रेलवे नेटवर्क को मिलेगी नई रफ्तार, 4 राज्यों में 410 किमी नई लाइन बढ़ाने की तैयारी
भारतीय रेलवे को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने चार बड़े मल्टी ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। 9,450 करोड़ रुपये की लागत वाले इन प्रोजेक्ट से चार राज्यों में करीब 410 किमी रेल नेटवर्क बढ़ेगा। इससे यात्री सुविधा, माल ढुलाई और कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलेगा।

In Short
- कैबिनेट ने 9,450 करोड़ रुपये के चार रेलवे मल्टी ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को दी मंजूरी
- चार राज्यों में करीब 410 किमी रेल नेटवर्क बढ़ेगा और 6,448 गांवों को मिलेगा फायदा
- प्रोजेक्ट से 76 MTPA अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी और लॉजिस्टिक लागत कम होगी
केंद्र सरकार ने भारतीय रेलवे की क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने रेलवे के चार मल्टी ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर करीब 9,450 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इससे रेलवे नेटवर्क में लगभग 410 किमी की बढ़ोतरी होगी। इन प्रोजेक्ट के पूरा होने से यात्रियों के साथ माल ढुलाई को भी बड़ी सुविधा मिलेगी और आगे इन रूटों पर ट्रेनों का संचालन ज्यादा बेहतर हो सकेगा।
पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में बढ़ेगी रेल कनेक्टिविटी
मंजूर किए गए चार प्रोजेक्ट में खड़गपुर से भद्रक के बीच 173 किमी की चौथी लाइन शामिल है, जो पश्चिम बंगाल और ओडिशा से होकर गुजरेगी। इसके अलावा ओडिशा में भद्रक से हरिदासपुर तक 75 किमी की चौथी लाइन बनाई जाएगी।
वहीं आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में गुम्मिडिपुंडी से गुडूर के बीच 90 किमी की तीसरी और चौथी लाइन का काम होगा। ओडिशा में कटक से पारादीप के बीच बादाबांधा तक 72 किमी की तीसरी और चौथी लाइन तैयार की जाएगी। इन सभी प्रोजेक्ट को साल 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
8 जिलों के 6,448 गांवों को मिलेगा फायदा
इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 8 जिलों में रेल सुविधा मजबूत होगी। करीब 6,448 गांवों की लगभग 60 लाख आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
सरकार के मुताबिक इन मल्टी ट्रैकिंग प्रोजेक्ट से ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी, रूट पर भीड़ कम होगी और रेलवे की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ेगी। ये प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किए गए हैं, जिसमें अलग-अलग परिवहन साधनों को जोड़कर लॉजिस्टिक व्यवस्था बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।
पर्यटन और कारोबार को भी मिलेगा बढ़ावा
इन रेल प्रोजेक्ट से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इसमें कुलडीहा वाइल्डलाइफ सेंचुरी, भितरकनिका नेशनल पार्क, मां भद्रकाली मंदिर, पंचलिंगेश्वर मंदिर, चांदीपुर बीच, पुलिकट झील, नेल्लापट्टू बर्ड सेंचुरी, धाबलेश्वर मंदिर और ललितगिरी जैसे स्थान शामिल हैं।
इसके अलावा इन रूटों से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और स्टील, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसे सामानों की ढुलाई भी तेज होगी। इससे उद्योगों और स्थानीय कारोबार को फायदा मिलने की उम्मीद है।
हर साल 76 मिलियन टन बढ़ेगी माल ढुलाई क्षमता
रेलवे के अनुसार इन क्षमता बढ़ाने वाले कामों से हर साल करीब 76 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की सुविधा तैयार होगी। रेलवे को देश में परिवहन का ज्यादा पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा बचाने वाला साधन माना जाता है, इसलिए इन प्रोजेक्ट से लॉजिस्टिक लागत कम करने में भी मदद मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से करीब 13 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और लगभग 65 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन कम होगा। यह पर्यावरण के लिए करीब 2.60 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर माना गया है।
रोजगार और विकास को मिलेगी नई गति
सरकार के मुताबिक इन रेलवे प्रोजेक्ट से संबंधित क्षेत्रों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी। बेहतर रेल नेटवर्क से लोगों की आवाजाही आसान होगी और रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इन चारों प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद संबंधित राज्यों में यात्री और माल परिवहन दोनों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।