IDBI Bank की बिक्री को लेकर कर्मचारियों में चिंता, नौकरी और पेंशन के भविष्य पर सरकार ने दिया बयान

IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच चिंता बढ़ गई है। बैंक यूनियनें सरकार के फैसले का विरोध कर रही हैं। इस बीच DIPAM सेक्रेटरी अरुणीश चावला ने नौकरी और पेंशन को लेकर अहम बयान दिया है। जानिए सरकार ने क्या भरोसा दिया और आगे क्या होगा।

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In Short

  • IDBI बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री को लेकर कर्मचारियों और बैंक यूनियनों का विरोध तेज।
  • DIPAM सेक्रेटरी अरुणीश चावला ने कर्मचारियों की सेवा शर्तें और पेंशन लाभ सुरक्षित रहने का भरोसा दिया।
  • सरकार का चालू वित्त वर्ष में डील पूरी करने का लक्ष्य, RBI की मंजूरी के बाद होगा शेयर खरीद समझौता।

By Gungun Mishra:

IDBI बैंक में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की योजना को लेकर कर्मचारियों और पेंशनर्स की चिंताएं बढ़ गई हैं। बैंक यूनियनें इस फैसले का लगातार विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ निजीकरण नहीं, बल्कि बैंक का विदेशीकरण भी है। इस बीच सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत देने वाला बयान दिया है। डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सेक्रेटरी अरुणीश चावला ने साफ किया है कि बैंक के मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों और पेंशनर्स के लाभों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

कर्मचारियों की नौकरी और पेंशन पर क्या बोले अरुणीश चावला?

बिजनेस टुडे को दिए इंटरव्यू में अरुणीश चावला ने कहा कि IDBI बैंक के मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तें पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। इनमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।

उन्होंने पेंशनर्स को लेकर भी भरोसा दिलाया। चावला ने कहा, 'सेवा शर्तें पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। बैंक में पेंशनर्स भी हैं। उनके पेंशन लाभ सुरक्षित रहेंगे और इसके लिए एक अलग पेंशन फंड निर्धारित किया गया है।'

हिस्सेदारी बिक्री के बाद कैसे चलेगा बैंक?

अरुणीश चावला ने बताया कि सरकार IDBI बैंक की रणनीतिक रिस्ट्रक्चरिंग एक चालू कारोबार के रूप में कर रही है। यानी हिस्सेदारी बिक्री के बाद भी बैंक का कामकाज जारी रहेगा।

बैंक बोर्ड के अधीन संचालित कंपनी बना रहेगा। कर्मचारियों से बातचीत और उनके मामलों को संभालने की जिम्मेदारी बैंक मैनेजमेंट के पास ही रहेगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर

कब तक पूरी होगी IDBI बैंक की डील?

सरकार का लक्ष्य IDBI बैंक की रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री चालू वित्त वर्ष में पूरी करना है। हालांकि, शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर तभी होंगे, जब भारतीय रिजर्व बैंक बोली लगाने वाले खरीदार को मंजूरी देगा।

केंद्र सरकार ने बैंक में 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना को मंजूरी दी है। इस सौदे में कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स का नाम सामने आया है।

बैंक यूनियनें क्यों कर रही हैं विरोध?

IDBI बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने सरकार से इस फैसले की समीक्षा करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जनता को भरोसा दिलाया जाना चाहिए कि राष्ट्रीय संपत्ति बेहद कम कीमत पर नहीं बेची जा रही है।

वहीं, सात बैंक यूनियनों वाले यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने इसे निजीकरण के साथ विदेशीकरण का कदम बताया है। संगठन का दावा है कि वह बैंकिंग क्षेत्र के करीब 90 फीसदी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है।

काली पट्टी बांधकर विरोध करेंगे कर्मचारी

UFBU ने अपने सदस्यों से 16 अक्टूबर को काली पट्टी बांधकर काम करने की अपील की है। संगठन विदेशी निवेशक को बैंक का नियंत्रण सौंपने के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहा है। दूसरी तरफ सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स के हित सुरक्षित रखने का भरोसा दे रही है। अब सौदे की अगली प्रक्रिया RBI की मंजूरी पर निर्भर करेगी।

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