Crude Oil Price: 110 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल, सऊदी अरब पर हमलों से बढ़ी चिंता, भारत पर क्या होगा असर?

कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं। सऊदी अरब पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ते खतरे ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे और आम लोगों की जेब पर कितना असर पड़ेगा?

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कच्चा तेल महंगा होने से भारत में महंगाई बढ़ने और व्यापार संतुलन पर दबाव पड़ने का खतरा है।
कच्चा तेल महंगा होने से भारत में महंगाई बढ़ने और व्यापार संतुलन पर दबाव पड़ने का खतरा है।

In Short

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 106.58 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा।
  • सऊदी अरामको के ठिकाने पर हमले और होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी।
  • कच्चा तेल महंगा रहने से भारत का आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।

By Shakshi:

Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर तेजी से बढ़ रही हैं। सऊदी अरब में हुए हमलों और मिडिल ईस्ट में तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के बीच क्रूड ऑयल 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रहा है। अगर कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो भारत के लिए तेल आयात महंगा हो सकता है। इसका असर महंगाई और रुपये पर भी पड़ने की आशंका है।

बुधवार, 14 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 106.58 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 94.94 डॉलर प्रति बैरल थी।

तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह सऊदी अरब के ठिकानों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता है।

सऊदी अरब पर हमलों से क्यों बढ़ रही तेल की कीमत?

यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। मंगलवार, 13 अक्टूबर को सऊदी अरामको के धहरान स्थित प्रशासनिक भवन पर संदिग्ध हूती हमला हुआ था। इससे इमारत में सीमित स्तर पर आग लग गई।

सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है। ऐसे में वहां तेल से जुड़े ठिकानों पर हमले की खबर से सप्लाई बाधित होने का डर बढ़ जाता है।

इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यह दुनिया में तेल की सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहां जहाजों पर हमलों और टैंकरों की आवाजाही में रुकावट से तेल की ढुलाई और बीमा का खर्च बढ़ सकता है।

भले ही तेल का उत्पादन जारी रहे, लेकिन खरीदारों तक उसकी डिलीवरी में देरी होने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

रूस से डीजल की अतिरिक्त सप्लाई बढ़ने की संभावना से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, बाजार को आशंका है कि यह मिडिल ईस्ट में सप्लाई से जुड़े जोखिमों की पूरी भरपाई नहीं कर पाएगी।

भारत में पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है।

इसका असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है। तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ सकती है, जिससे आम इस्तेमाल की चीजों की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी। घरेलू ईंधन की कीमतें टैक्स, तेल कंपनियों के फैसलों और दूसरे कारकों पर भी निर्भर करती हैं।

कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ने से डॉलर की मांग भी बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है।

फिलहाल निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट के हालात, सऊदी अरब के तेल ठिकानों की सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन्हीं घटनाक्रमों से कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय हो सकती है।

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