Uber-Swiggy जैसे ऐप पर महिलाओं की हिस्सेदारी कम, डिजिटल रोजगार में बड़ी चुनौती आई सामने: रिपोर्ट

ब्लूमबर्ग ने International Labour Organization (ILO) और National Council of Applied Economic Research (NCAER) की सोमवार को जारी रिपोर्ट के हवाले से यह बात कही है।

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By BT बाज़ार डेस्क:

भारत की गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। 10 मिनट में डिलीवरी से लेकर राइड-हेलिंग ऐप तक लाखों रोजगार पैदा कर रहे हैं, लेकिन इस डिजिटल रोजगार बाजार में महिलाएं अब भी बड़ी संख्या में शामिल नहीं हो पाई हैं। ब्लूमबर्ग ने International Labour Organization (ILO) और National Council of Applied Economic Research (NCAER) की सोमवार को जारी रिपोर्ट के हवाले से यह बात कही है।

बैंक खाते बढ़े, डिजिटल रोजगार में दूरी कायम

भारत में महिलाओं की बुनियादी बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच पुरुषों के करीब पहुंच गई है, लेकिन इसका फायदा डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार के स्तर पर नहीं दिख रहा। Uber, Swiggy और Urban Company जैसी ऐप आधारित कंपनियों में महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल स्किल की कमी, आने-जाने में दिक्कत, सुरक्षा की चिंता और सामाजिक मान्यताएं महिलाओं को गिग वर्क से दूर रख रही हैं। रिसर्चर्स ने कहा कि ऐप आधारित अर्थव्यवस्था में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी कम और असमान है।

महिला रोजगार बढ़े तो अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा

भारत लंबे समय से महिला श्रम भागीदारी बढ़ाने की चुनौती से जूझ रहा है। ILO के अनुमानों के मुताबिक, 2025 में अंतरराष्ट्रीय तुलना के आधार पर भारत की महिला श्रम-बल भागीदारी करीब 32% थी, जबकि पुरुषों के लिए यह लगभग 78% थी।

World Bank का अनुमान है कि महिलाओं की श्रम भागीदारी 50% तक पहुंचने पर भारत की सालाना आर्थिक वृद्धि में करीब एक प्रतिशत अंक जुड़ सकता है। इससे 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के भारत के लक्ष्य को भी मदद मिल सकती है।

2029-30 तक 2.35 करोड़ गिग वर्कर्स का अनुमान

सरकारी अनुमान के मुताबिक, भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 2029-30 तक करीब दोगुनी होकर 2.35 करोड़ हो सकती है। इससे हर साल की आर्थिक गतिविधि में करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये का योगदान होने का अनुमान है।

लेकिन डिजिटल कौशल की कमी बड़ी बाधा है। 2025 के एक सरकारी अध्ययन के मुताबिक, 15 साल और उससे ज्यादा उम्र की केवल 56.2% भारतीय महिलाएं मोबाइल फोन रखती हैं, जबकि सिर्फ 37% महिलाएं ऑनलाइन बैंकिंग लेनदेन कर सकती हैं।

गिग वर्क से वित्तीय पहुंच भी बढ़ सकती है

रिपोर्ट के मुताबिक, गिग वर्क महिलाओं की वित्तीय स्थिति मजबूत करने का जरिया भी बन सकता है। डिजिटल तरीके से दर्ज कमाई बैंकों को आय का प्रमाण दे सकती है। इससे बिना संपत्ति या अन्य गारंटी के भी महिलाओं के लिए लोन हासिल करना आसान हो सकता है। यही रिकॉर्ड बीमा, बचत और पेंशन जैसी सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में भी मदद कर सकते हैं।

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