नोटिस पीरियड में छुट्टी ले सकते हैं कर्मचारी? जानिए नियम और कोर्ट के फैसले
नौकरी छोड़ते समय नोटिस पीरियड में छुट्टी लेना आसान लग सकता है, खासकर जब आपके पास छुट्टियां बची हों। लेकिन सिर्फ लीव बैलेंस होना इसका मतलब नहीं है कि आप बिना अप्रूवल छुट्टी ले सकते हैं। ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट, कंपनी की पॉलिसी और कोर्ट के फैसले काफी अहम हो जाते हैं।

In Short
- नोटिस पीरियड में कर्मचारी छुट्टी के लिए अप्लाई कर सकता है, लेकिन सिर्फ लीव बैलेंस होने से छुट्टी लेना उसका ऑटोमैटिक अधिकार नहीं बन जाता।
- अगर कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट या सर्विस रूल्स में रोक नहीं है, तो सैंक्शन की गई छुट्टी नोटिस पीरियड के साथ चल सकती है।
- बिना अप्रूवल छुट्टी लेने पर कर्मचारी के खिलाफ डिसिप्लिनरी एक्शन हो सकता है, हालांकि बीमारी या वास्तविक परेशानी जैसी परिस्थितियों को भी देखा जा सकता है।
notice period leave rules: नौकरी छोड़ते समय नोटिस पीरियड पूरा करना जरूरी होता है, लेकिन इस दौरान अगर कर्मचारी को छुट्टी चाहिए तो क्या वह ले सकता है? आमतौर पर कर्मचारी छुट्टी के लिए अप्लाई कर सकता है, लेकिन छुट्टी मिलना उसका ऑटोमैटिक अधिकार नहीं है। यह कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट, लीव पॉलिसी, सर्विस रूल्स और लागू कानून पर निर्भर करता है। इसी वजह से नोटिस पीरियड में छुट्टी लेने से पहले कुछ जरूरी नियम समझना चाहिए।
नोटिस पीरियड में छुट्टी के लिए अप्रूवल जरूरी
कर्मचारी नोटिस पीरियड के दौरान छुट्टी के लिए लिखित में अप्लाई कर सकता है। लेकिन सिर्फ इसलिए कि उसके लीव अकाउंट में छुट्टियां बची हुई हैं, वह बिना अनुमति छुट्टी पर नहीं जा सकता। कंपनी की तरफ से छुट्टी सैंक्शन होना जरूरी है।
अगर कर्मचारी ने छुट्टी के लिए अप्लाई किया और कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया, तो इसे अपने आप अप्रूवल नहीं माना जाएगा। बिना अनुमति गैरहाजिर रहने पर कर्मचारी के खिलाफ डिसिप्लिनरी एक्शन हो सकता है। इसमें सैलरी कटना या अन्य कार्रवाई शामिल हो सकती है।
क्या छुट्टी नोटिस पीरियड में ही गिनी जाएगी?
सैंक्शन की गई छुट्टी नोटिस पीरियड के साथ चल सकती है, लेकिन यह तभी संभव है जब कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट या सर्विस रूल्स में ऐसा करने पर रोक न हो।
लेबर लॉ रिपोर्टर के मुताबिक, घनश्याम बनाम डीएमआरसी (दिल्ली हाई कोर्ट, 2007) मामले में कोर्ट ने कहा था कि अगर नोटिस क्लॉज में छुट्टी पर रोक नहीं है, तो सैंक्शन की गई छुट्टी सामान्य तौर पर नोटिस पीरियड के साथ चल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सीएएमपीसीओ लिमिटेड बनाम बी. विष्णु मूर्ति (2022) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अलग स्थिति पर फैसला दिया। इसमें सर्विस रूल्स में साफ लिखा था कि लीव और नोटिस पीरियड एक साथ नहीं चल सकते। ऐसे मामले में कर्मचारी दोनों को ओवरलैप करने की मांग नहीं कर सकता।
इसलिए सिर्फ सामान्य नियम जानना काफी नहीं है। कर्मचारी को अपनी कंपनी के सर्विस रूल्स जरूर देखने चाहिए।
बिना अप्रूवल छुट्टी लेने पर क्या होगा?
सैंक्शन की गई और बिना अनुमति ली गई छुट्टी में बड़ा अंतर है। स्टेट ऑफ पंजाब बनाम पी.एल. सिंगला (2008) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बिना अनुमति गैरहाजिरी या मंजूर छुट्टी से ज्यादा समय तक गैरहाजिर रहना मिसकंडक्ट हो सकता है।
वहीं कृष्णकांत बी. परमार बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2012) मामले में कोर्ट ने कहा कि यह भी देखा जाना चाहिए कि कर्मचारी की गैरहाजिरी जानबूझकर थी या नहीं। बीमारी या किसी वास्तविक परेशानी जैसी स्थिति में परिस्थितियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी में क्या करें?
अगर नोटिस पीरियड के दौरान मेडिकल इमरजेंसी आती है, तो कर्मचारी को कंपनी को जल्द से जल्द जानकारी देनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर मेडिकल डॉक्यूमेंट या दूसरे जरूरी प्रूफ भी देने चाहिए। इससे छुट्टी की स्थिति को समझाने में मदद मिल सकती है।
सबसे जरूरी है कंपनी के नियम देखना
श्रीराम मनोहर बांडे बनाम उत्क्रांति समिति (2024) और राजेश कुमार बालक राम चंद्राकर बनाम आईएनएफएलआईबीएनईटी (गुजरात हाई कोर्ट, 2022) जैसे मामलों में भी संबंधित सर्विस रूल्स और नियमों की भूमिका सामने आई।
इसलिए नोटिस पीरियड में कर्मचारी को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि बची हुई छुट्टियां अपने आप नोटिस पीरियड में एडजस्ट हो जाएंगी। अपॉइंटमेंट लेटर, स्टैंडिंग ऑर्डर्स, सर्विस रूल्स और लीव पॉलिसी चेक करें और छुट्टी की लिखित मंजूरी लें। सैंक्शन की गई छुट्टी नियमों के मुताबिक नोटिस पीरियड में गिनी जा सकती है, लेकिन बिना अप्रूवल गैरहाजिरी परेशानी खड़ी कर सकती है।