रिकॉर्ड महंगी हुई चीनी पर सरकार का बड़ा प्लान, आयात शुल्क घटाकर कीमतों पर लगाम लगाने की तैयारी

चीनी की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने और त्योहारों से पहले महंगाई को काबू करने के लिए आयात शुल्क घटाने पर विचार किया जा रहा है। जानिए चीनी की कीमतों में उछाल के पीछे क्या कारण हैं और सरकार क्या कदम उठा सकती है।

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In Short

  • सरकार चीनी आयात पर लगे 100% टैक्स को कम करने या हटाने पर कर रही है विचार
  • महाराष्ट्र में चीनी की एक्स मिल कीमत करीब 46 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
  • मानसून की कमी और त्योहारों की बढ़ती मांग से चीनी सप्लाई पर बढ़ा दबाव

By BT बाज़ार डेस्क:

भारत में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सरकार आयात शुल्क कम करने या पूरी तरह हटाने पर विचार कर रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक भारत में घरेलू सप्लाई बढ़ाने और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है। फिलहाल चीनी आयात पर 100% टैक्स लगाया जाता है। सरकार के इस फैसले से पहले बाजार में सप्लाई बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है।

चीनी आयात शुल्क घटाने पर मंथन

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों के अनुसार सरकार चीनी के आयात पर लगे 100% टैक्स को कम करने या खत्म करने के प्रस्तावों पर चर्चा कर रही है। हालांकि यह बातचीत अभी गुप्त है और इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। फूड और कॉमर्स मिनिस्ट्री की ओर से इस मामले पर तुरंत कोई जानकारी नहीं दी गई है।

त्योहारों से पहले बढ़ी कीमतों की चिंता

भारत में अगस्त के आखिर से जनवरी तक चीनी की मांग सबसे ज्यादा रहती है। इस दौरान त्योहारों में मिठाई, प्रोसेस्ड फूड और ड्रिंक्स की खपत बढ़ जाती है। ऐसे समय में कीमतों को काबू में रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

महाराष्ट्र में चीनी की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में चीनी की एक्स मिल कीमत हाल ही में करीब 46 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA के अनुसार यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

मौसम की मार से सप्लाई पर असर

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के चीनी बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। El Niño मौसम घटना के कारण फसल प्रभावित होने की आशंका है। भारत में भी चीनी गन्ने की फसल पर असर पड़ सकता है क्योंकि भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक मानसून बारिश सामान्य से 13% कम रही है। जून के अंत में यह कमी 40% से ज्यादा थी, जिससे कुछ फसलों की बुआई में देरी हुई।

गन्ने की पेराई पहले शुरू करने की तैयारी

रिपोर्ट के मुताबिक, देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में चीनी मिलें इस बार पेराई का काम सामान्य समय से 10 से 15 दिन पहले शुरू करने की योजना बना रही हैं। आमतौर पर पेराई नवंबर की शुरुआत में शुरू होती है। सरकार के साथ बातचीत के बाद यह फैसला सप्लाई बढ़ाने के लिए लिया गया है।

व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट लागू

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने हाल ही में व्यापारियों के लिए चीनी स्टॉक रखने की सीमा तय की है। इसका उद्देश्य जमाखोरी रोकना और महंगाई के खतरे को कम करना है। भारत आमतौर पर घरेलू खपत के लिए चीनी आयात नहीं करता है। ISMA के आंकड़ों के अनुसार आखिरी बार 2017-18 में बड़ी मात्रा में चीनी आयात की गई थी।

गन्ने की बुआई में मामूली गिरावट

कृषि मंत्रालय के अनुसार 14 अगस्त तक देश में 5.83 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुआई हुई है। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले थोड़ा कम है। सरकार अब सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए कई विकल्पों पर काम कर रही है।

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