आसान नहीं होगी HDFC Bank के नए सीईओ की राह...ग्रोथ, डिपॉजिट और गवर्नेंस समेत इन मोर्चों पर होगी परीक्षा
HDFC Bank के CEO शशिधर जगदीशन ने तीसरी बार पद पर बने रहने से इनकार कर दिया है। उनका कार्यकाल 26 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। अब बैंक नए CEO की तलाश में जुटा है। इस बीच निवेशकों और RBI की नजर उत्तराधिकारी के चयन पर बनी हुई है।

In Short
- HDFC Bank के CEO शशिधर जगदीशन ने तीसरी बार पद पर बने रहने के लिए दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया।
- बैंक अब नए MD और CEO की तलाश में है, जिसमें डिप्टी MD कैजाद भरूचा का नाम संभावित उम्मीदवारों में शामिल है।
- नए CEO के सामने ग्रोथ बढ़ाने, डिपॉजिट मजबूत करने और गवर्नेंस से जुड़े भरोसे को वापस लाने की चुनौती होगी।
HDFC Bank के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO शशिधर जगदीशन ने तीसरी बार अपने पद पर दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक कई गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों का सामना कर रहा है। अब बैंक के सामने जल्द से जल्द नए CEO की तलाश की चुनौती है।
अक्टूबर में खत्म हो रहा है जगदीशन का कार्यकाल
शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। उनके दोबारा नियुक्ति नहीं लेने के फैसले ने एनालिस्ट्स को भी हैरान किया है क्योंकि यह घोषणा कार्यकाल खत्म होने से करीब दो महीने पहले हुई है।
नोमुरा के रिसर्च एनालिस्ट अंकित बिहानी के मुताबिक, इतनी देर से फैसला आना और दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का निर्णय दोनों ही चौंकाने वाले हैं। अब बैंक को नए उत्तराधिकारी की तलाश करनी होगी और इस प्रक्रिया पर RBI और निवेशकों की नजर रहेगी।
HDFC Bank के सामने बढ़ी चुनौतियां
HDFC Bank के लिए यह बदलाव ऐसे समय आया है जब बैंक को कई गवर्नेंस से जुड़े मामलों का सामना करना पड़ा है। इनमें दुबई शाखा में कुछ कर्मचारियों द्वारा गलत बिक्री और एक राज्य सरकार इकाई को ज्यादा ब्याज देने के लिए मार्केटिंग खर्च के तौर पर रकम दिखाने जैसे मामले शामिल हैं।
वहीं साल 2026 में बैंक के शेयर प्रदर्शन पर भी दबाव रहा है। HDFC Bank का शेयर साल की शुरुआत से करीब 27 फीसदी नीचे आया है, जबकि ICICI Bank और SBI के शेयरों में इस दौरान बढ़त देखने को मिली है।
कौन बन सकता है अगला CEO?
बैंक नए CEO के लिए आंतरिक और बाहरी दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा है। RBI की मंजूरी के लिए बैंक को संभावित उम्मीदवारों की सूची देनी होगी।
आंतरिक विकल्पों में डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। भरूचा 1995 से HDFC Bank के साथ जुड़े हैं और 2014 से बोर्ड का हिस्सा हैं। उन्होंने बैंक के क्रेडिट और रिस्क फ्रेमवर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
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हालांकि प्राइवेट बैंकों में होल टाइम डायरेक्टर के कार्यकाल की सीमा 15 साल है। भरूचा 2029 में इस सीमा तक पहुंच जाएंगे। ऐसे में बैंक उनके नाम पर लंबे समय के लिए फैसला करेगा या किसी दूसरे उम्मीदवार को चुनेगा, यह देखने वाली बात होगी।
नए CEO के सामने होंगी बड़ी जिम्मेदारियां
एनालिस्ट्स का मानना है कि नए CEO के सामने सिर्फ नेतृत्व बदलाव की चुनौती नहीं होगी, बल्कि बैंक की ग्रोथ, डिपॉजिट बढ़ाने, मर्जर से मिलने वाले फायदे और गवर्नेंस पर भरोसा मजबूत करने जैसी जिम्मेदारियां भी होंगी।
शशिधर जगदीशन के कार्यकाल में HDFC Limited का HDFC Bank में विलय हुआ था। हालांकि मर्जर के बाद कुछ चुनौतियां भी सामने आईं। बैंक के लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो, नेट इंटरेस्ट मार्जिन और बैलेंस शीट स्ट्रक्चर को लेकर सवाल उठे।
विशेषज्ञों के मुताबिक नया CEO बैंक की रणनीति में बदलाव कर सकता है और मुनाफे वाली ग्रोथ के लिए बैलेंस शीट को मजबूत करने पर ध्यान दे सकता है।