भारी गिरावट के बाद सोने-चांदी में उछाल, क्या खरीदारी का मौका है या अभी और टूटेंगे भाव? जानें एक्सपर्ट की राय
पिछले हफ्ते भारी गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में रिकवरी देखने को मिल रही है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता चिंता बढ़ा रही है।

पिछले हफ्ते भारी गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में अब कुछ सुधार देखने को मिल रहा है। लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर और ब्याज दरों में कटौती को लेकर अनिश्चितता के बीच सवाल यह है कि क्या यह रिकवरी आगे भी जारी रहेगी या कीमतों में फिर गिरावट आएगी?
सोने-चांदी की कीमतों में कितना बदलाव?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स 0.36% की बढ़त के साथ 4,022 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स भी 0.36% बढ़कर 54 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
घरेलू बाजार में MCX पर दिसंबर गोल्ड 0.20% की बढ़त के साथ ₹1,42,304 प्रति 10 ग्राम पर था। दूसरी ओर, दिसंबर सिल्वर ₹1,95,691 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था, जिसमें 0.01% की मामूली गिरावट थी।
सोने-चांदी पर दबाव क्यों?
यह रिकवरी पिछले हफ्ते की भारी गिरावट के बाद आई है। सोने की कीमतों में पिछले हफ्ते 4.1% की गिरावट दर्ज की गई, जो चार महीने से ज्यादा समय में इसकी सबसे बड़ी वीकली गिरावट थी। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से भी नीचे फिसल गया था।
कीमतों पर दबाव की एक बड़ी वजह कच्चे तेल का महंगा होना है। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पिछले हफ्ते ब्रेंट क्रूड 6.2% चढ़ा। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों और बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर ने भी सोने पर दबाव बढ़ाया है। सोना ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची यील्ड वाले निवेश विकल्प निवेशकों को ज्यादा आकर्षित कर सकते हैं।
फेड की बैठक और महंगाई के आंकड़ों पर नजर
निवेशकों की नजर 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। इसके अलावा, 29 अक्टूबर को आने वाले अमेरिका के PCE महंगाई के आंकड़े भी अहम होंगे। इनसे दिसंबर में ब्याज दरों को लेकर फेड के अगले कदम का संकेत मिल सकता है।
सोने का आउटलुक: किन स्तरों पर रखें नजर?
SS WealthStreet की फाउंडर सुगंधा सचदेवा के मुताबिक, सोने और चांदी का कुल मिलाकर आउटलुक कमजोर बना हुआ है। हालांकि, हालिया गिरावट के बाद कुछ समय के लिए कीमतों में रिकवरी आ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के लिए 3,950 डॉलर का स्तर अहम सपोर्ट है, जबकि 4,220 डॉलर पर रेजिस्टेंस है। MCX पर सोने को ₹1,40,000 से ₹1,41,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में सपोर्ट मिल सकता है। अगर कीमत ₹1,40,000 से नीचे टिकती है, तो यह ₹1,37,000 और फिर बिकवाली बढ़ने पर ₹1,27,000 तक फिसल सकती है। ऊपर की तरफ ₹1,45,000 और ₹1,48,800 अहम रेजिस्टेंस हैं।
चांदी का आउटलुक: कितनी गिरावट संभव?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के लिए 52 डॉलर का स्तर अहम सपोर्ट है, जबकि 62.50 डॉलर पर रेजिस्टेंस है। MCX पर ₹1,93,000 प्रति किलोग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट है। अगर कीमत इसके नीचे फिसलती है, तो चांदी ₹1,80,000 और फिर ₹1,73,000 तक गिर सकती है। वहीं, ऊपर की तरफ ₹2,08,000 अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है।
क्या कीमतों में रिकवरी टिक पाएगी?
हालिया गिरावट के बाद सोने-चांदी में कुछ और तेजी आ सकती है, लेकिन यह कितनी टिकाऊ होगी, यह कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी डॉलर, महंगाई के आंकड़ों और फेड के फैसलों पर निर्भर करेगा।