AI का बुलबुला फूटा तो क्या होगा? IMF ने बताए 3 बड़े खतरे, वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पड़ सकता है असर
दुनिया की अर्थव्यवस्था फिलहाल बढ़ रही है, लेकिन आगे कई बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। IMF ने अपनी नई रिपोर्ट में AI में निवेश घटने, मिडिल ईस्ट में लंबे युद्ध और सरकारों के बढ़ते कर्ज को लेकर चेतावनी दी है। संस्था ने बताया है कि इन खतरों से वैश्विक विकास दर, शेयर बाजार और महंगाई पर कितना असर पड़ सकता है।

In Short
- IMF ने AI निवेश में गिरावट, मिडिल ईस्ट युद्ध और बढ़ते सरकारी कर्ज को तीन बड़े आर्थिक खतरे बताया।
- AI निवेश में तेज गिरावट से 2028 तक वैश्विक GDP अनुमानित स्तर से 1.1% नीचे रह सकती है।
- तेल 130 डॉलर के ऊपर बना रहा तो 2027 की वैश्विक विकास दर अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक कम हो सकती है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था के सामने आने वाले समय में तीन बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश का उत्साह कम होना, मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक युद्ध जारी रहना और सरकारों का बढ़ता कर्ज वैश्विक आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं।
न्यूज एजेंसी Reuters के मुताबिक, IMF ने मंगलवार को बैंकॉक में जारी अपनी ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक विकास दर 3.1% रहने का अनुमान लगाया है। जुलाई में यह अनुमान 3% था। वहीं, 2027 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के 3.4% की दर से बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
हालांकि, IMF का यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि मार्च 2027 तक होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुल जाएगा और अक्टूबर 2027 तक समुद्री व्यापार सामान्य हो जाएगा।
AI में निवेश घटा तो क्या होगा?
IMF के मुताबिक, AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। लेकिन अगर AI कंपनियां उम्मीद के मुताबिक मुनाफा और उत्पादकता नहीं बढ़ा पाईं, तो निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
IMF के एक नकारात्मक परिदृश्य के मुताबिक, AI में निवेश तेजी से घटने पर 2028 तक वैश्विक GDP अनुमानित स्तर से 1.1% नीचे रह सकती है। अमेरिका में यह गिरावट 1.8% तक हो सकती है।
AI से जुड़े सामान का वैश्विक व्यापार भी तेजी से बढ़ा है। साल 2023 से 2025 के बीच इसमें 29% की बढ़ोतरी हुई, जबकि कुल वैश्विक व्यापार केवल 8.3% बढ़ा।
ऐसे में AI निवेश में बड़ी गिरावट शेयर बाजार, कंपनियों की कमाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, IMF को इस स्थिति में भी वैश्विक मंदी आने की आशंका नहीं है।
मिडिल ईस्ट युद्ध और बढ़ता कर्ज क्यों बने खतरा?
IMF ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ता है और 2027 की पहली तिमाही तक कच्चे तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो अगले साल वैश्विक विकास दर अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक कम हो सकती है।
महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और कंपनियों की लागत में इजाफा कर सकता है।
इसके अलावा कई देशों पर बढ़ता सरकारी कर्ज भी चिंता का विषय है। ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से सरकारों को कर्ज चुकाने पर ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है।
IMF ने सरकारों से अपने खर्च और उधारी को नियंत्रित करने की अपील की है। संस्था ने AI से जुड़े साइबर सुरक्षा जोखिमों पर भी चिंता जताई है।
IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती को हमेशा के लिए सुनिश्चित नहीं मानना चाहिए। इसे बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं।