सैलरी से ज्यादा क्रेडिट लिमिट कैसे मिल जाती है? आखिर बैंक किस आधार पर लेते हैं फैसला
कई बार लोगों को अपनी सैलरी से ज्यादा क्रेडिट कार्ड लिमिट मिल जाती है। इसके पीछे सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि क्रेडिट स्कोर, पुराने भुगतान का रिकॉर्ड और बैंक के साथ संबंध जैसी कई चीजें काम करती हैं। जानिए कैसे तय होती है आपकी क्रेडिट लिमिट और क्यों बैंक बढ़ाते हैं इसे।

In Short
- क्रेडिट कार्ड लिमिट तय करने में सिर्फ सैलरी नहीं, क्रेडिट स्कोर और भुगतान रिकॉर्ड भी देखा जाता है।
- अच्छा क्रेडिट रिकॉर्ड रखने वाले ग्राहकों को बैंक ज्यादा लिमिट देने की संभावना रखते हैं।
- ज्यादा क्रेडिट लिमिट का मतलब ज्यादा पैसा नहीं, बल्कि उधार लेने की सुविधा होती है।
Credit Card Limit: कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति की महीने की सैलरी कम होती है, लेकिन उसके क्रेडिट कार्ड की लिमिट लाखों रुपये तक होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनियां कम कमाई वाले लोगों को भी ज्यादा खर्च करने की सुविधा क्यों देती हैं? इसकी वजह सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि कई दूसरी चीजें होती हैं।
सिर्फ सैलरी से तय नहीं होती क्रेडिट लिमिट
क्रेडिट कार्ड की लिमिट तय करते समय बैंक केवल आपकी सैलरी नहीं देखते। बैंक आपकी पूरी आर्थिक स्थिति को समझने की कोशिश करते हैं।
इसके लिए आपकी क्रेडिट हिस्ट्री, क्रेडिट स्कोर, पुराने लोन का रिकॉर्ड, समय पर भुगतान करने की आदत और बैंक के साथ आपका रिश्ता भी देखा जाता है।
अगर किसी व्यक्ति ने पहले लिए गए लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर किया है और उसका क्रेडिट स्कोर अच्छा है, तो बैंक उसे ज्यादा लिमिट देने में भरोसा दिखा सकते हैं।
क्रेडिट स्कोर का होता है बड़ा असर
क्रेडिट स्कोर किसी व्यक्ति की पैसे चुकाने की आदत को दिखाता है। भारत में आमतौर पर 300 से 900 के बीच क्रेडिट स्कोर होता है।
जिन लोगों का स्कोर अच्छा होता है, उन्हें बैंक कम जोखिम वाला ग्राहक मानते हैं। ऐसे ग्राहकों को ज्यादा क्रेडिट लिमिट, लोन या नए कार्ड की सुविधा मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
वहीं, जिन लोगों का भुगतान रिकॉर्ड खराब होता है, उनकी लिमिट कम रखी जा सकती है या आवेदन भी अस्वीकार हो सकता है।
खर्च करने की आदत और भुगतान रिकॉर्ड भी देखा जाता है
बैंक यह भी देखते हैं कि ग्राहक अपने मौजूदा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कैसे करता है। अगर कोई व्यक्ति कार्ड का इस्तेमाल करता है और समय पर पूरा भुगतान कर देता है, तो बैंक उसकी लिमिट बढ़ाने का ऑफर दे सकते हैं।
इसके अलावा बैंक ग्राहक की कुल कमाई, नौकरी की स्थिरता, कंपनी की जानकारी और पहले से चल रहे कर्ज को भी ध्यान में रखते हैं।
ज्यादा लिमिट मिलने का मतलब ज्यादा खर्च नहीं
क्रेडिट कार्ड पर ज्यादा लिमिट मिलना हमेशा ज्यादा खर्च करने का संकेत नहीं होता। बैंक यह सुविधा इसलिए देते हैं ताकि ग्राहक जरूरत के समय ज्यादा रकम का इस्तेमाल कर सके और लंबे समय तक उनके साथ जुड़ा रहे।
हालांकि, ज्यादा लिमिट का इस्तेमाल सोच-समझकर करना जरूरी है। क्रेडिट कार्ड से खर्च की गई रकम समय पर वापस नहीं करने पर ब्याज और अन्य चार्ज बढ़ सकते हैं।
इसलिए क्रेडिट लिमिट को अपनी अतिरिक्त कमाई न समझें, बल्कि इसे एक उधार की सुविधा की तरह इस्तेमाल करें।