सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का असर! 15 दिनों में गोल्ड की मांग 25 टन से घटकर 7.5 टन - देखें रिपोर्ट

वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की बीते मई 2026 की मंथली आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में भारत ने 84 अरब डॉलर का सोना और चांदी आयात किया। यह कुल मर्चेंडाइज इम्पोर्ट का 10.8% हिस्सा रहा। इसी बढ़ते आयात ने सरकार का ध्यान खींचा और ड्यूटी ढांचे में बदलाव किया गया।

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By Gaurav Kumar:

हाल ही में भारत सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर प्रभावी ड्यूटी बढ़ाकर करीब 15% कर दी थी जिसका मकसद गैर-जरूरी आयात को कम करना और बढ़ते बुलियन इम्पोर्ट से पड़ रहे दबाव को संभालना था। यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब ऊंची कीमतों के बावजूद देश में सोने-चांदी की खरीद तेज बनी हुई है।

वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की बीते मई 2026 की मंथली आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में भारत ने 84 अरब डॉलर का सोना और चांदी आयात किया। यह कुल मर्चेंडाइज इम्पोर्ट का 10.8% हिस्सा रहा। इसी बढ़ते आयात ने सरकार का ध्यान खींचा और ड्यूटी ढांचे में बदलाव किया गया।

मांग में गिरावट के संकेत

उद्योग संगठन इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के शुरुआती अनुमान बताते हैं कि ड्यूटी बढ़ने का असर मांग पर दिखने लगा है। 27 मई तक खत्म हुए 15 दिनों में देश में सोने की मांग घटकर करीब 7.5 टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 25 टन थी।

क्या बदला है?

नई व्यवस्था के तहत सरकार ने सोना, चांदी और प्लैटिनम पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 5% से बढ़ाकर 10% कर दी है। साथ ही एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) भी बढ़ाया गया है। इसके बाद सोने और चांदी पर कुल प्रभावी आयात शुल्क करीब 15% पहुंच गया है। नई दरें 13 मई 2026 से लागू हो चुकी हैं।

सरकार ने चांदी के आयात नियम भी सख्त किए हैं। कुछ खास HS कोड के तहत आने वाली सिल्वर इम्पोर्ट कैटेगरी को ‘फ्री’ से ‘रिस्ट्रिक्टेड’ में डाल दिया गया है।

आयात में तेज उछाल

आर्थिक समीक्षा के मुताबिक अप्रैल 2026 में गोल्ड इम्पोर्ट सालाना आधार पर 81.7% बढ़ा, जबकि सिल्वर इम्पोर्ट में 157.2% की भारी छलांग दर्ज हुई। रिपोर्ट ने इसकी वजह सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों को बताया। इस दौरान सोने की कीमतें 46.7% और चांदी की कीमतें 135.4% तक बढ़ीं।

बढ़ते बुलियन आयात का असर देश के कुल इम्पोर्ट बिल पर भी दिखा। अप्रैल 2026 में भारत का मर्चेंडाइज इम्पोर्ट 10% बढ़ा और व्यापार घाटा बढ़कर 28.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक साल पहले 27.1 अरब डॉलर था।

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