FPI के भरोसे खरीद रहे हैं स्टॉक? एक्सपर्ट ने बताया किन संकेतों पर दें ध्यान
विदेशी निवेशक शेयर बाजार में पैसा लगा रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हर शेयर में तेजी आएगी। कंपनी की कमाई, शेयर की कीमत और सेक्टर की हालत देखे बिना केवल FPI की खरीदारी के पीछे भागना निवेशकों को नुकसान में डाल सकता है।

In Short
- केवल FPI की खरीदारी देखकर शेयर में पैसा लगाना सही नहीं।
- मिड और स्मॉल कैप शेयरों में वैल्यूएशन का खतरा ज्यादा।
- निवेश से पहले कंपनी की कमाई और सेक्टर की हालत देखें।
FPI Investment: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों यानी FPI की खरीदारी और बिकवाली की अक्सर चर्चा होती है। कई लोग इसे बाजार पर भरोसे का संकेत मानते हैं और इसी आधार पर शेयर खरीदने या बेचने का फैसला कर लेते हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि केवल FPI को देखकर निवेश करना सही नहीं है। किसी शेयर की कीमत पर कंपनी की कमाई, उसका वैल्यूएशन और उस सेक्टर की हालत भी असर डालती है।
FPI की नकल करके निवेश न करें
Ametra PMS के को-फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर करण अग्रवाल के मुताबिक, विदेशी निवेशक किसी कंपनी में पैसा लगाने से पहले उसकी आने वाली कमाई और शेयर की मौजूदा कीमत देखते हैं।
इसलिए सिर्फ यह देखकर किसी शेयर में पैसा लगाना कि विदेशी निवेशक उसे खरीद रहे हैं, गलत फैसला हो सकता है। हर निवेशक को अपनी समझ और जांच के बाद ही फैसला लेना चाहिए।
पूरे बाजार को बराबर फायदा नहीं मिलता
FPI की खरीदारी का फायदा बाजार के हर हिस्से को एक जैसा नहीं मिलता। विदेशी निवेशक आमतौर पर बड़ी कंपनियों यानी लार्ज-कैप शेयरों में ज्यादा पैसा लगाते हैं। वहीं, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में घरेलू बड़े निवेशकों और आम लोगों की SIP से आने वाले पैसे की बड़ी भूमिका होती है।
करण अग्रवाल के मुताबिक, मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स इस समय करीब 30 के P/E पर कारोबार कर रहे हैं। यह कीमत तभी ठीक मानी जा सकती है, जब कंपनियों की कमाई FY27 में करीब 20 से 25 प्रतिशत बढ़े।
अगर कंपनियों की कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ती है, तो इन शेयरों में गिरावट का खतरा बढ़ सकता है।
कमाई के मुकाबले महंगा है बाजार
अप्रैल 2025 में विदेशी निवेशकों ने तब खरीदारी बढ़ाई थी, जब बाजार का वैल्यूएशन 2024 के ऊपरी स्तर से करीब 20 प्रतिशत गिर चुका था। उस समय RBI से ब्याज दर घटने की उम्मीद भी थी, जिससे कंपनियों की कमाई बेहतर होने की संभावना बनी थी।
लेकिन अभी हालात अलग हैं। निफ्टी इस समय करीब 20 गुना कमाई पर कारोबार कर रहा है, जबकि FY25 में प्रति शेयर कमाई यानी EPS की बढ़ोतरी करीब 5 प्रतिशत है।
इस आधार पर PEG रेश्यो करीब चार बनता है, जबकि आमतौर पर एक से 1.5 का स्तर ठीक माना जाता है। इसका मतलब है कि शेयरों की कीमत कमाई के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ी है।
सेक्टर की हालत भी जरूर देखें
बैंकिंग शेयर अपने पुराने औसत के मुकाबले कम कीमत पर कारोबार कर रहे हैं। लेकिन बैंकों की कमाई बढ़ने की रफ्तार पहले के करीब 20 प्रतिशत से घटकर अब 4 से 6 प्रतिशत रह गई है।
इसलिए निवेशकों को केवल FPI के आंकड़े देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। कंपनी की कमाई, शेयर की सही कीमत और सेक्टर में आगे बढ़ने की संभावना को भी समझना जरूरी है।
FPI का निवेश बाजार का एक संकेत जरूर है, लेकिन निवेश का फैसला करने के लिए केवल यही काफी नहीं है।