पॉडकास्ट मार्केट की बूमिंग ग्रोथ...भारत तीसरा बड़ा बाजार, जानिए मनोरंजन से आगे बढ़कर कैसे बन रहा ये बड़ा बिजनेस

स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट के दौर में पॉडकास्ट अब सिर्फ ऑडियो मनोरंजन नहीं रह गया है। भारत में करोड़ों लोग बिजनेस, फाइनेंस, करियर और पर्सनल ग्रोथ जैसे विषयों पर कंटेंट सुन और देख रहे हैं। वीडियो पॉडकास्ट और नए मोनेटाइजेशन मॉडल ने इसे तेजी से बढ़ते बिजनेस में बदल दिया है।

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In Short

  • भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉडकास्ट बाजार
  • 9.5 करोड़ से ज्यादा एक्टिव मंथली लिसनर्स
  • ऑडियो से वीडियो तक, पॉडकास्ट बन रहा बड़ा बिजनेस

By Pratishtha Dutt Sharma:

India Podcast Market: स्मार्टफोन, सस्ता इंटरनेट और बदलती डिजिटल आदतों ने मनोरंजन और जानकारी हासिल करने के तरीके को बदल दिया है। जहां एक समय डिजिटल कंटेंट का मतलब मुख्य रूप से स्क्रीन देखना था, वहीं अब लोग ऐसे कंटेंट की ओर भी बढ़ रहे हैं, जिसे वे ट्रैवल, काम, पढ़ाई, एक्सरसाइज या घर के काम के दौरान सुन सकें। इसी बदलाव ने पॉडकास्ट को एक Niche कंटेंट फॉर्मेट से निकालकर तेजी से बढ़ते मीडिया बिजनेस में बदल दिया है।

आज पॉडकास्ट केवल सेलिब्रिटी इंटरव्यू या न्यूज़ तक सीमित नहीं है। बिजनेस, स्टार्टअप, पर्सनल फाइनेंस, करियर, नेतृत्व, टेक्नोलॉजी और पर्सनल ग्रोथ जैसे विषयों में भी श्रोताओं की मजबूत रुचि बन रही है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पॉडकास्ट अब केवल ऑडियो तक सीमित नहीं रहा। एक ही बातचीत को वीडियो, Shorts, Reels और सोशल मीडिया क्लिप्स में बदलकर क्रिएटर्स और ब्रांड्स अपनी पहुंच कई गुना बढ़ा रहे हैं।

ग्लोबल बाजार में तेजी

Grand View Research के अनुसार, ग्लोबल पॉडकास्टिंग मार्केट का आकार 2024 में लगभग $30.7 बिलियन था। यदि $1 को ₹95.53 माना जाए, तो यह करीब ₹2.93 लाख करोड़ बैठता है। उत्तरी अमेरिका 2024 में सबसे बड़ा बाजार था, जबकि एशिया-प्रशांत सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र होने का अनुमान है। 

इस ग्रोथ के पीछे सिर्फ विज्ञापन नहीं हैं। इंटरव्यू, बातचीत वाले कार्यक्रम, प्रीमियम कंटेंट, सब्सक्रिप्शन, ब्रांडेड शो और क्रिएटर-केंद्रित कम्युनिटी जैसे विकल्प पॉडकास्ट को कई स्तरों वाला बिजनेस बना रहे हैं।

चीन का दबदबा: पेवॉल और सब्सक्रिप्शन मॉडल की मिसाल

एशिया में पॉडकास्ट इकोनॉमी को समझने के लिए चीन के मॉडल को देखना दिलचस्प है। जहां पश्चिमी देशों में पॉडकास्ट मुख्य रूप से विज्ञापनों के भरोसे चलते हैं, वहीं चीन ने 'ऑडियो नॉलेज' और 'पेवॉल' मॉडल के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

चीन दुनिया के सबसे बड़े ऑडियो बाजारों में शामिल है, जहां श्रोता अपनी पसंद के ज्ञानवर्धक और एजुकेशनल ऑडियो कंटेंट के लिए सीधे भुगतान करते हैं। इस मॉडल ने चीनी पॉडकास्ट मार्केट को न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि क्रिएटर्स के लिए मोनेटाइजेशन के नए रास्ते भी खोले हैं।

भारत में पॉडकास्ट की क्रांति: 95 मिलियन श्रोताओं के साथ बना तीसरा बड़ा प्लेयर

भारतीय संदर्भ में देखें तो यहां की तस्वीर बेहद शानदार और उम्मीदों से भरी हुई है। IMARC Group और Astute Analytica की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत का पॉडकास्ट मार्केट करीब $1.08 बिलियन (लगभग ₹9,000 करोड़) के स्तर पर पहुंच चुका है।

अमेरिका और चीन के बाद भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉडकास्ट लिसनर बेस बन चुका है। 95 मिलियन से अधिक एक्टिव मंथली लिसनर्स के साथ, भारतीय बाजार अगले दशक में 27.10% की वार्षिक वृद्धि दर से आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

इन आंकड़ों में अंतर एक अहम बात दिखाता है। भारत का पॉडकास्ट बाजार अभी किसी एक प्लेटफॉर्म या एक तय मापदंड तक सीमित नहीं है। यहां ऑडियो पॉडकास्ट, वीडियो पॉडकास्ट, YouTube इंटरव्यू और ऑडियो सीरीज के बीच का फर्क लगातार कम हो रहा है।

भारत में बदल रही है कंटेंट की दिशा

भारतीय पॉडकास्टिंग में सबसे बड़ा अवसर खास और गंभीर रुचि रखने वाली ऑडियंस में दिखाई देता है। पर्सनल फाइनेंस, उद्यमिता, बिजनेस लीडरशिप, करियर, निवेश, टेक्नोलॉजी और पर्सनल ग्रोथ जैसे विषयों पर लोग सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि नई चीजें सीखने और बेहतर फैसले लेने के लिए आते हैं। इसी दिशा में Brand-led Podcasts भी महत्वपूर्ण हो रहे हैं।

HDFC Life की पहल Risk & Riches इसका एक उदाहरण है। यह KlarifyLife/HDFC Life initiative से जुड़ा यह उद्यमिता पर केंद्रित पॉडकास्ट है। जिसमें भारत के D2C फाउंडर्स और ब्रांड्स की जर्नी के साथ उद्यमिता और फाइनेंशियल प्लानिंग पर चर्चा की जाती है।

इसी तरह Godrej Enterprises Group का Be All You Can बिजनेस से आगे बढ़कर पर्पस, लीडरशिप, इनोवेशन और पर्सनल ग्रोथ जैसे विषयों पर बातचीत करता है। इसके हालिया एपिसोड में उद्यमिता, बिजनेस लीडरशिप, मुश्किल परिस्थितियों से उबरने, जीवन के उद्देश्य और व्यक्तिगत विकास जैसे विषयों पर चर्चा होती है।

इसी तरह Axis Mutual Fund का Moneynomics सेविंग्स, इंवेस्टमेंट, टैक्स और रोजमर्रा की पर्सनल फाइनेंस से जुड़े सवालों को आसान भाषा में समझाती है।

ICICI Direct की पॉडकास्ट सीरीज में भी पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक्स और इंवेस्टमेंट से जुड़े विषय शामिल हैं। इसके एपिसोड में फाइनेंशियल प्लानिंग, डेट फंड्स, NPS, इंवेस्टमेंट जर्नी और मार्केट से जुड़े टॉपिक्स जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

यही बदलाव बताता है कि कंपनियां पॉडकास्ट को सिर्फ विज्ञापन की जगह के रूप में नहीं देख रही हैं। वे इसे thought leadership, trust building और brand storytelling के माध्यम के रूप में भी इस्तेमाल कर रही हैं।

भारत में कौन-कौन से प्लेटफॉर्म हैं महत्वपूर्ण?

भारत में पॉडकास्ट सुनने के लिए किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भरता नहीं है। ऑडियो और वीडियो दोनों फॉर्मेट के कारण ऑडियंस कई सर्विसेस में बंटी हुई है।

  1. YouTube- वीडियो पॉडकास्ट, इंटरव्यू और क्लिप्स और शॉर्ट्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण डिस्कवरी प्लेटफॉर्म में से एक
     
  2. Spotify- ऑडियो-फर्स्ट पॉडकास्ट कंजम्पशन के लिए प्रमुख प्लेटफॉर्म।
     
  3. Apple Podcasts- पॉडकास्ट डिस्कवरी और सब्सक्रिप्शन इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा।
     
  4. Amazon Music- पॉडकास्ट्स और ऑडियो कंटेंट के लिए प्रमुख स्ट्रीमिंग सर्विस।
     
  5. JioSaavn- भारत के बड़े ऑडियो स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम में शामिल।
     
  6. Kuku FM- भारतीय भाषाओं में ऑडियो सीरीज और स्पोकन-कंटेंट के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म।
     
  7. Pocket FM- ऑडियो एंटरटेनमेंट और सीरियलाइज्ड स्टोरीटेलिंग में तेजी से उभरता भारतीय प्लेटफॉर्म।
     
  8. Audible India- ऑडियोबुक्स के साथ स्पोकन-वर्ड और पॉडकास्ट-स्टाइल कंटेंट के लिए उपयोगी इकोसिस्टम।

वीडियो पॉडकास्ट ने बदल दिया कमाई का गणित

भारत में पॉडकास्ट और वीडियो पॉडकास्ट के बीच का अंतर लगातार कम हो रहा है। एक घंटे की बातचीत को YouTube पर पूरे एपिसोड, Spotify पर ऑडियो वर्जन, Instagram पर Reels और YouTube पर Shorts में बदला जा सकता है।

ब्रांड के लिए इसका फायदा और भी बड़ा है। उन्हें सिर्फ ऑडियो में विज्ञापन देने का मौका नहीं मिलता, बल्कि लंबी बातचीत, छोटे वीडियो क्लिप्स, सोशल मीडिया पर पहुंच और क्रिएटर के साथ जुड़ाव- ये सभी एक ही कंटेंट सिस्टम का हिस्सा बन सकते हैं।

हालांकि, वीडियो पॉडकास्ट का दूसरा पहलू इसकी बढ़ी हुई प्रोडक्शन लागत है। कैमरा, लाइटिंग, स्टूडियो, कई माइक्रोफोन, एडिटिंग, थंबनेल और शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट तैयार करने की वजह से इसकी लागत सिर्फ ऑडियो पॉडकास्ट की तुलना में ज्यादा हो सकती है।

कमाई सिर्फ विज्ञापन से नहीं होगी

पॉडकास्टिंग के सामने सबसे बड़ी कारोबारी चुनौती यही है कि ऑडियंस बढ़ने और कमाई बढ़ने की रफ्तार हमेशा एक जैसी नहीं होती।

इसके बावजूद मोनेटाइजेशन के कई रास्ते हैं:

  • Sponsorship और host-read advertising
  • Branded podcasts
  • Premium subscriptions
  • Paid communities
  • Live podcast events
  • Affiliate commerce
  • Courses और educational products
  • Creator merchandise
  • Platform licensing और exclusive content
  • Corporate thought-leadership series

यही वजह है कि पॉडकास्ट को सिर्फ ‘विज्ञापन का माध्यम’ मानना उसके पूरे कारोबारी अवसर को नजरअंदाज करना होगा।

पॉडकास्टिंग में अब आगे क्या?

क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट, खास ऑडियंस और बेहतर डेटा पॉडकास्टिंग के अगले बड़े अवसर बन सकते हैं। कमाई के कई साधनों के साथ पॉडकास्ट सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि पूरा बिजनेस बन सकता है। अब ऑडियंस की संख्या बड़ी है, अगली चुनौती यह देखना है कि उससे होने वाली कमाई कितनी बड़ी होती है।

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