8 साल की लड़ाई के बाद फ्लैट खरीदार को मिला पार्किंग का हक, बिल्डर को 30 दिन में देनी होगी जगह
ग्रेटर नोएडा के फ्लैट खरीदार बृजेश को 8 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार पार्किंग का हक मिल गया है। कंज्यूमर कमीशन ने बिल्डर को 30 दिन में फ्री ओपन पार्किंग देने का आदेश दिया। जानिए कैसे वादा पूरा नहीं होने पर खरीदार ने कानूनी रास्ता अपनाया।

In Short
- ग्रेटर नोएडा के फ्लैट खरीदार को 8 साल बाद मिला वादा की गई पार्किंग का अधिकार
- कंज्यूमर कमीशन ने एमआई बिल्डर्स को 30 दिन में फ्री ओपन कार पार्किंग देने का आदेश दिया
- आयोग ने वादा पूरा नहीं करने को सेवा में कमी मानते हुए बिल्डर को जिम्मेदार ठहरायाआयोग ने वादा पूरा नहीं करने को सेवा में कमी मानते हुए बिल्डर को जिम्मेदार ठहराया
ग्रेटर नोएडा के एक फ्लैट खरीदार को आखिरकार 8 साल की कानूनी लड़ाई के बाद उसका हक मिल गया है। कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने बिल्डर को आदेश दिया है कि वह खरीदार को 30 दिन के अंदर एक फ्री ओपन कार पार्किंग स्पेस उपलब्ध कराए। यह मामला फ्लैट खरीदने के बाद वादा की गई पार्किंग नहीं मिलने से जुड़ा है।
2016 में फ्लैट मिला लेकिन पार्किंग नहीं मिली
बृजेश ने ग्रेटर नोएडा के स्टेलर एमआई लेगेसी अपार्टमेंट्स में फ्लैट खरीदा था और साल 2016 में उन्हें पजेशन मिल गया था। प्रोजेक्ट के ब्रोशर और प्राइस लिस्ट में हर होमबायर को एक फ्री ओपन कार पार्किंग देने का वादा किया गया था।
लेकिन पजेशन मिलने के दो साल से ज्यादा समय बाद भी बृजेश को पार्किंग नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने बिल्डर से कई बार संपर्क किया, लेकिन समाधान नहीं निकला।
बिल्डर ने कहा सभी पार्किंग पहले ही अलॉट हो चुकी हैं
बृजेश ने 31 दिसंबर 2018 को कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 की धारा 12 के तहत एमआई बिल्डर्स एंड डेवलपर्स और स्टेलर ग्रुप के खिलाफ शिकायत दर्ज की।
उनकी शिकायत के अनुसार, 13 अप्रैल 2018 को बिल्डर ने उन्हें बताया कि सभी उपलब्ध पार्किंग पहले ही दूसरे खरीदारों को दी जा चुकी हैं और उनके लिए कोई पार्किंग उपलब्ध नहीं है।
बृजेश ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने के लिए मनाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कंज्यूमर फोरम में बताया कि सितंबर 2018 में बिल्डर की ओर से एक व्यक्ति ने कथित तौर पर पार्किंग देने की बात कही थी, लेकिन इसके लिए उन्हें लखनऊ इलेक्ट्रिसिटी ओम्बड्समैन के सामने चल रही अपील वापस लेने को कहा गया था।
कंज्यूमर कमीशन ने पहली बार 2022 में दिया था आदेश
जिला कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने 18 अगस्त 2022 को बृजेश के पक्ष में फैसला सुनाया था। कमीशन ने एमआई बिल्डर्स को 30 दिन के अंदर एक फ्री ओपन पार्किंग देने और 2 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया था।
इसके बाद बिल्डर ने इस फैसले को स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन में चुनौती दी। 4 अप्रैल 2025 को स्टेट कमीशन ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए जिला कमीशन भेज दिया, क्योंकि पिछला आदेश एक्स पार्टी यानी एकतरफा सुनवाई के आधार पर दिया गया था।
दोबारा सुनवाई में भी बिल्डर नहीं दे पाया जवाब
दोबारा सुनवाई के दौरान बिल्डर को अपना पक्ष और सबूत पेश करने का मौका दिया गया था। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक बिल्डर ऐसा करने में असफल रहा।
इसके बाद जिला कंज्यूमर कमीशन ने मामले की दोबारा सुनवाई करते हुए माना कि बिल्डर ने खरीदार से किया गया वादा पूरा नहीं किया और यह सर्विस में कमी का मामला है।
आयोग ने बिल्डर को माना जिम्मेदार
12 अगस्त 2026 को जिला कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजू शर्मा ने फैसला सुनाया कि एमआई बिल्डर्स पार्किंग उपलब्ध नहीं कराने के लिए जिम्मेदार है।
कमीशन ने कहा कि कंज्यूमर फोरम को ऐसी स्थिति में मानसिक परेशानी और नुकसान के लिए मुआवजा देने का अधिकार है। हालांकि, आयोग ने स्टेलर ग्रुप और स्टेलर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच अंतर भी बताया।
कमीशन ने कहा कि प्रोजेक्ट दस्तावेजों में स्टेलर वेंचर्स को डेवलपर बताया गया था, जबकि स्टेलर ग्रुप इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी में शामिल नहीं था। वहीं, एमआई बिल्डर्स को को-डेवलपर मानते हुए उसके खिलाफ शिकायत को सही माना गया।
फैसले के मुताबिक, वादा की गई फ्री ओपन पार्किंग नहीं देना साफ तौर पर सर्विस में कमी है और बिल्डर को अब खरीदार को पार्किंग उपलब्ध करानी होगी।