गर्मी का बढ़ता तापमान बढ़ा सकता है मुश्किलें, रिपोर्ट में आई बड़ी चेतावनी

तेज गर्मी अब सिर्फ सेहत ही नहीं, लोगों की कमाई और घर के बजट पर भी असर डाल सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2030 तक भारत में हर कामगार को साल में 19 से ज्यादा दिनों का काम गंवाना पड़ सकता है, जिससे कमाई घटने और खर्च बढ़ने का खतरा है।

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In Short

  • साल 2030 तक हर कामगार को सालाना 19 से ज्यादा कामकाजी दिनों का नुकसान हो सकता है।
  • भारत के करीब 25 करोड़ कामगारों को तेज गर्मी के कारण काम करने में परेशानी हो सकती है।
  • कमाई घटने के साथ बिजली, पानी और इलाज का खर्च बढ़ने से परिवारों का बजट बिगड़ सकता है।

By Gaurav Kumar:

Heatwave Impact: तेज गर्मी अब सिर्फ लोगों की सेहत और रोज की जिंदगी पर असर नहीं डाल रही है, बल्कि इससे कमाई घटने और घर का खर्च बढ़ने का भी खतरा है। Atlantic Council’s Climate Resilience Center की रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती गर्मी लाखों भारतीय परिवारों की पैसों से जुड़ी मुश्किलें बढ़ा सकती है।

हर साल 19 दिन तक कम मिल सकता है काम

रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत ज्यादा गर्मी के कारण साल 2030 तक भारत में हर काम करने वाले व्यक्ति को साल में 19 से ज्यादा दिनों का काम खोना पड़ सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर होगा, जिन्हें खुले में या बहुत गर्म जगहों पर लंबे समय तक काम करना पड़ता है।

इनमें मजदूर, किसान, फैक्ट्री कर्मचारी, डिलीवरी कर्मचारी, गाड़ी चलाने वाले लोग और सड़क किनारे सामान बेचने वाले शामिल हैं। तेज गर्मी में दोपहर के समय काम करना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए इन्हें अपने काम के घंटे कम करने पड़ सकते हैं। रिपोर्ट का कहना है कि आने वाले समय में भारत के करीब 25 करोड़ लोगों को काम के दौरान तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

काम कम हुआ तो घटेगी कमाई

भारत में बड़ी संख्या में लोग ऐसे काम करते हैं, जहां उन्हें छुट्टी के पैसे, इलाज का बीमा या दूसरी मदद नहीं मिलती। जिस दिन वे काम नहीं करते, उस दिन उनकी कमाई भी नहीं होती।

हर महीने कुछ दिनों का काम छूटने से घर का किराया, राशन, बच्चों की फीस और इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो सकता है। कमाई घटने पर लोगों को अपनी जमा पूंजी खर्च करनी पड़ सकती है या रोज के खर्च के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है।

बढ़ेगा बिजली और इलाज का खर्च

गर्मी बढ़ने पर पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल ज्यादा होता है, जिससे बिजली का बिल बढ़ जाता है। पानी का इस्तेमाल बढ़ने से उसका खर्च भी बढ़ सकता है।

शरीर में पानी की कमी, गर्मी से कमजोरी और लू लगने जैसी परेशानियों के इलाज पर भी ज्यादा पैसा खर्च हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और खुले में काम करने वालों को ज्यादा खतरा रहता है।

खेती और कारोबार पर भी असर

काम के घंटे घटने से मकान और सड़क बनाने का काम धीमा हो सकता है। खेती की पैदावार कम हो सकती है और फैक्ट्री, डिलीवरी तथा गाड़ियों से जुड़े कामों में परेशानी आ सकती है।

रिपोर्ट में काम करने वाली जगहों पर ठंडक का इंतजाम, काम का समय बदलने और गर्मी से बचाव की योजना बनाने की जरूरत बताई गई है।

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