RBI गवर्नर का बड़ा संकेत! भारत में बढ़ेगा विदेशी पैसा, दुनिया की चुनौतियों के बीच भी रहेगी मजबूती

भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को लेकर आरबीआई ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि विदेशी निवेश बढ़ने से देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स हेल्दी सरप्लस में रह सकता है ।हालांकि, ग्लोबल ट्रेड और ऊंची ऊर्जा कीमतें आगे भी चुनौती बनी रह सकती हैं।

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In Short

  • RBI गवर्नर के मुताबिक, भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स हेल्दी सरप्लस में रहने की उम्मीद है।
  • पहली तिमाही में बढ़े FDI इनफ्लो से बैलेंस ऑफ पेमेंट्स को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
  • विदेशी निवेश बढ़ने से भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स हेल्दी सरप्लस में रह सकता है।

By BT बाज़ार डेस्क:

भारत की बाहरी अर्थव्यवस्था को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि आने वाले समय में देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स हेल्दी सरप्लस में रह सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों से भारत में निवेश बढ़ने की उम्मीद है।

बुधवार को आरबीआई की मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान संजय मल्होत्रा ने कहा कि विदेशी निवेश के संकेत मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत में ग्रॉस एफडीआई इनफ्लो 30.7 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 26.7 अरब डॉलर था।

विदेशी निवेश में दिखी मजबूती

आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, विदेशी पूंजी के मोर्चे पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है। पहली तिमाही में एफडीआई इनफ्लो में पिछले साल के मुकाबले बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विदेशी निवेश में यह तेजी भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स को सपोर्ट कर सकती है।

बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में देश के बाहर से आने वाले और देश से बाहर जाने वाले पैसे का पूरा हिसाब शामिल होता है। विदेशी निवेश बढ़ने से इस स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है।

रुपये की कीमत बाजार तय करेगा

संजय मल्होत्रा ने कहा कि रुपये की कीमत बाजार में मांग और सप्लाई के हिसाब से तय होती रहेगी। हालांकि, अगर रुपये में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है या सट्टेबाजी बढ़ती है, तो हालात संभालने के लिए आरबीआई जरूरी कदम उठाएगा।

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इसका मतलब है कि रुपये की कीमत मांग और सप्लाई के आधार पर तय होगी, लेकिन बहुत ज्यादा अस्थिरता होने पर केंद्रीय बैंक स्थिति को संभालने के लिए जरूरी कार्रवाई कर सकता है।

करंट अकाउंट डेफिसिट पर बने हुए हैं जोखिम

RBI  गवर्नर ने कुछ जोखिमों का भी जिक्र किया। ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ में कमी, एनर्जी की ऊंची कीमतें और ट्रेड से जुड़ी अनिश्चितताएं भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट को बढ़ा सकती हैं।

हालांकि, भारत-यूके ट्रेड डील के लागू होने, सर्विसेज एक्सपोर्ट में मजबूती और विदेशों से आने वाले रेमिटेंस से इन जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। आरबीआई का मानना है कि इन कारणों से भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति संतुलित बनी रह सकती है।

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