GST भरने वाले कारोबारियों के लिए बड़ी राहत! नोटिस से लेकर रिफंड तक बदलेंगे कई नियम, जानें पूरी डिटेल
GST काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों के लिए कई अहम बदलावों को मंजूरी दी गई है। अब GST रजिस्ट्रेशन से लेकर रिटर्न भरने और रिफंड पाने तक की प्रक्रिया आसान बनाने की तैयारी है। छोटे मामलों में नोटिस से राहत मिलेगी और टैक्स क्रेडिट से जुड़े नियम भी बदलेंगे। जानिए इन फैसलों से कारोबारियों को क्या फायदा होगा और कब से लागू होंगे बदलाव।

In Short
- GST काउंसिल ने ₹10,000 से कम रकम वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं करने का प्रस्ताव रखा है।
- GST रिफंड आवेदन की रसीद देने की समयसीमा 15 से घटाकर 10 दिन करने का फैसला किया गया है।
- रजिस्ट्रेशन में बदलाव, पुराने रिटर्न की गलतियां सुधारने और इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया आसान होगी।
GST को लेकर कारोबारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अब सरकार का ध्यान सिर्फ टैक्स की दरों पर नहीं, बल्कि GST से जुड़े कामों को आसान बनाने पर भी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई 57वीं GST काउंसिल की बैठक में कई अहम बदलावों को मंजूरी दी गई है। इनका मकसद GST रजिस्ट्रेशन, रिटर्न भरने, इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने और रिफंड पाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
छोटे मामलों में नहीं आएगा GST नोटिस
GST काउंसिल ने नोटिस और कानूनी मामलों के लिए एक जैसी प्रक्रिया बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत नोटिस कैसे भेजा जाएगा, सुनवाई कैसे होगी और अंतिम आदेश कैसे लिखा जाएगा, इसके लिए समान नियम होंगे। खास बात यह है कि ₹10,000 से कम रकम वाले मामलों में GST नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। इससे छोटे कारोबारियों को राहत मिल सकती है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट पर क्या बदलेगा?
इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC वह सुविधा है, जिसके जरिए कारोबारी खरीदारी पर चुकाए गए GST को अपनी टैक्स देनदारी में एडजस्ट कर सकते हैं। काउंसिल ने एक कमेटी को यह जांचने की जिम्मेदारी दी है कि सही बिल होने, सामान मिलने और सप्लायर को पूरा भुगतान करने के बावजूद खरीदार का ITC कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। कमेटी तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए खरीदे गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर भी ITC देने के बदलाव को मंजूरी मिली है।
कुछ सेवाओं पर दो बार टैक्स का बोझ नहीं
नई व्यवस्था में एक ही तरह की सेवा खरीदकर आगे बेचने पर टैक्स क्रेडिट की सुविधा मिलेगी। इसमें एजेंट के जरिए बुक किए गए ₹7,500 तक के होटल कमरे, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और यात्री परिवहन जैसी सेवाएं शामिल हैं। इससे एक ही सेवा पर बार-बार टैक्स का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
GST रजिस्ट्रेशन होगा आसान
अभी कम जोखिम वाले आवेदकों को ऑटोमैटिक सिस्टम से तीन कामकाजी दिनों में GST रजिस्ट्रेशन मिल जाता है। करीब 61% रजिस्ट्रेशन इसी तरीके से होते हैं। अब आवेदन फॉर्म को भी आसान बनाया जाएगा, ताकि कारोबारियों को सिर्फ जरूरी जानकारी भरनी पड़े। इसके अलावा व्यापार का नाम, डायरेक्टर, पार्टनर या कारोबार के अतिरिक्त पते में बदलाव जैसे मामलों को अपने आप मंजूरी देने की व्यवस्था होगी।
कारोबार बंद करने की प्रक्रिया भी होगी आसान
अगर कोई कारोबारी अपना बिजनेस बंद करता है, तो GST रजिस्ट्रेशन रद्द कराने की प्रक्रिया भी आसान बनाई जाएगी। शुरुआत छोटे कारोबारियों से होगी। अंतिम GST रिटर्न को अलग से भरने के बजाय रजिस्ट्रेशन बंद करने के आवेदन में ही शामिल किया जाएगा। अगर रिटर्न या बैंक डिटेल न देने के कारण रजिस्ट्रेशन बंद हुआ है, तो जरूरी जानकारी देने के बाद सिस्टम उसे दोबारा चालू कर सकेगा।
रिटर्न में गलती पर कम आएंगे नोटिस
अभी GST रिटर्न में अंतर होने पर हर साल करीब 95,000 नोटिस जारी होते हैं। इनमें से ज्यादातर मामले जानकारी भरने में हुई गलतियों से जुड़े होते हैं। नई व्यवस्था में कारोबारियों को पुराने रिटर्न की गलतियां सुधारने की सुविधा मिलेगी। अगर खरीदार का GST नंबर गलत दर्ज हो गया है, तो उसे भी ठीक किया जा सकेगा।
GST रिफंड कितनी जल्दी मिलेगा?
GST रिफंड की प्रक्रिया को तेज करने के लिए भी बदलाव किए गए हैं। अभी रिफंड आवेदन की रसीद देने में 15 दिन तक लग सकते हैं। इसे घटाकर 10 दिन किया जाएगा। अगर 10 दिनों में रसीद या कमी बताने वाला नोटिस नहीं आता, तो आवेदन को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा। जोखिम की जांच के आधार पर सिस्टम खुद 90% रिफंड मंजूर कर सकेगा। इसके लिए आदेश तीन कामकाजी दिनों में जारी किया जाएगा, जबकि अभी सात दिन लगते हैं।
मशीनरी पर चुकाए गए GST का भी मिलेगा रिफंड
नई व्यवस्था में कुछ कारोबारियों को मशीनरी और सेवाओं पर चुकाए गए GST का रिफंड भी मिल सकेगा। इनपुट सेवाओं से जुड़े बदलाव 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए टैक्स क्रेडिट पर लागू होंगे। वहीं प्लांट और मशीनरी से जुड़े बदलाव 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट पर लागू होंगे। मशीनरी पर रिफंड की गणना हर महीने कुल क्रेडिट के 60वें हिस्से के आधार पर होगी। इससे खासकर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, GST काउंसिल का जोर अब टैक्स से जुड़े कामों में लगने वाला समय कम करने, गलतियों को आसानी से सुधारने और कारोबारियों को जल्दी रिफंड दिलाने पर है।