भारत में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को ₹120 करोड़ का बूस्ट, ग्लोबल मार्केट पर नजर और खेती में बढ़ता इस्तेमाल

भारत का ड्रोन सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। सरकार ने घरेलू ड्रोन और कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए ₹120 करोड़ के PLI आउटले का प्रावधान किया है। इसका फोकस इनोवेशन और ग्लोबल बाजार पर है। वहीं खेती, आपदा प्रबंधन और रक्षा क्षेत्र में भी ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

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By Gaurav Kumar:

भारत का ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ₹120 करोड़ के Production Linked Incentive (PLI) आउटले का प्रावधान किया है। इसका मकसद देश में ड्रोन और उनसे जुड़े कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना, नई तकनीक और इनोवेशन को प्रोत्साहित करना और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल मार्केट के लिए तैयार करना है। यानी भारत में तैयार होने वाली ड्रोन तकनीक को अब दुनिया के बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

घरेलू ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

₹120 करोड़ के PLI का फोकस भारत में ड्रोन और उससे जुड़े उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने पर है। इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने और ड्रोन सेक्टर में कंपनियों को आगे बढ़ने का मौका मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य भारत को ग्लोबल ड्रोन बाजार में एक मजबूत स्थान दिलाना है।

खेती में बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल

भारत के खेतों में भी ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। नमो ड्रोन दीदी पहल के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि खेती से जुड़े कामों में इनका इस्तेमाल किया जा सके। ड्रोन की मदद से फसलों पर दवा और खाद का छिड़काव कम समय में तेजी से किया जा सकता है। इससे खेती में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने के साथ महिलाओं की भूमिका भी मजबूत हो रही है।

आपदा के समय मददगार बन सकते हैं ड्रोन

ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ खेती और मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है। आपदा और इमरजेंसी के समय ये पहले रिस्पॉन्डर की तरह भी काम कर सकते हैं। भारत में बने ड्रोन मुश्किल इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने, प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी करने और बचाव कार्यों में मदद के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। बाढ़, भूस्खलन और दूसरी आपदाओं के दौरान उन जगहों तक ड्रोन पहुंच सकते हैं, जहां इंसानों के लिए पहुंचना मुश्किल होता है।

एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की क्षमता भी

भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो खुद एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की क्षमता रखते हैं। देश ने स्वदेशी रूप से INS विक्रांत का निर्माण किया है। यह भारत की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भरता को दिखाता है। INS विक्रांत भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत का एक अहम हिस्सा है।

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