त्योहारों से पहले चीनी को लेकर सरकार का बड़ा फैसला! 15 अक्टूबर से बदल जाएगा ये नियम

त्योहारों से पहले सरकार ने चीनी की जमाखोरी और सप्लाई को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं। डीलर अब लंबे समय तक चीनी का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेंगे। नए नियम 15 अक्टूबर से लागू होंगे। जानिए स्टॉक की नई सीमा क्या है और इसका आम ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा।

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In Short

  • त्योहारों से पहले चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने स्टॉक से जुड़े नियम सख्त किए।
  • डीलरों को चीनी मिलने के 15 दिन के अंदर स्टॉक आगे बेचना होगा।
  • - सरकार की कोशिश बाजार में चीनी की सप्लाई बनाए रखने और कीमतों पर दबाव कम करने की है।

By Sonam:

त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और इससे पहले सरकार ने चीनी की जमाखोरी और सप्लाई को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब चीनी डीलर लंबे समय तक स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेंगे। सरकार ने चीनी रखने की अवधि घटाकर 15 दिन कर दी है। ज्यादातर राज्यों में डीलर एक समय पर अधिकतम 1,000 क्विंटल चीनी ही रख सकेंगे। नए नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेंगे।

15 दिन से ज्यादा नहीं रख सकेंगे स्टॉक

नए नियम के मुताबिक, डीलर को जिस दिन चीनी का स्टॉक मिलेगा, उसी दिन से 15 दिन की अवधि की गिनती शुरू हो जाएगी। यानी डीलर को इस समय के अंदर अपना स्टॉक आगे बेचना होगा। इसके साथ ही ज्यादातर राज्यों में एक समय पर अधिकतम 1,000 क्विंटल चीनी रखने की इजाजत होगी।

सरकार का मकसद सप्लाई चेन में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा होने से रोकना है, ताकि त्योहारों के दौरान बाजार में इसकी कमी न हो और कीमतों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

कोलकाता और असम को मिली छूट

हालांकि, इस नियम में कुछ इलाकों को छूट दी गई है। कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र के साथ असम में डीलर एक समय पर 2,000 क्विंटल तक चीनी रख सकेंगे। देश के बाकी हिस्सों में 1,000 क्विंटल की सीमा लागू रहेगी।

सरकार ने क्यों बदले नियम?

त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में सरकार चाहती है कि मिलों से निकलने वाली चीनी थोक कारोबारियों और दुकानदारों के जरिए तेजी से बाजार तक पहुंचे। सरकार का कहना है कि स्टॉक रखने की अवधि कम होने से जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

Image Credit : Aaj Tak

चीनी की कीमतों में आई गिरावट

सरकार के मुताबिक, चीनी की औसत खुदरा कीमत अगस्त के सबसे ऊंचे स्तर से करीब 15 फीसदी नीचे आ चुकी है। वहीं, एक्स-मिल कीमतों में करीब 28 फीसदी की गिरावट आई है। एक्स-मिल कीमतें पिछले तीन हफ्तों से स्थिर बनी हुई हैं।

सरकार चाहती है कि मिल स्तर पर कीमतों में आई कमी का फायदा आम ग्राहकों तक भी पहुंचे। इसी वजह से थोक और खुदरा कारोबारियों से कम कीमत का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने को कहा गया है।

नए क्रशिंग सीजन पर भी नजर

गन्ने की पेराई का नया सीजन 1 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। सरकार ने चीनी मिलों को अपने इलाके में गन्ने की उपलब्धता, खेती और मौसम की स्थिति को देखते हुए पेराई शुरू करने की सलाह दी है। कुछ चीनी उत्पादक इलाकों में कम और असमान बारिश के असर पर भी नजर रखी जा रही है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

घर के लिए चीनी खरीदने वाले लोगों के लिए इस फैसले का मतलब है कि सरकार त्योहारों के दौरान चीनी की सप्लाई और कीमतों पर नजर रख रही है। वहीं, चीनी के थोक या खुदरा कारोबार से जुड़े लोगों को 15 अक्टूबर से 15 दिन की अवधि और तय स्टॉक सीमा से जुड़े नए नियमों का पालन करना होगा।

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