दिल्ली के व्यापारियों के नुकसान के आरोपों पर CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने दिया जवाब
दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर व्यापारियों और CJP के बीच विवाद बढ़ गया है। कारोबार में भारी नुकसान के दावों के बीच अभिजीत डिपके ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। आखिर किसे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और अदालत ने क्या कहा?

In Short
- दिल्ली में तीन हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच व्यापारियों ने करीब 2,000 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया है।
- CJP संस्थापक अभिजीत डिपके ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं, बल्कि सरकारी पाबंदियां कारोबार को नुकसान पहुंचाती हैं।
- व्यापारियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आजीविका प्रभावित होने की स्थिति में मुआवजे पर विचार करने की बात कही है।
दिल्ली के कनॉट प्लेस और खान मार्केट में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों से व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कारोबारियों का दावा है कि प्रदर्शन और पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई है। इस बीच कॉकroach जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने व्यापारियों के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है।
प्रदर्शन से नहीं, शहर बंद करने से होता है नुकसान: दिपके
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों से कारोबार को नुकसान नहीं होता। उनके मुताबिक, नुकसान तब होता है जब सरकार पूरे शहर को बंद कर देती है, इंटरनेट सेवाएं रोकती है और लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाती है।
दिपके ने कहा कि CJP अपनी स्थापना के समय से ही महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के रास्ते पर चल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार से जवाब मांगना और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्होंने बताया कि मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में पार्टी के प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। दिपके ने सत्ताधारी दल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार माना जाता है, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसी अधिकार पर सवाल उठाए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे दिल्ली के व्यापारी
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने पिछले तीन हफ्तों से चल रहे प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संगठन का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों से दुकानदारों, वेटरों, ड्राइवरों और छोटे कारोबारियों की कमाई प्रभावित हुई है।
व्यापारियों ने दावा किया कि प्रदर्शनों और बैरिकेडिंग के कारण अब तक करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अगर प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका पर अनुचित असर पड़ता है, तो मुआवजे पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने प्रदर्शनकारियों, व्यापारियों और प्रशासन के हितों के बीच संतुलन बनाने की बात कही।
खान मार्केट में कारोबार घटकर 10 से 20 फीसदी रह गया
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने बताया कि बाजार खुला होने के बावजूद ग्राहक नहीं पहुंच रहे हैं। पुलिस की बैरिकेडिंग बाजार से करीब एक किलोमीटर पहले शुरू हो जाती है।
उनके मुताबिक, कारोबार घटकर सामान्य स्तर के सिर्फ 10 से 20 फीसदी तक रह गया है।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
CJP के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए मध्य दिल्ली में 6,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 220 कंपनियां तैनात की गई हैं। कनॉट प्लेस में भीड़ जुटाने पर रोक लगाई गई है, जबकि सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा।
CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। पार्टी ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है।