India AI Mission: विदेशी AI पर निर्भरता घटाने की तैयारी, 12 से ज्यादा स्टार्टअप्स को मिला फंड

क्लाउड फेबल 5 पर बैन लगने के बाद भारत सरकार ने अपने देश का एआई बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिए इंडियाएआई मिशन के तहत 12 भारतीय प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इसमें भारतजेन और सर्वम एआई जैसी कंपनियों को करोड़ों का फंड मिला है।

Advertisement
इंडियाएआई मिशन के तहत, सरकार ने 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी है जिनमें आईआईटी बॉम्बे के नेतृत्व वाला भारतजेन कंसोर्टियम, सर्वम एआई और अन्य शामिल हैं।
इंडियाएआई मिशन के तहत, सरकार ने 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी है जिनमें आईआईटी बॉम्बे के नेतृत्व वाला भारतजेन कंसोर्टियम, सर्वम एआई और अन्य शामिल हैं।

In Short

  • क्लाउड फेबल 5 पर बैन से मचा हड़कंप, दुनिया भर में खुद का 'सॉवरेन एआई' बनाने की मांग तेज
  • विदेशी निर्भरता खत्म करने के लिए बड़ा कदम, इंडियाएआई मिशन के तहत 12 घरेलू प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
  • सरकारी फंडिंग में भारतजेन और सर्वम एआई सबसे आगे, खुद का भारतीय एआई टूल्स बनाने पर फोकस

By Gaurav Kumar:

हाल ही में एंथ्रोपिक कंपनी के 'क्लाउड फेबल 5' नामक मशहूर एआई पर रोक लगा दी गई है। इस बैन ने पूरी दुनिया को झटका दिया है और लोग अब सोचने लगे हैं कि विदेशी एआई ऐप्स या कंपनियों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता। इस घटना से यह साफ हो गया है कि सरकारें जब चाहें किसी भी विदेशी एआई के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा सकती हैं। यही वजह है कि अब हर देश में 'सॉवरेन एआई' यानी अपने देश का एआई सिस्टम विकसित करने की बात तेजी से उठ रही है। टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि भारत को एआई के मामले में विदेशी कंपनियों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए।

सरकार ने शुरू किया इंडियाएआई मिशन

इसी दिशा में भारत सरकार ने 10,371.92 करोड़ रुपये के बजट वाला 'इंडियाएआई मिशन' शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य देश में स्वदेशी एआई तकनीक को बढ़ावा देना है। इसके तहत सरकार ने 12 से अधिक भारतीय एआई स्टार्टअप को चुना है।

इन कंपनियों का काम ऐसे एआई टूल्स तैयार करना होगा जो कई भारतीय भाषाओं को समझ सकें, इंसानों की तरह आवाज में बातचीत कर सकें और टेक्स्ट के साथ-साथ फोटो और वीडियो पर भी काम कर सकें।

किस कंपनी को कितना फंड मिला?

सरकार ने अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के लिए अलग-अलग बजट मंजूर किया है।

सबसे बड़ा फंड भारतजेन (आईआईटी बॉम्बे ग्रुप) को मिला है। इस प्रोजेक्ट को कई भाषाओं में काम करने वाले एआई मॉडल के विकास के लिए 1,058.52 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

सर्वम एआई को 246.72 करोड़ रुपये, Zenteq को 206.49 करोड़ रुपये, ज्ञानी एआई को 177.27 करोड़ रुपये और Socket AI Labs को 177.08 करोड़ रुपये का फंड मिला है।

इसके अलावा Fractal Analytics को 137.91 करोड़ रुपये, Gan AI को 110.03 करोड़ रुपये और IntelliHealth (NeuroDx) को 49.50 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

Avatar AI को 16.10 करोड़ रुपये, Shodh AI को 9.40 करोड़ रुपये, Tech Mahindra Makers Lab को 2.66 करोड़ रुपये और GenLoop Intelligence को 2.61 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

आत्मनिर्भर एआई की ओर बढ़ता भारत

सरकार की इस पहल को भारत के लिए एक बड़े तकनीकी कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसका मकसद केवल विदेशी एआई पर निर्भरता कम करना नहीं है, बल्कि देश में अपना एआई सिस्टम और तकनीकी ढांचा तैयार करना भी है। साफ है कि भारत अब एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 

Read more!
Advertisement