IDBI Bank में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री को हरी झंडी! Fairfax खरीदेगी 60.72% स्टेक- डिटेल्स
IDBI Bank की बिक्री को लेकर करीब पांच साल से चल रही प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। केंद्र सरकार ने Fairfax को बैंक की 60.72% हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है। DIPAM सचिव अरुणीश चावला ने बताया कि डील कब पूरी होगी और छोटे निवेशकों के हित कैसे सुरक्षित रहेंगे।

In Short
- IDBI Bank की 60.72% हिस्सेदारी Fairfax को बेचने की कैबिनेट से मंजूरी।
- RBI की मंजूरी के बाद डील मौजूदा वित्त वर्ष में पूरी होने की उम्मीद।
- LIC अपनी हिस्सेदारी 19% से घटाकर 15% करेगी, छोटे निवेशकों के हित सुरक्षित रहेंगे।
आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की बिक्री को लेकर करीब पांच साल से चल रही प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। केंद्र सरकार की कैबिनेट ने कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) को बैंक की 60.72% हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है। बिजनेस टुडे से बातचीत में निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणीश चावला ने बताया कि इस डील को पूरा करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और सरकार की विनिवेश योजना पर इसका क्या असर होगा।
कब तक पूरी होगी IDBI Bank की बिक्री?
अरुणीश चावला के मुताबिक, अब सफल बोली लगाने वाली कंपनी के तकनीकी दस्तावेज भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सौंपे जाएंगे। कंपनी को अपनी योग्यता और जरूरी रेगुलेटरी शर्तों से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी।
RBI से मंजूरी मिलने के बाद शेयर खरीद समझौते (SPA) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। सरकार को उम्मीद है कि यह पूरी डील मौजूदा वित्त वर्ष खत्म होने से पहले पूरी हो जाएगी।
छोटे निवेशकों के हितों का क्या होगा?
चावला ने साफ किया कि इस डील में छोटे और रिटेल निवेशकों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। शेयर खरीद समझौता होने के बाद नए खरीदार को अल्पसंख्यक शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर लाना होगा।
इसके अलावा रेगुलेटर ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को अपनी बची हुई हिस्सेदारी 19% से घटाकर 15% करने का निर्देश दिया है। इससे अतिरिक्त 4% शेयर रिटेल निवेशकों के लिए उपलब्ध होंगे।
सरकार और LIC क्यों छोड़ेंगे बोर्ड की सीटें?
चावला ने बताया कि सरकार और LIC अब बैंक में पब्लिक शेयरधारक के तौर पर रहना चाहते हैं। इसके लिए 15% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रखी जा सकती और न ही बोर्ड में जगह ली जा सकती है।
बैंक के संचालन और समय-समय पर जरूरी पूंजी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नए प्रमोटर की होगी।
बैंक की वैल्यूएशन पर क्या कहा?
IDBI Bank की कीमत को लेकर उठ रहे सवालों पर चावला ने बताया कि वैल्यूएशन दो स्वतंत्र तरीकों से किया गया था। इनमें मार्केट मल्टीपल और एसेट वैल्यूएशन शामिल हैं।
दोनों के औसत से बेंचमार्क कीमत तय की गई। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाले अधिकारियों के समूह ने पाया कि विजेता बोली बेंचमार्क और दोनों स्वतंत्र वैल्यूएशन से अधिक थी।
क्या आगे भी जारी रहेगा विनिवेश?
चावला ने कहा कि सरकारी कंपनियों के रणनीतिक पुनर्गठन की प्रक्रिया जारी रहेगी और मौजूदा विनिवेश योजनाओं को पूरा किया जाएगा।
उन्होंने IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री को अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक सौदा और सबसे बड़ी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) डील बताया।
हालांकि, भविष्य में दूसरे बैंकों के निजीकरण को लेकर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। उनका कहना था कि यह विषय दूसरे विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है।