क्या फिर करीब आ रहे हैं भारत और चीन? नए निवेश ढांचे ने बढ़ाई उम्मीदें
भारत और चीन के बीच कारोबार संबंधों को नई दिशा देने की तैयारी चल रही है। दोनों देश निवेश बढ़ाने और बिजनेस सहयोग आसान बनाने के लिए नए ढांचे पर चर्चा कर रहे हैं। शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले इस आर्थिक पहल को लेकर कई अहम प्रस्ताव सामने आए हैं।

In Short
- भारत और चीन कारोबार संबंधों को मजबूत करने के लिए नए निवेश ढांचे पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे चीनी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
- शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा के दौरान चीन निवेश पैकेज का ऐलान कर सकता है, जिसमें SEZ और एक्सपोर्ट जोन जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
- भारत गैर-संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने पर विचार कर रहा है, लेकिन रक्षा और LAC से जुड़े क्षेत्रों में पाबंदियां जारी रहेंगी।
भारत और चीन कारोबार संबंधों को फिर मजबूत करने के लिए एक नए निवेश ढांचे पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देश बिजनेस-टू-बिजनेस एक्सचेंज बढ़ाने और चीनी निवेश को आसान बनाने के विकल्प तलाश रहे हैं। यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिख रहे हैं।
Xi Jinping की भारत यात्रा में हो सकता है ऐलान
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को BRICS समिट के लिए भारत दौरे पर आ सकते हैं। इस दौरान बीजिंग भारत के लिए निवेश पैकेज का ऐलान कर सकता है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस मुलाकात की जमीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की हालिया बीजिंग यात्रा के दौरान तैयार हुई।
SEZ और चीनी कंपनियों की पहुंच पर चर्चा
दोनों देशों के बीच जिन प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है, उनमें समुद्री मार्गों तक आसान पहुंच वाला विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) शामिल है। इसके अलावा चीनी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों, जिसमें BYD भी शामिल है, को भारतीय बाजार में ज्यादा पहुंच देने का प्रस्ताव भी बातचीत का हिस्सा हो सकता है।
एक अन्य प्रस्ताव भारत में चीनी फंडिंग से एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन स्थापित करने का है। इससे भारत से तीसरे देशों को निर्यात बढ़ाने में मदद मिल सकती है। चीन शी जिनपिंग की भारत यात्रा को संभावित निवेश घोषणाओं के लिए इस्तेमाल करना चाहता है।
संवेदनशील क्षेत्रों में जारी रहेंगी पाबंदियां
हालांकि प्रस्तावित निवेश पैकेज बहुत बड़ा नहीं हो सकता, क्योंकि दोनों देश छह साल से जमे मतभेदों को धीरे-धीरे सुलझाने पर ध्यान दे रहे हैं।भारत गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी निवेश की मंजूरी प्रक्रिया को और आसान बनाने पर विचार कर रहा है। लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC), रक्षा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े प्रोजेक्ट पर प्रतिबंध जारी रहेंगे।
भारत की नजर टेक्नोलॉजी और कच्चे माल की सप्लाई पर
भारत चीन से टेक्नोलॉजी और जरूरी कच्चे माल की सप्लाई को अधिक भरोसेमंद बनाने की मांग कर रहा है। साथ ही नई दिल्ली चीनी निवेश बढ़ाने और भारत से औद्योगिक सामानों के आयात को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे को कम किया जा सके।