रैपिडो पर ₹10 लाख का जुर्माना, CCPA ने डार्क पैटर्न और भ्रामक टिपिंग प्रॉम्प्ट पर की कार्रवाई
राइड बुकिंग के दौरान ज्यादा पैसे देने के लिए प्रेरित करने वाले प्रॉम्प्ट और डिजाइन को लेकर रैपिडो पर CCPA ने कार्रवाई की है। उपभोक्ता प्राधिकरण ने कंपनी पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है। जांच में ऐप के कुछ फीचर्स को डार्क पैटर्न माना गया, जो ग्राहकों के फैसले को प्रभावित कर सकते थे।

In Short
- CCPA ने रैपिडो की पैरेंट कंपनी Roppen Transportation Services पर लगाया ₹10 लाख का जुर्माना।
- ऐप पर ज्यादा भुगतान से राइड मिलने की संभावना बढ़ने वाले प्रॉम्प्ट को प्राधिकरण ने भ्रामक माना।
- Uber Ola और Namma Yatri समेत अन्य राइड प्लेटफॉर्म भी CCPA की जांच के दायरे में।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म रैपिडो का संचालन करने वाली कंपनी Roppen Transportation Services Private Limited पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है। CCPA ने कंपनी पर भ्रामक विज्ञापन, अनुचित व्यापार व्यवहार, अनुचित अनुबंध और डार्क पैटर्न के इस्तेमाल को लेकर यह कार्रवाई की है।
इंडिया टुडे के पत्रकार आशुतोष मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, CCPA की जांच में सामने आया कि रैपिडो के राइड-बुकिंग इंटरफेस में ऐसे प्रॉम्प्ट और डिजाइन एलिमेंट पाए गए, जो यात्रियों को राइड कन्फर्म होने से पहले अतिरिक्त राशि का भुगतान करने के लिए प्रेरित कर सकते थे। यह कार्रवाई देशभर में कैब और बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स की एडवांस टिपिंग और डायनेमिक प्राइसिंग प्रथाओं की जांच के बाद की गई है।
राइड बुकिंग के दौरान ज्यादा पैसे देने के लिए किया गया प्रेरित
CCPA की जांच में पाया गया कि रैपिडो ऐप पर पहले यात्री को एक किराया दिखाया जाता था। इसके बाद बुकिंग प्रक्रिया के दौरान अधिक राशि देने के लिए प्रॉम्प्ट दिखाए जाते थे।
कुछ मामलों में ऐप पर “Higher the price, higher the chance of getting a ride” यानी कीमत जितनी ज्यादा होगी, राइड मिलने की संभावना उतनी अधिक होगी, जैसे संदेश दिखाई देते थे। इसके अलावा “Captains aren’t accepting at ₹60. Try adding +10, +20, +30” जैसे प्रॉम्प्ट भी दिखाए गए।
CCPA के अनुसार, इस तरह के संदेश यात्रियों के मन में यह धारणा बना सकते हैं कि अतिरिक्त भुगतान नहीं करने पर राइड मिलने में परेशानी होगी।
CCPA ने इसे Confirm Shaming डार्क पैटर्न माना
प्राधिकरण ने रैपिडो के इस तरीके को “Confirm Shaming” नामक डार्क पैटर्न की श्रेणी में रखा है। CCPA का कहना है कि जब ग्राहक राइड के लिए प्लेटफॉर्म पर निर्भर हो चुका होता है, तब उसे ज्यादा भुगतान के लिए प्रेरित करना मानसिक दबाव पैदा कर सकता है।
CCPA ने रैपिडो के “Set your price” फीचर के डिजाइन पर भी सवाल उठाए हैं। प्राधिकरण के अनुसार, ज्यादा कीमत वाले विकल्प को हरे रंग और “Higher chance of getting a ride” जैसे संदेश के साथ दिखाया गया, जबकि कम कीमत वाले विकल्पों को चेतावनी वाले रंगों में दिखाया गया।
राइड शुरू होने से पहले टिप लेने पर आपत्ति
CCPA ने राइड शुरू होने से पहले टिप लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। प्राधिकरण ने कहा कि राइड बुकिंग के समय दिखाए जाने वाले किराए में दूरी, समय, ट्रैफिक, टोल और कैप्टन को मिलने वाली राशि जैसे कारक पहले से शामिल होते हैं।
CCPA ने Motor Vehicle Aggregator Guidelines 2025 का हवाला देते हुए कहा कि टिपिंग सुविधा राइड पूरी होने के बाद उपलब्ध कराई जानी चाहिए, न कि बुकिंग के समय।
रैपिडो ने दी सफाई
रैपिडो ने CCPA के सामने कहा कि टिप पूरी तरह स्वैच्छिक है और यात्री अतिरिक्त राशि देता है या नहीं, इससे उसका मैचिंग एल्गोरिदम प्रभावित नहीं होता। कंपनी ने यह भी कहा कि ऐप पर दिखने वाले प्रॉम्प्ट वास्तविक समय में होने वाली बातचीत की तरह हैं।
हालांकि, CCPA ने कंपनी की दलीलें स्वीकार नहीं कीं। प्राधिकरण ने कहा कि ऐप का डिजाइन और प्रॉम्प्ट का समय उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान की ओर प्रभावित कर सकता है।
CCPA ने यह भी पाया कि रैपिडो अपने इस दावे के समर्थन में पर्याप्त डेटा पेश नहीं कर सका कि अतिरिक्त राशि देने से राइड मिलने की संभावना वास्तव में बढ़ जाती है। इसी आधार पर इस दावे को असम्भव और भ्रामक माना गया।
Uber Ola और Namma Yatri भी जांच के दायरे में
रैपिडो के खिलाफ यह कार्रवाई राइड-हेलिंग सेक्टर में CCPA की व्यापक जांच का हिस्सा है। प्राधिकरण इससे पहले Uber, Ola, Rapido और Namma Yatri समेत कई प्लेटफॉर्मों को नोटिस जारी कर चुका है।
CCPA ने कहा कि Consumer Protection Act 2019 के तहत वह उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक और भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। रैपिडो पर लगाया गया ₹10 लाख का जुर्माना डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं के फैसलों को प्रभावित करने वाली डार्क पैटर्न आधारित प्रथाओं पर बढ़ती निगरानी के बीच आया है।