ते तनाव, बदलते मौसम और नई तकनीक का असर नौकरियों और भर्ती पर भी दिख सकता है।
भारत में रोजगार को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। एक तरफ आधिकारिक आंकड़ों में बेरोजगारी दर कम और स्थिर दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अच्छे और बेहतर रोजगार को लेकर सवाल बने हुए हैं।
बिजनेस टुडे के एक शो में ग्रुप एडिटर सिद्धार्थ ज़राबी के सवालों का जवाब देते हुए MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि सरकारी सर्वे के मुताबिक बेरोजगारी दर फिलहाल बहुत ज्यादा नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सिर्फ बेरोजगारी की दर देखकर रोजगार की पूरी तस्वीर समझना सही नहीं होगा।
बेरोजगारी दर 3 से 5 फीसदी के बीच
सौरभ गर्ग ने कहा कि Periodic Labour Force Survey यानी PLFS के आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी दर अलग-अलग पैमानों पर करीब 3 से 5 फीसदी के बीच रहती है।
उन्होंने बताया कि Current Weekly Status और लंबे समय के Primary Status के आधार पर बेरोजगारी की दर में थोड़ा फर्क दिखता है। हालांकि पिछले एक साल या उससे ज्यादा समय से यह दर मोटे तौर पर स्थिर बनी हुई है।
क्या कम बेरोजगारी का मतलब Jobs की समस्या नहीं?
गर्ग के मुताबिक बेरोजगारी की दर कम होना एक बात है, लेकिन लोगों को किस तरह की नौकरी मिल रही है, यह अलग सवाल है।
उन्होंने कहा कि “Good Jobs” यानी अच्छी नौकरियों की बात कई चीजों पर निर्भर करती है। इसमें लोगों की उम्मीदें, उनकी स्किल, इंडस्ट्री की जरूरतें और उपलब्ध रोजगार के प्रकार शामिल हैं।
यानी सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि किसी व्यक्ति के पास काम है या नहीं। यह भी अहम है कि उस काम की गुणवत्ता कैसी है और क्या वह उसकी स्किल और उम्मीदों से मेल खाता है।
बढ़ी अनिश्चितता भी डाल रही असर
सौरभ गर्ग ने रोजगार से जुड़े माहौल में बढ़ती अनिश्चितता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि Geopolitical Situation, Climate Change और Technology जैसे मुद्दों की वजह से अनिश्चितता बढ़ी है।
उनके मुताबिक ये बदलाव कंपनियों की Hiring और अलग-अलग Skills की मांग को भी प्रभावित कर सकते हैं।
Jobs की Quality पर बड़ी बहस
गर्ग ने साफ किया कि रोजगार की गुणवत्ता का सवाल केवल आंकड़ों से हल नहीं हो सकता। यह एक बड़ा मुद्दा है जिस पर व्यापक स्तर पर चर्चा की जरूरत है।
कम बेरोजगारी दर यह दिखा सकती है कि लोगों को किसी न किसी तरह का काम मिल रहा है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि लोगों को अच्छी सैलरी, बेहतर Productivity या उनकी योग्यता के मुताबिक Jobs मिल रही हैं।
GDP ग्रोथ के साथ Jobs पर नजर
भारत की मजबूत GDP ग्रोथ के बीच रोजगार का मुद्दा इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि अब सवाल सिर्फ Jobs की संख्या का नहीं, बल्कि उनकी Quality का भी है।
सौरभ गर्ग के मुताबिक रोजगार से जुड़े इन बड़े सवालों पर सिर्फ आंकड़ों के बजाय व्यापक आर्थिक और नीतिगत नजरिए से चर्चा की जरूरत है।