GDP के आंकड़ों में बड़े उतार-चढ़ाव का दौर खत्म? बेस ईयर बदलने के बाद अब छोटे बदलाव की उम्मीद
भारत के GDP आंकड़ों पर उठ रहे सवालों के बीच MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि डेटा तैयार करने का तरीका साफ और भरोसेमंद है। उन्होंने बताया कि UPI, GST, e-Vahan और फील्ड से मिलने वाले बड़े डेटा की मदद से GDP के आंकड़ों को ज्यादा मजबूत तरीके से तैयार किया जाता है।

In Short
- GDP डेटा की विश्वसनीयता पर उठे सवालों को MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने खारिज किया, कहा- भारत में कोई Credibility Crisis नहीं है।
- गर्ग के मुताबिक GDP मेथडोलॉजी में बदलाव विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से चर्चा के बाद किए गए हैं।
- UPI, GST, e-Vahan और PFMS जैसे डिजिटल डेटा सोर्स से आर्थिक आंकड़ों की जांच और अनुमान पहले से ज्यादा मजबूत हुए हैं।
भारत के GDP और दूसरे आर्थिक आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों पर MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने साफ कहा है कि देश के मैक्रोइकोनॉमिक डेटा में किसी तरह का भरोसे का संकट नहीं है। उन्होंने GDP आंकड़ों में हेरफेर या उन्हें जानबूझकर बेहतर दिखाने के आरोपों को खारिज किया।
बिजनेस टुडे के एक शो में ग्रुप एडिटर सिद्धार्थ ज़राबी के सवालों का जवाब देते हुए MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि भारत के GDP डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना सही नहीं है। उनके मुताबिक हाल में किए गए मेथडोलॉजी बदलाव विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों और फोरकास्टर्स के साथ व्यापक चर्चा के बाद किए गए हैं।
GDP डेटा पर क्या बोले सौरभ गर्ग?
जब सौरभ गर्ग से पूछा गया कि क्या भारत के मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़ों को लेकर Credibility Crisis यानी भरोसे का संकट है, तो उन्होंने कहा कि इसका छोटा जवाब है, “Absolutely not.”
गर्ग ने कहा कि इस साल की शुरुआत में किए गए बदलाव अचानक नहीं किए गए। इसके लिए लंबे समय तक विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं से बातचीत की गई।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से बदलाव
सौरभ गर्ग के मुताबिक पिछले एक साल के दौरान Consultation Papers भी जारी किए गए। नई व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि IMF, United Nations और वैश्विक सांख्यिकी समुदाय के साथ चर्चा के बाद भी मेथडोलॉजी में सुधार किए गए।
डिजिटल डेटा को बताया बड़ी ताकत
गर्ग ने भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल डेटा को भी GDP और दूसरे आर्थिक आंकड़ों की मजबूती की बड़ी वजह बताया।
उन्होंने UPI, GST, e-Vahan और Public Financial Management System यानी PFMS जैसे प्लेटफॉर्म का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक भारत के पास अब बड़ी मात्रा में ऐसा डिजिटल डेटा उपलब्ध है, जिसे जांचा और वेरिफाई किया जा सकता है।
हजारों कर्मचारी जुटाते हैं डेटा
सौरभ गर्ग ने कहा कि देश में हजारों सांख्यिकी विशेषज्ञ इस व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा करीब 10,000 कर्मचारियों की फील्ड फोर्स लगातार घरों और कंपनियों से जानकारी जुटाती है।
उनके मुताबिक GDP के आंकड़े केवल किसी एक इंडिकेटर पर आधारित नहीं होते, बल्कि बड़ी मात्रा में अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले डेटा को इसमें शामिल किया जाता है।
मेथडोलॉजी और डेटा सोर्स सार्वजनिक
GDP डेटा पर उठ रहे सवालों के बीच गर्ग ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली मेथडोलॉजी और डेटा सोर्स सार्वजनिक हैं। इसलिए इन्हें स्वतंत्र रूप से जांचा भी जा सकता है।
हाल में GDP ग्रोथ और नए बेस ईयर से जुड़े संशोधनों के बाद आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज हुई है। गर्ग का कहना है कि इस बहस में देश की डेटा क्षमता और डेटा जुटाने की पूरी प्रक्रिया को भी समझना जरूरी है।
सरकार का तर्क है कि GDP की विश्वसनीयता केवल किसी एक आंकड़े या धारणा के आधार पर नहीं, बल्कि डेटा की गहराई, मेथडोलॉजी और संस्थागत प्रक्रिया के आधार पर देखी जानी चाहिए।