चेन्नई प्रॉपर्टी टैक्स: टैक्स बढ़ा नहीं फिर भी क्यों आ रहे ज्यादा डिमांड नोटिस? जानिए वजह

चेन्नई में कुछ प्रॉपर्टी मालिकों को मिले ज्यादा टैक्स डिमांड नोटिस ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लेकिन क्या सच में टैक्स बढ़ाया गया है? जीसीसी ने इस मामले में पूरी स्थिति साफ की है। जानिए किन लोगों को नोटिस मिला, इसकी वजह क्या है और आपत्ति दर्ज करने का तरीका क्या है।

Advertisement

In Short

  • चेन्नई में प्रॉपर्टी टैक्स की दरें नहीं बढ़ीं, जीसीसी ने दी सफाई
  • गलत या कम आकलन वाली प्रॉपर्टी को भेजे गए ज्यादा रकम वाले नोटिस
  • 15 दिन के अंदर डिप्टी कमिश्नर के पास दर्ज कर सकते हैं आपत्ति

By Gaurav Kumar:

ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने साफ किया है कि चेन्नई में प्रॉपर्टी टैक्स की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। कुछ प्रॉपर्टी मालिकों और कमर्शियल संस्थानों को ज्यादा रकम वाले संशोधित टैक्स डिमांड नोटिस इसलिए मिले हैं क्योंकि उनकी प्रॉपर्टी का पहले कम या गलत आकलन किया गया था।अब सवाल यह है कि अगर टैक्स की दरें नहीं बढ़ी हैं तो कुछ लोगों को ज्यादा डिमांड क्यों भेजी गई है और इसके पीछे जीसीसी की पूरी प्रक्रिया क्या है।

चेन्नई में प्रॉपर्टी टैक्स नहीं बढ़ा, सिर्फ आकलन हुआ सही

जीसीसी कमिश्नर जी एस समीरन ने 12 अगस्त को बताया कि ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन में प्रॉपर्टी टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि संशोधित नोटिस सिर्फ उन्हीं प्रॉपर्टी मालिकों को भेजे गए हैं, जिनकी प्रॉपर्टी का पहले सही तरीके से आकलन नहीं हुआ था।

नगर निकाय ने यह भी कहा कि चेन्नई में प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ने की खबरें गलत हैं। लोगों को ऐसी जानकारी पर भरोसा करने के बजाय जीसीसी की आधिकारिक जानकारी देखनी चाहिए।

किन प्रॉपर्टी मालिकों को मिला ज्यादा टैक्स का नोटिस?

जीसीसी ने बताया कि कई प्रॉपर्टी की जानकारी में अंतर पाया गया है। इसके लिए कॉरपोरेशन ने जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट डेटा, सरकारी रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी मालिकों की ओर से दी गई जानकारी जैसे कई स्रोतों की मदद ली।

अगर किसी प्रॉपर्टी का क्षेत्रफल रिकॉर्ड में कम दर्ज था, लेकिन जांच में वह ज्यादा पाया गया, तो उसी हिसाब से नया टैक्स डिमांड तैयार किया गया। यानी ज्यादा टैक्स प्रॉपर्टी टैक्स की दर बढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि प्रॉपर्टी की सही जानकारी अपडेट होने के कारण आया है।

जीसीसी ने इसे बताया राजस्व सुधार प्रक्रिया

कॉरपोरेशन के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया राजस्व सुधार और आकलन में हुई गलतियों को ठीक करने का हिस्सा है। इसका मकसद उन गलत आकलनों को सुधारना है, जिनमें प्रॉपर्टी का असली क्षेत्रफल या दूसरी जानकारी सही दर्ज नहीं थी।

उदाहरण के तौर पर अगर किसी प्रॉपर्टी का टैक्स पहले छोटे क्षेत्रफल के आधार पर लिया जा रहा था और बाद में उसका असली क्षेत्रफल ज्यादा मिला, तो संशोधित नोटिस में रकम बढ़ सकती है।

गलत आकलन लगे तो 15 दिन में कर सकते हैं अपील

अगर किसी प्रॉपर्टी मालिक को लगता है कि उसका संशोधित आकलन गलत है, तो वह नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर संबंधित क्षेत्रीय डिप्टी कमिश्नर के पास अपील कर सकता है।

जीसीसी ने कहा है कि ऐसी अपील का निपटारा 30 दिनों के अंदर किया जाएगा। अपील करने से पहले मालिकों को नोटिस में दी गई प्रॉपर्टी की जानकारी, खासकर क्षेत्रफल और आकलन से जुड़ी जानकारी को ध्यान से जांच लेना चाहिए।

प्रॉपर्टी मालिकों को अब क्या करना चाहिए?

जिन लोगों को नया डिमांड नोटिस मिला है, उन्हें सबसे पहले नोटिस में दर्ज प्रॉपर्टी की जानकारी को अपने रिकॉर्ड से मिलाना चाहिए। अगर क्षेत्रफल या दूसरी जानकारी गलत है तो तय समय के अंदर आपत्ति दर्ज करनी चाहिए।

जीसीसी ने लोगों से अपील की है कि प्रॉपर्टी से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए संबंधित क्षेत्रीय डिप्टी कमिश्नर कार्यालय से संपर्क करें। ज्यादा रकम वाला नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि चेन्नई में सभी के लिए नया प्रॉपर्टी टैक्स लागू कर दिया गया है। यह सिर्फ उन प्रॉपर्टी के आकलन को सही करने की प्रक्रिया है, जिनकी जानकारी में अंतर पाया गया है।

Read more!
Advertisement