कर्ज के जाल में फंसा यह अमीर देश, एक्सपर्ट्स बोले हालात नहीं संभले तो इकोनॉमी पर बड़ा खतरा
फ्रांस की गिनती दुनिया के अमीर देशों में होती है, लेकिन अब यही देश कर्ज के बड़े दबाव में दिख रहा है। एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले सालों में फ्रांस का कर्ज GDP के मुकाबले बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- फ्रांस पर सार्वजनिक कर्ज 3.5 ट्रिलियन यूरो से ज्यादा हो गया है, जो GDP का करीब 117.5% है।
- एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक कर्ज GDP के 203% तक पहुंच सकता है।
- ब्याज भुगतान का बोझ तेजी से बढ़ रहा है और 2029 तक यह खर्च 100 अरब यूरो के करीब पहुंच सकता है।
France Debt Crisis: दुनिया के कई अमीर देश इन दिनों बढ़ते कर्ज की परेशानी से जूझ रहे हैं। अमेरिका के कर्ज को लेकर पहले से चर्चा होती रही है, लेकिन अब फ्रांस को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर फ्रांस ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो आने वाले सालों में उसका कर्ज बहुत तेजी से बढ़ सकता है।
फ्रांस पर इस समय 3.5 ट्रिलियन यूरो से ज्यादा का सार्वजनिक कर्ज है। यह उसके GDP का करीब 117.5 फीसदी हो चुका है। बढ़ती उधारी लागत और ब्याज भुगतान ने निवेशकों और अर्थशास्त्रियों की चिंता बढ़ा दी है।
स्नोबॉल इफेक्ट का खतरा
फ्रांस को लेकर एक्सपर्ट्स ने स्नोबॉल इफेक्ट का खतरा बताया है। आसान भाषा में समझें, तो यह ऐसी स्थिति होती है, जहां कर्ज पर लगने वाला ब्याज देश की आर्थिक ग्रोथ से ज्यादा तेजी से बढ़ने लगता है। इससे कर्ज धीरे-धीरे और बड़ा होता चला जाता है।
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अगर सरकार लगातार अपने खर्च और कमाई में बड़ा संतुलन नहीं रखती, तो कर्ज GDP के मुकाबले और बढ़ सकता है। फ्रांस में अगले राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल भी बढ़ सकती है, जिससे आर्थिक सुधारों की राह मुश्किल हो सकती है।
2050 तक GDP का 203 फीसदी हो सकता है कर्ज
रिपोर्ट के अनुसार, OECD के महासचिव मैथियास कोरमैन ने चेतावनी दी है कि अगर कुछ नहीं किया गया, तो 2050 तक फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज उसकी GDP के 203 फीसदी तक पहुंच सकता है।
इसके साथ ही ब्याज चुकाने का खर्च भी तेजी से बढ़ने की आशंका है। अनुमान है कि 2029 तक फ्रांस को ब्याज भुगतान पर करीब 100 अरब यूरो खर्च करने पड़ सकते हैं।
ब्याज भुगतान बना बड़ा बोझ
साल 2025 में फ्रांस ने कर्ज के ब्याज भुगतान पर 66 अरब यूरो खर्च किए। यह देश के सबसे बड़े खर्चों में शामिल रहा। कोर्ट डेस कॉम्प्टेस ने भी चेतावनी दी है कि आने वाले सालों में यह खर्च और बढ़ सकता है।
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एक अधिकारी ने कहा कि अगर फ्रांस इस स्थिति को संभाल नहीं पाता, तो देश कर्ज के ब्याज के बोझ से दब सकता है। इस बोझ को कम करने में कई साल लग सकते हैं।
राजनीतिक मुद्दा बना कर्ज
फ्रांस में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। ऐसे में कर्ज का मुद्दा राजनीति के केंद्र में आ गया है। कई नेताओं ने इसे अपने चुनाव अभियान का बड़ा मुद्दा बनाया है।
एक सांसद ने चेतावनी दी है कि जितनी देर से कदम उठाए जाएंगे, परिणाम उतने ही गंभीर हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मजबूत आर्थिक ग्रोथ या बजट संतुलन से राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल यह आसान नहीं दिख रहा है।