Copper की बढ़ती मांग के बीच Hindustan Copper का बड़ा प्लान, Chile की 4 खदानों पर नजर, Adani-Hindalco को सप्लाई
भारत में कॉपर की डिमांड तेजी से बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इंपोर्ट पर निर्भरता और बढ़ सकती है। इसी बीच Hindustan Copper ने विदेश में बड़ा दांव लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। चिली में चार माइनिंग ब्लॉक को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन आगे क्या होगा?

In Short
- Hindustan Copper की चिली में चार कॉपर माइनिंग ब्लॉक हासिल करने पर बातचीत चल रही है।
- चिली से मिलने वाला कॉपर कंसंट्रेट Hindalco Industries और Adani को सप्लाई किया जा सकता है।
- साल 2047 तक भारत को 91% से 97% कॉपर कंसंट्रेट इंपोर्ट करना पड़ सकता है।
भारत में कॉपर की तेजी से बढ़ती जरूरत के बीच सरकारी कंपनी हिंदुस्तान कॉपर विदेश में अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी की नजर चिली की कॉपर खदानों पर है और वहां से मिलने वाला कॉपर कंसंट्रेट भारत की बड़ी कंपनियों को सप्लाई करने की योजना है। इस पूरे प्लान में माइनिंग ब्लॉक हासिल करने से लेकर जॉइंट वेंचर और भारतीय कंपनियों को सप्लाई तक कई अहम पहलुओं पर काम चल रहा है।
कोडेल्को से 4 कॉपर माइनिंग ब्लॉक पर बातचीत
रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान कॉपर चिली की माइनिंग दिग्गज कोडेल्को से माइनिंग ब्लॉक हासिल करने की कोशिश कर रही है। भारत के माइन्स सेक्रेटरी ने अप्रैल में बताया था कि हिंदुस्तान कॉपर, कोल इंडिया और एनटीपीसी माइनिंग मिलकर कोडेल्को से चार कॉपर माइनिंग ब्लॉक हासिल करने की संभावना पर बातचीत कर रहे हैं।
अदाणी और हिंडाल्को को मिल सकता है कॉपर कंसंट्रेट
हिंदुस्तान कॉपर की योजना है कि चिली में जिन खदानों को हासिल किया जाएगा, वहां से निकलने वाला कॉपर कंसंट्रेट भारत में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और अदाणी जैसी कंपनियों को बेचा जाए। इससे इन कंपनियों को घरेलू स्तर पर कॉपर की जरूरत पूरी करने के लिए विदेश से सप्लाई का एक नया सोर्स मिल सकता है।
जॉइंट वेंचर की संभावना पर भी चर्चा
तीन सूत्रों के मुताबिक, हिंदुस्तान कॉपर और कोडेल्को के बीच कॉपर माइनिंग और बिक्री के लिए संभावित जॉइंट वेंचर को लेकर भी चर्चा चल रही है। हालांकि, कंपनी इससे पहले कोडेल्को के साथ जॉइंट वेंचर पर बातचीत की खबर से इनकार कर चुकी है। हिंदुस्तान कॉपर इस प्रस्तावित जॉइंट वेंचर में कोल इंडिया और एनटीपीसी माइनिंग जैसे पार्टनर्स को शामिल करने के लिए भी तैयार है।
ड्यू डिलिजेंस जारी, पिछले साल हुआ था शुरुआती एग्रीमेंट
हिंदुस्तान कॉपर ने पिछले साल कोडेल्को के साथ एक्सप्लोरेशन और माइनिंग में मिलकर अवसर तलाशने के लिए एक शुरुआती एग्रीमेंट साइन किया था। मई में दोनों के बीच नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट हुआ और संभावित डील के लिए एक एडवाइजर भी नियुक्त किया गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल ड्यू डिलिजेंस की प्रक्रिया चल रही है।
भारतीय टीम कर चुकी है चिली का दौरा
सूत्रों के मुताबिक, हिंदुस्तान कॉपर की एक टेक्निकल टीम ने कोल इंडिया और एनटीपीसी माइनिंग के अधिकारियों के साथ इस साल की शुरुआत में चिली का दौरा किया था। हालांकि, अगर डील आगे बढ़ती भी है तो वहां माइनिंग ऑपरेशन शुरू होने और कॉपर कंसंट्रेट का प्रोडक्शन आने में करीब एक दशक लग सकता है।
भारत में कॉपर की सप्लाई का बड़ा गैप
भारत दुनिया में रिफाइंड कॉपर का दूसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर है। सरकार के मुताबिक, साल 2047 तक देश को अपनी जरूरत का करीब 91% से 97% कॉपर कंसंट्रेट इंपोर्ट करना पड़ सकता है। फिलहाल भारत में सालाना करीब 5,73,000 मीट्रिक टन रिफाइंड कॉपर का प्रोडक्शन होता है, जबकि डिमांड करीब 18 लाख टन है।
हिंडाल्को और अदाणी हैं बड़े कॉपर प्लेयर्स
हिंडाल्को भारत की बड़ी एल्युमिनियम और कॉपर प्रोड्यूसर कंपनियों में शामिल है। वहीं अदाणी गुजरात में 1.2 अरब डॉलर का कच्छ कॉपर स्मेल्टर ऑपरेट करती है। कंपनी इसे अपनी तरह का दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन प्लांट बताती है।