कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से भारत को राहत! डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया, जानें वजह
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद भारतीय रुपये और सरकारी बॉन्ड मार्केट में तेजी देखने को मिली है। इससे महंगाई और तेल आयात पर होने वाले खर्च को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। हालांकि, रुपये की मजबूती को लेकर एक्सपर्ट ने एक अहम बात कही है। जानिए पूरी खबर।

In Short
- कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से भारतीय रुपये और सरकारी बॉन्ड को मिला सहारा।
- डॉलर के मुकाबले रुपया 0.3% मजबूत होकर 94.36 पर पहुंचा, 10 साल की बॉन्ड यील्ड घटकर 7.11% हुई।
- एक्सपर्ट के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपये का 93-94 के स्तर से आगे मजबूत होना मुश्किल हो सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट का असर भारतीय रुपये और बॉन्ड मार्केट पर देखने को मिला है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल सस्ता होने से भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा कुछ कम हुआ है। साथ ही विदेशों से तेल खरीदने पर होने वाले खर्च को लेकर भी चिंता घटी है। इसी वजह से भारतीय रुपये में मजबूती आई है और सरकारी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट दर्ज की गई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बदलाव का असर देश की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
रुपये में मजबूती, बॉन्ड यील्ड में गिरावट
भारतीय बॉन्ड मार्केट में तेजी देखने को मिली है। देश के बेंचमार्क 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 8 बेसिस पॉइंट गिरकर 7.11 फीसदी पर आ गई है। वहीं, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी मजबूत होकर 94.36 के स्तर पर पहुंच गया।
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी जारी है। इससे पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड 8 फीसदी से ज्यादा टूट गया था।
अमेरिकी चुनाव और मिडिल ईस्ट युद्ध का असर
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी हैं। निवेशकों का मानना है कि अगर अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी मध्यावधि चुनाव में पूरी तरह जीत हासिल करती है, तो मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध खत्म करने की कोशिशें तेज हो सकती हैं।
इसी उम्मीद के चलते तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है। इसका फायदा भारतीय रुपये और बॉन्ड मार्केट को मिला है।
रुपये में कितनी और मजबूती आ सकती है?
ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप के फॉरेक्स स्ट्रैटेजिस्ट धीरज निम के मुताबिक, रुपये और बॉन्ड में गिरावट की उम्मीद में निवेशकों ने काफी पोजीशन बना रखी थीं। ऐसे में बाजार में वापसी की गुंजाइश पहले से मौजूद थी। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने इसके लिए मौका दे दिया।
हालांकि, निम का मानना है कि रुपये के लिए डॉलर के मुकाबले 93 से 94 के स्तर से आगे मजबूत होना मुश्किल हो सकता है। इसकी वजह यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक को अपना विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए डॉलर की खरीदारी करनी पड़ सकती है।
महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता घटी
इस हफ्ते रुपये और बॉन्ड में आई तेजी से पता चलता है कि निवेशकों की महंगाई और तेल आयात के खर्च को लेकर चिंता कुछ कम हुई है।
पिछले महीने बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड करीब चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। उस समय निवेशक ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी की संभावना को ध्यान में रखकर कारोबार कर रहे थे।
दूसरी तरफ, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंचने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने करेंसी मार्केट में कई नए सख्त प्रतिबंधों की घोषणा की थी। अब तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को कुछ राहत मिली है।