भारत में मानसून पर El Nino का असर, 15% कम बारिश से फसल और खाद्य कीमतों की चिंता बढ़ी
भारत में मानसून इस बार सामान्य से काफी कमजोर चल रहा है। जून से सितंबर के दौरान अब तक बारिश 15% कम रही है। अगर यही स्थिति बनी रही तो यह 17 साल का सबसे कमजोर मानसून हो सकता है। इससे खेती, फसल उत्पादन और खाद्य महंगाई की चिंता बढ़ी है।

In Short
- भारत में इस साल मानसून सामान्य से 15% कम चल रहा है और 17 साल का सबसे कमजोर मानसून दर्ज होने की आशंका है।
- कमजोर बारिश और El Nino की वजह से फसल उत्पादन और खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ने की चिंता है।
- सरकार ने खाद्य कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चीनी के शुल्क मुक्त आयात और सब्सिडी वाली प्याज बिक्री जैसे कदम उठाए हैं।
भारत में इस साल मानसून सामान्य से काफी कमजोर चल रहा है। कम बारिश की वजह से देश की कृषि अर्थव्यवस्था और खाद्य कीमतों पर असर को लेकर चिंता बढ़ रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत 17 साल में सबसे कमजोर मानसून दर्ज करने की ओर बढ़ रहा है।
मजबूत हो रही El Nino परिस्थितियों की वजह से बारिश प्रभावित हो रही है, जिससे फसल उत्पादन और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
2009 के बाद सबसे कमजोर मानसून की आशंका
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार जून से सितंबर के मानसून सीजन में अब तक संचयी बारिश सामान्य से 15% कम है।
अगर बारिश में यह कमी बनी रहती है तो यह साल 2009 के बाद सबसे कमजोर मानसून हो सकता है। साल 2009 में बारिश सामान्य से 18% कम रही थी।
इस साल मई में IMD ने पूरे मानसून सीजन में सामान्य से 10% कम बारिश का अनुमान जताया था।
सितंबर के आखिरी हफ्ते में राहत की उम्मीद
ऑस्ट्रेलिया की कंसल्टेंसी Global Weather Climate Analytics के मैनेजिंग डायरेक्टर Christian Werner के मुताबिक सितंबर के आखिरी हफ्ते में बंगाल की खाड़ी में एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात विकसित हो सकता है।
इससे पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश से राहत मिल सकती है। हालांकि उनका कहना है कि इससे देशभर में बारिश की कमी पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।
उनके अनुमान के मुताबिक इस साल मानसून में बारिश की कमी 13% से 16% के बीच रह सकती है।
Lancaster University के CRUCIAL prediction platform के अनुमान के मुताबिक भी मानसून कमजोर रहने की संभावना है। प्लेटफॉर्म के संस्थापक Mark Roulston के अनुसार इस सीजन में सामान्य से 10% से 20% कम बारिश होने की 68% संभावना है।
खेती और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है असर
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में मानसून की अहम भूमिका है। देश के करोड़ों किसान खेती के लिए मौसमी बारिश पर निर्भर रहते हैं।
भारत दुनिया के बड़े चावल, चीनी और कपास उत्पादकों में शामिल है। जून से सितंबर का मानसून देश की सालाना बारिश का बड़ा हिस्सा पूरा करता है।
बारिश की कमी का असर मौजूदा फसल और अगली फसल की तैयारी पर पड़ सकता है। इससे खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
अगस्त में खाद्य महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी और इस साल के सबसे ऊंचे स्तर 5.95% पर पहुंच गई। वहीं चावल, गन्ने और मक्का की बुवाई पिछले साल के स्तर से पीछे चल रही है।
सरकार ने उठाए कीमतों को नियंत्रित करने के कदम
कम बारिश और बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने खाद्य आपूर्ति मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं।
इनमें चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देना और कुछ राज्यों में प्याज को सब्सिडी वाली कीमतों पर बेचना शामिल है, ताकि खाद्य कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।