म्याऊं या भौंकने का अब समझ में आएगा मतलब! क्या वाकई जानवरों की भाषा समझेगा यह एआई? जानें PetChat की सच्चाई

चीन के हांगझोउ शहर की स्टार्टअप कंपनी Meng Xiaoyi ने PetChat नाम का एक छोटा एआई डिवाइस तैयार किया है। यह सिर्फ 27.2 ग्राम का प्लास्टिक क्लिप है, जिसे बिल्ली या कुत्ते के कॉलर में लगाया जाता है।

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By Gaurav Kumar:

Animal PetChat: अगर आपका पालतू जानवर जैसे- बिल्ली या कुत्ता आपके बात कर पाता तो सोचिए कितना अच्छा होता। उसकी हर बात आप समझ पाते वह आपको हर बात बताता कि 'मुझे भूख लगी है', 'मुझे बाहर घूमने जाना है' या फिर 'मुझसे खेलो'। 

अब चीन का एक स्टार्टअप दावा कर रहा है कि उसने ऐसी डिवाइस बना ली है, जो पालतू जानवरों की आवाजों को इंसानी भाषा में बदल सकती है।

चीन के हांगझोउ शहर की स्टार्टअप कंपनी Meng Xiaoyi ने PetChat नाम का एक छोटा एआई डिवाइस तैयार किया है। यह सिर्फ 27.2 ग्राम का प्लास्टिक क्लिप है, जिसे बिल्ली या कुत्ते के कॉलर में लगाया जाता है। बिजनेस टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस जानवरों की आवाज, बॉडी लैंग्वेज और मूवमेंट को समझकर सिर्फ 1.2 सेकंड में इंसानी भाषा में ट्रांसलेट कर सकती है।

कैसे काम करती है यह डिवाइस?

यह डिवाइस Alibaba Cloud के Qwen AI मॉडल पर काम करती है। इसमें माइक्रोफोन, मोशन सेंसर और एक्सेलेरोमीटर लगे होते हैं, जो जानवर की आवाज, चलने का तरीका, पूंछ की हरकत और कानों की स्थिति जैसी चीजों को रिकॉर्ड करता है।

इसके बाद एआई इन सभी डेटा को कंपनी के बड़े डेटाबेस से मिलाता है, जिसमें 15 लाख से ज्यादा पालतू जानवरों की आवाजें और हजारों घंटे के वीडियो शामिल हैं। फिर सिस्टम यह अनुमान लगाता है कि जानवर क्या महसूस कर रहा है और मोबाइल ऐप पर उसको डिकोड करके दिखा देता है।

कैसी होगी PetChat?

अगर बिल्ली लंबी म्याऊं करे तो ऐप दिखा सकता है - मैं खेलना चाहती हूं और अगर कुत्ता दरवाजे के पास भौंके तो स्क्रीन पर लिखा आएगा-मुझे भूख लगी है। 

कंपनी का दावा है कि यह सिर्फ जानवरों की बात समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि इंसानों की बात को भी ऐसे साउंड सिग्नल में बदल सकता है, जिन्हें पालतू जानवर समझ सकें।

मार्केट में कब आएगा ये डिवाइस और क्या होगी कीमत?

यह डिवाइस 30 मई को रिलीज होगी। इसकी इस अनोखी खूबी की वजह से सोशल मीडिया पर यह डिवाइस तेजी से वायरल हो गई। ऑफिशियल लॉन्च से पहले ही इसके 10,000 से ज्यादा प्री-ऑर्डर आ चुके हैं। इसकी कीमत करीब 799 युआन (118 डॉलर) होगी।

स्टार्टअप का दावा 

स्टार्टअप बनाने वाली कंपनी दावा करती है कि वह 90% से ज्यादा मैसेज को डिकोड कर लेती है। इसमें बिल्लियों की भावनाओं को पहचानने में 94.6% तक और कुत्तों के लिए 92.3% तक सटीकता का दावा किया गया है। 

डिवाइस आने से पहले विवाद शुरू

जहां कुछ लोग इसे फ्यूचर की टेक्नोलॉजी बता रहे हैं, वहीं कई साइंटिस्ट और एनिमल एक्सपर्ट्स इस पर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह एआई  मार्केटिंग ज्यादा और रियल साइंस कम लगती है।

कई वेटनरी एक्सपर्ट्स ने इस महंगी डिवाइस को  महंगा IQ Tax तक बता दिया है। उनका कहना है कि जानवरों की आवाज सिर्फ आवाज नहीं होती, बल्कि उसका मतलब सिचुएशन पर भी डिपेंड करता है।

जैसे कुत्ता खाने के कटोरे के पास भौंके तो मतलब कुछ और हो सकता है और वहीं किसी अनजान व्यक्ति पर भौंके तो कुछ और मतलब निकलेगा। ऐसे में सिर्फ कॉलर में लगा छोटा डिवाइस हर स्थिति को पूरी तरह समझ पाएगा या नहीं, इस पर शक की स्थिति बनी रहेगी। 

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