चीन में बढ़ी भारतीय इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मांग, 5 महीने में करीब 40% उछला एक्सपोर्ट; जानिए क्या है वजह
भारत और चीन के बीच व्यापार में एक चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है। जिस चीन से भारत बड़े पैमाने पर सामान खरीदता है, अब उसी बाजार में भारतीय प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। आखिर इसके पीछे क्या वजह है और भारत को कितना फायदा होगा? जानिए पूरी कहानी।

In Short
- अगस्त तक के पांच महीनों में भारत से चीन को होने वाला एक्सपोर्ट करीब 40 फीसदी बढ़ा।
- मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में चीन को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट तीन गुना बढ़कर 3.18 अरब डॉलर पहुंच गया।
- AI और डेटा सेंटर के लिए उपकरणों की बढ़ती मांग से भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के एक्सपोर्ट में तेजी आई।
भारत और चीन के बीच व्यापार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चीन में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक सामान की मांग तेजी से बढ़ रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त तक के पांच महीनों में भारत से चीन को होने वाला एक्सपोर्ट करीब 40 फीसदी बढ़ गया है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान की बड़ी हिस्सेदारी रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और डेटा सेंटर के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को इसकी एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट तीन गुना बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत से चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का एक्सपोर्ट तीन गुना बढ़कर 3.18 अरब डॉलर पहुंच गया। इसमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली, स्मार्टफोन, डिस्प्ले मॉड्यूल और टेलीकॉम उपकरण शामिल हैं।
चालू वित्त वर्ष में भी यह तेजी जारी है। अप्रैल से अगस्त के बीच चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का एक्सपोर्ट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 15 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है।
AI और डेटा सेंटर से क्यों बढ़ रही मांग?
इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजू गोयल ने ब्लूमबर्ग को बताया कि AI से जुड़े प्रोडक्ट और डेटा सेंटर के लिए हाई-एंड उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए सप्लायर्स पर दबाव बढ़ा है। इसी वजह से भारत से चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का एक्सपोर्ट बढ़ रहा है।
इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू के मुताबिक, यह बढ़ोतरी दिखाती है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को दुनिया की प्रतिस्पर्धी सप्लाई चेन में पहचान मिलने लगी है।
चीन से व्यापार में भारत अब भी पीछे
एक्सपोर्ट बढ़ने के बावजूद चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा काफी बड़ा है। मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत ने चीन से 131.6 अरब डॉलर का सामान आयात किया। यह भारत के कुल इंपोर्ट का करीब 17 फीसदी था।
वहीं, भारत के कुल एक्सपोर्ट में चीन की हिस्सेदारी 4.4 फीसदी रही, जो पिछले वित्त वर्ष में 3 फीसदी से थोड़ी ज्यादा थी। अमेरिका करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी के साथ भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट बाजार बना हुआ है।
इंजीनियरिंग सामान के एक्सपोर्ट में भी तेजी
इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा चीन को भारतीय इंजीनियरिंग सामान का एक्सपोर्ट भी बढ़ा है। अप्रैल से अगस्त के बीच मशीनरी, ऑटो पार्ट्स, हैंड टूल्स और दूसरे कंपोनेंट्स का एक्सपोर्ट करीब 21 फीसदी बढ़ा।
हालांकि, दोनों देशों के आंकड़ों में अंतर है। चीन के कस्टम डेटा में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड की आवक में वैसी बढ़ोतरी नहीं दिखती। अधिकारियों के मुताबिक, इसकी वजह दोनों देशों में सामान की अलग-अलग कैटेगरी में गिनती हो सकती है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब भारत और चीन अपने कूटनीतिक रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, अमेरिका की बदलती टैरिफ रणनीति भी दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की वजह बन रही है।