छोटे कारोबारियों के लिए GST बना महंगा सौदा! जानें नई रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

छोटे कारोबारियों के लिए GST के नियमों का पालन करना महंगा साबित हो रहा है। एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि टैक्स से जुड़ी औपचारिकताओं पर कारोबारियों की कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा है। इस बीच GST काउंसिल की बैठक होने वाली है। क्या छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी?

Advertisement
AI Generated Image

In Short

  • छोटे कारोबारियों पर GST नियमों के पालन का भारी बोझ, सालाना टर्नओवर का 13.90% तक हो रहा खर्च।
  • स्टडी के मुताबिक, सर्वे में शामिल सिर्फ 2.41% कारोबारी ही GST या VAT के तहत रजिस्टर्ड हैं।
  • GST काउंसिल की 7 अक्टूबर को बैठक, रजिस्ट्रेशन और रिटर्न फाइलिंग आसान बनाने पर हो सकती है चर्चा।

By Sonam:

देश में छोटे कारोबारियों के लिए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के नियमों का पालन करना काफी महंगा साबित हो रहा है। एक नई स्टडी में सामने आया है कि छोटे और गैर-कंपनी कारोबारियों को जीएसटी से जुड़े नियमों को पूरा करने में अपने सालाना टर्नओवर का 13.90% तक खर्च करना पड़ रहा है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब जीएसटी काउंसिल 7 अक्टूबर को नियमों को आसान बनाने पर चर्चा करने वाली है।

छोटे कारोबारियों पर कितना पड़ रहा बोझ?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) के सच्चिदानंद मुखर्जी और शिवानी बडोला ने यह स्टडी तैयार की है।

यह विश्लेषण नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) के एनुअल सर्वे ऑफ अनइनकॉर्पोरेटेड सेक्टर एंटरप्राइजेज (ASUSE) 2022-23 के आंकड़ों पर आधारित है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन कारोबारियों को जीएसटी से जुड़े नियमों का पालन करने में सालाना टर्नओवर का 3.28% से 13.90% तक खर्च करना पड़ता है।

वहीं, औसत सालाना ऑपरेटिंग खर्च के मुकाबले यह लागत 4.64% से 19.71% तक पहुंच जाती है।

किन कारोबारियों पर पड़ रहा असर?

इस स्टडी में ऐसे छोटे कारोबारों को शामिल किया गया है, जो किसी रजिस्टर्ड कंपनी के बजाय व्यक्तिगत मालिक या पार्टनरशिप के तौर पर चलाए जाते हैं।

सर्वे के मुताबिक, इसमें शामिल सिर्फ 2.41% कारोबारी ही जीएसटी या वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) के तहत रजिस्टर्ड हैं।

जीएसटी रजिस्ट्रेशन से कारोबारियों को बड़ी सप्लाई चेन से जुड़ने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फायदा लेने का मौका मिलता है। इसके बावजूद रिपोर्ट बताती है कि कारोबारी इस टैक्स व्यवस्था में रजिस्ट्रेशन कराने से बचते नजर आ रहे हैं।

GST के नियमों में कहां आ रही परेशानी?

जीएसटी लागू करने का मकसद देश की अप्रत्यक्ष टैक्स व्यवस्था को आसान बनाना था। हालांकि, स्टडी के मुताबिक, कारोबारियों को कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं।

इनमें समय-समय पर कई रिटर्न फाइल करना, इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान करना, ई-वे बिल और ई-इनवॉइसिंग के नियमों का पालन करना शामिल है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इसके अलावा कारोबारियों को अपने लेनदेन का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड भी रखना पड़ता है। इन सभी प्रक्रियाओं से नियमों के पालन की लागत बढ़ जाती है।

कम टर्नओवर वालों पर ज्यादा असर

रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर 4.9 लाख रुपये से कम है, उन पर जीएसटी नियमों के पालन की लागत का बोझ ज्यादा पड़ने की संभावना है।

इसके मुकाबले 4.9 लाख रुपये या उससे अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों पर अनुपात के हिसाब से कम बोझ पड़ता है।

इंडियन इकोनॉमिक रिव्यू में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक, ज्यादा अनुपालन लागत कारोबारियों को टैक्स व्यवस्था से जुड़ने से हतोत्साहित कर सकती है।

7 अक्टूबर को GST काउंसिल की बैठक

इन चुनौतियों के बीच जीएसटी काउंसिल 7 अक्टूबर को बैठक करने वाली है। इसमें कारोबारियों के लिए रजिस्ट्रेशन और रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया तेज और आसान बनाने पर चर्चा होने की उम्मीद है।

इसके अलावा ब्लॉक्ड इनपुट टैक्स क्रेडिट और रिफंड से जुड़े मुद्दों पर भी विचार किया जा सकता है। फिलहाल इन सुधारों को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

Read more!
Advertisement